जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के कार्यकाल में आकस्मिक व्यय, साइकिल, फर्नीचर, पाठ्य पुस्तक, स्वच्छता सामग्री, व्यायाम उपकरण, खेल सामग्री, स्टेशनरी तथा अन्य मदों में खरीदी और भुगतान की प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
4.51 करोड़ रुपये के भुगतान को नियम विरुद्ध बताया
जांच दल के निष्कर्ष में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध सरकारी बजट में से लगभग 4 करोड़ 51 लाख 65 हजार 159 रुपये के देयक तैयार कर नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर और व्यापक वित्तीय एवं सेवा संबंधी अनियमितता के रूप में दर्ज किया गया है।
साइकिल से लेकर फर्नीचर तक खरीदी पर सवाल
सरस्वती साइकिल योजना में बड़ी राशि खर्च किए जाने के बावजूद जांच में भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता प्रमाणिकरण, डिलीवरी चालान और स्टॉक एंट्री से संबंधित गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं।
गैर कार्यालयीन फर्नीचर की खरीदी में भी जिला स्तरीय क्रय समिति के गठन और अनिवार्य भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कई सामग्रियों की जिला, विकासखंड अथवा विद्यालय स्तर पर स्टॉक एंट्री का प्रमाण उपलब्ध नहीं था।
पाठ्य पुस्तकों की खरीदी में भी नियमों की अनदेखी
पाठ्य पुस्तक मद में करीब 64,285 रुपये के भुगतान की जांच में क्रय समिति का गठन नहीं होने, क्रय आदेश उपलब्ध नहीं होने, डिलीवरी चालान नहीं मिलने तथा भौतिक सत्यापन नहीं कराए जाने जैसी कमियां सामने आईं।
जांच दल ने यह भी दर्ज किया कि संबंधित संस्थाओं से पुस्तकों की मांग प्राप्त करने के बजाय जिला शिक्षा कार्यालय स्तर से ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
राजपुर के फर्नीचर में बजट से अधिक भुगतान
कन्या शिक्षा परिसर राजपुर के फर्नीचर की खरीदी में भी अनियमितता पाई गई। जांच के अनुसार स्थानीय फर्म से बिना निर्धारित प्रक्रिया के सामग्री खरीदी गई। उपलब्ध बजट की तुलना में देयक अधिक होने के बावजूद भुगतान किया गया, जबकि खरीदी गई सामग्री की स्टॉक एंट्री और संस्था को वास्तविक प्राप्ति का प्रमाण जांच दल को नहीं मिला।
स्वच्छता सामग्री में सबसे गंभीर सवाल
विद्यालयों के लिए स्वच्छता सामग्री की खरीदी में भी जांच दल ने कई गंभीर बिंदु दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बजट को विकासखंडों में पुनः आवंटित करने के बजाय जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी की गई।
जांच में क्रय समिति के गठन, तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी, स्टॉक एंट्री, डिलीवरी चालान और संस्थावार वितरण सूची को लेकर गंभीर कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट में लगभग 25.23 लाख रुपये की खरीदी का उल्लेख है। जांच दल ने यह भी पाया कि निर्धारित फर्मों के अलावा अन्य फर्म से भी खरीदी की गई और कुछ मामलों में निविदा अथवा कोटेशन प्रक्रिया पर सवाल उठे।
व्यायाम उपकरण की 6 लाख की खरीदी भी घेरे में
प्राथमिक विद्यालयों के लिए करीब 6 लाख रुपये के व्यायाम उपकरण की खरीदी की जांच में भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।
जांच दल के अनुसार इतनी राशि की खरीदी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सीमित कोटेशन के माध्यम से खरीदी किए जाने, क्रय समिति की संरचना में नियमों का पालन नहीं होने तथा सामग्री की स्टॉक एंट्री और वितरण के प्रमाण उपलब्ध नहीं होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निर्धारित वित्तीय सीमा से बचने का प्रयास किया गया।
खेल सामग्री की करीब 15 लाख रुपये की खरीदी
जिले में खेल सामग्री की आपूर्ति के लिए लगभग 14.99 लाख रुपये के खर्च का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है। जांच में क्रय समिति गठन, निविदा प्रक्रिया, डिलीवरी चालान, स्टॉक एंट्री और संस्थावार वितरण से संबंधित दस्तावेजों की कमी सामने आई।
जांच दल ने तकनीकी विशेषज्ञों के बिना गुणवत्ता प्रमाणिकरण किए जाने को भी नियम विरुद्ध बताया।
स्टेशनरी और अन्य खरीदी में भी अनियमितताएं
जांच के दौरान स्टेशनरी एवं अन्य सामग्री की खरीदी से संबंधित बिलों और भुगतान की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कई बिलों में क्रय आदेश, स्वीकृति, सत्यापन और संबंधित अभिलेखों के अभाव का उल्लेख है।
कुछ मामलों में एक ही खरीदी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई, जिसे जांच दल ने निविदा प्रक्रिया से बचने का अनुचित प्रयास माना।
कैशबुक के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल
जांच दल ने जिला शिक्षा कार्यालय की कैशबुक का परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार कैशबुक में कई स्थानों पर अत्यधिक कटिंग, ओवरराइटिंग और संशोधन पाए गए।
कई भुगतान प्रविष्टियों के साथ संबंधित बिल, स्वीकृति आदेश और अन्य वित्तीय दस्तावेज संलग्न नहीं पाए गए। भुगतान किस योजना अथवा मद से, किस बिल के आधार पर और किस माध्यम से किया गया, इसका स्पष्ट विवरण कई प्रविष्टियों में नहीं होने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।
कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका रखने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने शासकीय निवास में कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं एवं अन्य कार्यालयीन दस्तावेज रखे जाते हैं। जांच में इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों का परीक्षण किया गया।
हालांकि शिकायत के एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप—रिश्तेदारों के बैंक खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर करने—के संबंध में जांच दल ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त तथ्यात्मक जानकारी अथवा प्रारंभिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। इसलिए इस बिंदु पर निष्कर्ष नहीं दिया गया।
इसी तरह अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप पर भी जांच दल ने तत्काल कोई निष्कर्ष नहीं दिया और संपत्ति की अलग से नियमानुसार जांच कराए जाने को उचित बताया।
विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान ने बढ़ाए सवाल
जांच के दौरान जिले के छह विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान लिए गए। उन्होंने स्वच्छता सामग्री प्राप्त होने की बात कही, लेकिन सामग्री किस स्थान से, किस तारीख को और किस अधिकारी के हस्ताक्षर से प्राप्त हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके।
फर्नीचर, साइकिल, स्टेशनरी, व्यायाम सामग्री और खेल सामग्री के संबंध में भी विकासखंड स्तर से खरीदी और वितरण की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।
जांच दल ने माना—आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित
जांच के अंतिम निष्कर्ष में जांच दल ने कहा है कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के परीक्षण से शिकायत के प्रमुख वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।
रिपोर्ट में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन एवं दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके बैंक खाते में उपलब्ध राशि के आहरण पर तत्काल रोक लगाने की अनुशंसा भी की गई है।
अब आगे की कार्रवाई पर नजर
11 अगस्त 2026 को तैयार जांच प्रतिवेदन में कैशबुक की मूल प्रतियां, स्टॉक पंजी और कर्मचारियों के बयान सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। अब इस जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।








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