बैकुंठपुर,कोरिया। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना बैकुंठपुर विकासखंड के बंजारीडांड, गड़तर और गोविंदपुर में दो साल से अधिक समय बाद भी अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकी है। पाइपलाइन बिछाने और प्लेटफार्म बनाने के बाद निर्माण एजेंसी और ठेकेदार का काम मानो पूरा हो गया, लेकिन ग्रामीणों के नलों से अब तक पानी नहीं निकला।
विभागीय जवाब में बताया गया है कि बंजारीडांड में 52, गड़तर में 39 और गोविंदपुर में 33 हैंडपंप पहले से स्थापित हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि जब गांवों में पेयजल के लिए पर्याप्त हैंडपंप उपलब्ध थे, तो करोड़ों रुपये खर्च कर पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्य कराने के बाद भी नलजल की सुविधा क्यों नहीं मिल पाई।
विभाग ने अपने जवाब में उधनापुर समूह जल प्रदाय योजना का भी उल्लेख किया है, जिसके माध्यम से इन गांवों में पानी पहुंचाने की बात कही गई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार उधनापुर करीब 50 किलोमीटर दूर है। ऐसे में दूरस्थ स्रोत से पानी लाने वाली योजना पर निर्भरता ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
निर्माण हो गया, सुविधा अभी बाकी
जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन यहां पाइपलाइन और प्लेटफार्म बनने के बावजूद नियमित नलजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि योजना कब पूरी होगी और नल से पानी कब पहुंचेगा। साथ ही योजना में अब तक हुए निर्माण, भुगतान और देरी के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आने की मांग भी उठ रही है।
हैंडपंप बनाम करोड़ों की पाइपलाइन
जब विभाग स्वयं बंजारीडांड, गड़तर और गोविंदपुर में कुल 124 हैंडपंप स्थापित होने की जानकारी दे रहा है, तब करोड़ों रुपये की पाइपलाइन योजना का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता पैदा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कागजों में नहीं, बल्कि नियमित रूप से नल से पानी चाहिए।








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