सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम से भुगतान दिखाया गया है, उनमें से कुछ के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने संबंधित कार्यों में वास्तविक रूप से मजदूरी नहीं की। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई मस्टर रोल, दैनिक उपस्थिति पंजी, कार्यस्थल के अभिलेख, बैंक खातों में हुए भुगतान और संबंधित कार्यों के भौतिक सत्यापन से सामने आ सकती है। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि जिन व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किया गया, वे वास्तव में मजदूरी कार्य में शामिल थे या नहीं।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वन मंडल स्तर अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







