बैकुंठपुर में हर्षाेल्लास से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस साइबर अपराध के खिलाफ कोरिया में जागृति अभियान की शुरुआत दो साल से पाइपलाइन तैयार, फिर भी नलों में पानी का इंतजार

तबादला नीति पर सवाल: कुछ महीनों में फिर बदली कुर्सियां, कोरिया DFO की पोस्टिंग बनी चर्चा का विषय

प्रभाकर खलखो फिर कार्य आयोजना वनमंडल अंबिकापुर, शंकर सिंह परदेशी को दोबारा कोरिया DFO की जिम्मेदारी; क्या अधिकारियों की पसंद के मुताबिक तय हो रही पोस्टिंग?


बैकुण्ठपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग में जारी ताजा तबादला आदेश ने एक बार फिर स्थानांतरण नीति और अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 अगस्त 2026 को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी आदेश में कोरिया वनमंडल की DFO श्रीमती प्रभाकर खलखो का तबादला उनके पुराने पदस्थापना स्थल कार्य आयोजना वनमंडल, अंबिकापुर कर दिया गया है, जबकि शंकर सिंह परदेशी को पुनः कोरिया वनमंडल का DFO बनाया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब दोनों अधिकारियों की पदस्थापना के बीच इस तरह फेरबदल हुआ है। कुछ माह पहले हुए स्थानांतरण में श्रीमती प्रभाकर खलखो को कोरिया से हटाकर कार्य आयोजना वनमंडल अंबिकापुर भेजा गया था। इसके बाद हुए फेरबदल में शंकर सिंह परदेशी को कार्य आयोजना अंबिकापुर भेजते हुए प्रभाकर खलखो को पुनः कोरिया वनमंडल की जिम्मेदारी दी गई थी।

आज अब 8 अगस्त को जारी नए आदेश ने एक बार फिर दोनों अधिकारियों की पदस्थापना को लगभग उसी दिशा में लौटा दिया है—प्रभाकर खलखो कार्य आयोजना अंबिकापुर और शंकर सिंह परदेशी कोरिया वनमंडल।

क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या पसंदीदा पोस्टिंग का खेल?

लगातार होने वाले इन तबादलों ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि आखिर छत्तीसगढ़ में स्थानांतरण की कोई स्पष्ट और स्थायी नीति है भी या नहीं? यदि अधिकारियों को कुछ ही महीनों में एक स्थान से दूसरे स्थान और फिर पुराने अथवा पसंदीदा स्थान पर भेजा जा सकता है, तो क्या सामान्य तबादला नीति केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

वन विभाग के अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी को बार-बार महत्वपूर्ण पदों पर भेजे जाने और कुछ ही समय में तबादला आदेश बदलने की प्रक्रिया पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

सरकार बताए—किस आधार पर हो रहे हैं तबादले?

ताजा आदेश के बाद सरकार और वन विभाग से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि,क्या अधिकारियों के तबादले निर्धारित प्रशासनिक नीति और आवश्यकता के आधार पर हो रहे हैं या फिर उनकी सुविधा एवं पसंद के अनुसार?

यदि स्थानांतरण के पीछे प्रशासनिक कारण हैं, तो सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि कुछ महीनों के भीतर ही एक ही अधिकारियों की पदस्थापना में बार-बार बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी?

वहीं यदि किसी अधिकारी को किसी विशेष स्थान पर भेजने के पीछे प्रशासनिक दक्षता या विभागीय आवश्यकता है, तो ऐसे मानदंड सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू क्यों नहीं होते?

'तबादला उद्योग' जैसे आरोपों के बीच पारदर्शिता जरूरी

सरकारी विभागों में तबादले सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया हैं, लेकिन जब एक ही पद और उन्हीं अधिकारियों के बीच बार-बार अदला-बदली दिखाई देती है तो स्वाभाविक रूप से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं।

कोरिया जैसे वन क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण जिले में DFO की पदस्थापना का सीधा असर वन संरक्षण, खनन क्षेत्र, वन विकास कार्य, विभागीय योजनाओं और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों पर पड़ता है। ऐसे में यह और भी जरूरी हो जाता है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां स्पष्ट प्रशासनिक मापदंडों और पारदर्शी नीति के आधार पर हों।अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले को महज सामान्य प्रशासनिक फेरबदल मानती है या फिर यह बताने की पहल करती है कि आखिर कुछ महीनों के भीतर अधिकारियों की पोस्टिंग में बार-बार बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

सोनहत वन परिक्षेत्र में मजदूरी भुगतान का खेल? परिजनों के नाम से भुगतान के आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल

 


कोरिया। कोरिया वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सोनहत वन परिक्षेत्र में मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि विभाग में कराए जा रहे विभिन्न कार्यों के मजदूरी भुगतान में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि रेंज में पदस्थ कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के नाम से भी मजदूरी का भुगतान दर्शाकर राशि आहरित की गई है।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम से भुगतान दिखाया गया है, उनमें से कुछ के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने संबंधित कार्यों में वास्तविक रूप से मजदूरी नहीं की। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई मस्टर रोल, दैनिक उपस्थिति पंजी, कार्यस्थल के अभिलेख, बैंक खातों में हुए भुगतान और संबंधित कार्यों के भौतिक सत्यापन से सामने आ सकती है। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि जिन व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किया गया, वे वास्तव में मजदूरी कार्य में शामिल थे या नहीं।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वन मंडल स्तर अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

मोर गांव मोर पानी महाभियान से ग्रामीणों को आजीविका का सहारा, 140 से अधिक श्रमिकों को प्रतिदिन मिल रहा काम ’


’नवा तरिया से संवर रहा मेण्ड्रा का भविष्य, जल संरक्षण के साथ मिल रहा रोजगार’

कोरिया / प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा प्रारंभ मोर गांव मोर पानीष् महाभियान के तहत कोरिया जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में वनांचल क्षेत्र के जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत मेण्ड्रा में मनरेगा के तहत नवा तरिया निर्माण कार्य तेजी से जारी है।

कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशन में संचालित इस कार्य को आगामी 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच एवं पंचों के नेतृत्व में गांव के पंजीकृत श्रमिक पूरी सक्रियता के साथ निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि नवा तरिया निर्माण कार्य का चयन ग्रामसभा की सहमति से किया गया है। भूमिपूजन के बाद से ही निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। बारिश से पहले कार्य पूरा करने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर काम कर रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से गांव के प्रत्येक पात्र अकुशल श्रमिक परिवार को मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

मनरेगा के अंतर्गत इस कार्य के लिए 19 लाख 48 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें 17 लाख 28 हजार रुपये श्रम मद में व्यय किए जाएंगे। ग्राम पंचायत मेण्ड्रा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है। लगभग 60 मीटर लंबाई एवं 50 मीटर चौड़ाई वाले इस तालाब में निर्माण पूर्ण होने के बाद 6600 घनमीटर से अधिक जल भंडारण क्षमता विकसित होगी।

परियोजना के तहत प्रस्तावित 6,624 मानव दिवसों में से अब तक 2,000 से अधिक मानव दिवस का सृजन किया जा चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 140 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।नव निर्मित तालाब का प्रत्यक्ष लाभ आसपास के 25 परिवारों को मिलेगा। इसके माध्यम से लगभग 5 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को बहुफसलीय खेती में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम अधिकारी  प्रतीक ने बताया कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब का संचालन स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को सौंपा जाएगा, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। तालाब में प्रतिवर्ष लगभग 13 से 15 क्विंटल मछली उत्पादन की संभावना है, जिससे ग्रामीणों की आय में अतिरिक्त वृद्धि होगी।

इस प्रकार ष्मोर गांव मोर पानीष् महाभियान के तहत मेण्ड्रा में बन रहा नवा तरिया जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।

सरगुजा वन वृत में RTI व्यवस्था पर सवाल: एक परिक्षेत्र में अवकाश, दूसरे में उसी दिन सूचना अपलोड


अम्बिकापुर,सरगुजा/छत्तीसगढ़ सरगुजा वन वृत के अंतर्गत आने वाले दो वनमंडल के अलग अलग दो वन परिक्षेत्रों में सूचना का अधिकार (RTI) पोर्टल पर दिखाई दे रही कार्यप्रणाली ने पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला यह है कि वनमंडल मनेन्द्रगढ़ के एक वन परिक्षेत्र में एक RTI कार्यकर्ता द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने पर पोर्टल यह संदेश प्रदर्शित करता है कि आवेदन शासकीय अवकाश के दिन प्राप्त हुआ है, इसलिए उसे आगामी कार्य दिवस से मान्य माना जाएगा। वहीं दूसरी ओर वनमंडल बलरामपुर के एक वन परिक्षेत्र में उसी अवकाश दिवस पर सूचना अपलोड कर प्रकरण का निराकरण भी कर दिया गया।

एक ही वन वृत के अंतर्गत आने वाले दो अलग-अलग वनमंडलों के दो परिक्षेत्रों में दिखाई दे रही यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। यदि अवकाश दिवस में आवेदन को अगले कार्य दिवस से मान्य माना जाता है, तो उसी दिन सूचना अपलोड कर प्रकरण पूर्ण करने की प्रक्रिया किस नियम के तहत की गई?

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

●क्या सरगुजा वन वृत के अलग-अलग वनमंडलों में RTI नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है?

●यदि अवकाश दिवस में आवेदन प्रभावी नहीं माना जाता, तो उसी दिन सूचना उपलब्ध कराना कैसे संभव है?

●क्या RTI पोर्टल की कार्यप्रणाली सभी कार्यालयों में समान रूप से लागू नहीं हो रही?

●क्या राज्य सूचना आयोग इस प्रकार की विसंगतियों की निगरानी कर रहा है?

सूचना के अधिकार से जुड़े जानकारों का मानना है कि राज्य सूचना आयोग एवं वन विभाग को इस मामले की जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि अवकाश दिवस में ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों और उन पर की जाने वाली कार्रवाई की वास्तविक प्रक्रिया क्या है, ताकि पूरे प्रदेश में RTI कानून का समान और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।एक ही वन वृत, एक ही RTI पोर्टल, लेकिन दो अलग-अलग प्रक्रियाएं— यही सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

रिश्तेदारों पर बने व्यंग्यात्मक वीडियो ने मचाया धमाल, 5 दिनों में 10 लाख व्यूज के करीब पहुँची रील

 



न्यूज़ डेस्क -सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर #अल्हड़_पँछी नाम के अकाउंट का एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। रिश्तेदारों और समाज की दखलअंदाजी पर व्यंग्य करते हुए बनाई गई यह रील लोगों को इतनी पसंद आई कि महज 5 दिनों के भीतर इसे लगभग 10 लाख लोगों ने देख लिया।

वीडियो में एक युवती पारंपरिक अंदाज और सहज अभिनय के जरिए रिश्तेदारों के सवालों पर तंज कसती नजर आती है। रील में इस्तेमाल की गई पंक्तियाँ —

“हाय रे मेरे रिश्तेदार,

काम काज सब छोड़ के अपना,

बन बैठे ये पहरेदार…”

दर्शकों के बीच खूब वायरल हो रही हैं।

देखें video



रील को अब तक करीब 9.41 लाख व्यूज, 50 हजार से ज्यादा लाइक्स, हजारों शेयर और सेव मिल चुके हैं। वहीं इस वीडियो के जरिए अकाउंट पर सैकड़ों नए फॉलोअर्स भी जुड़े हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को “ग्रामीण जीवन की सच्चाई” और “रिश्तेदारों की टोकाटाकी पर सटीक व्यंग्य” बता रहे हैं। कम संसाधनों में बनाए गए इस वीडियो की सादगी और देसी अंदाज ही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है।

“अल्हड़ पंछी” अकाउंट हिंदी कविता, कहानी और सामाजिक भावनाओं से जुड़े कंटेंट के लिए जाना जाता है। लगातार बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि अब छोटे क्रिएटर्स भी अपने ओरिजिनल कंटेंट के दम पर सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान बना रहे हैं।

आबकारी ने दो अवैध शराब तस्कर और विक्रेता को न्यायिक रिमांड पर भेजा जेल

 


कोरिया बैकुंठपुर/कलेक्टर कोरिया श्रीमती राेक्तिमा यादव के निर्देश तथा जिला आबकारी अधिकारी  रमेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन जिले में अवैध मदिरा के तस्करी, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला आबकारी विभाग द्वारा दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए अवैध शराब जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पहली कार्रवाई के दौरान ग्राम रोबो में मध्यप्रदेश से तस्करी कर लाई शराब की बिक्री की सूचना पर छापामार कार्रवाई की गई। आरोपी कृष्णा लक्ष्मी w/o शिव प्रसाद उम्र 50 जाति रजवार निवासी रोबो थाना बैकुंठपुर के रिहायशी मकान से 6 पाव नग विदेशी मदिरा (गोवा व्हिस्की) और जरीकेन में भरी हुई 9 लीटर महुआ शराब जप्त की गई.

आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर  सी जे एम कोर्ट बैकुंठपुर से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया.

चरचा क्षेत्र में मालती बुधराम बरगाह को अवैध रूप से 8 लीटर मदिरा विक्रय करते हुए पकड़ा गया। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जिला जेल बैकुंठपुर भेजा गया.

इन कार्रवाइयों में सहायक जिला आबकारी अधिकारी श्रीमती सपना सिन्हा, आबकारी उप निरीक्षक राम सनेही यादव, आरक्षक किशुन, बबुआ, नरेंद्र और हेमन्त का विशेष योगदान रहा।आबकारी विभाग ने बताया कि अवैध शराब विक्रय एवं तस्करी पर नियंत्रण हेतु अभियान निरंतर जारी रहेगा। आमजन से अपील है कि अवैध शराब संबंधी किसी भी सूचना जानकारी या शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 14405, व्हाट्सएप नम्बर 9424102102 और मनपसंद ऐप पर संपर्क करें। 

जिले में बैकुंठपुर में प्रीमियम और तलवापारा दुकान के अलावा पटना,चरचा, पण्डोपारा, सोनहत और जिल्दा में दुकानें संचालित है. इन दुकानों में मैनपावर एजेंसी टीम एच आर जी एस ए प्राइवेट लिमिटेड और सुरक्षा गार्ड फर्स्ट चॉइस फैसिलिटी कंपनी अधिकृत है

नवा तरिया से बदलेगी घुघरा की तस्वीर, जलसंरक्षण के साथ महिलाओं को मिलेगा आजीविका का सहारा

घुघरा में नवीन तालाब निर्माण से ग्रामीणों को रोजगार और सिंचाई की नई सौगात





कोरिया/बैकुंठपुर।कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत सोनहत की ग्राम पंचायत घुघरा में “नवा तरिया आय के जरिया” योजना के तहत नवीन तालाब निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीण श्रमिकों की सक्रिय सहभागिता से यह कार्य मनरेगा अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जलसंरक्षण के साथ ग्रामीणों को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

ग्राम पंचायत घुघरा को वित्तीय वर्ष 2026 में इस कार्य हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। पंचायत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आगामी जून माह के मध्य तक तालाब निर्माण कार्य पूर्ण होने की संभावना है।

ग्रामीण सहभागिता से मिल रही गति’
ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती चंद्रवती गरूण एवं उपसरपंच श्री रामभजन राजवाड़े ने बताया कि वरिष्ठ ग्रामीणों की सलाह और सहमति के बाद उपयुक्त स्थल का चयन किया गया। भूमिपूजन उपरांत बीते सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। ग्रामीणों का प्रयास है कि बारिश शुरू होने से पहले तालाब निर्माण पूर्ण हो जाए।

’20 लाख की लागत से बन रहा जलसंरक्षण का आधार’
मनरेगा अंतर्गत लगभग 20 लाख रुपए की स्वीकृति इस कार्य के लिए प्रदान की गई है, जिसमें 17 लाख 37 हजार रुपए श्रममूलक मद के अंतर्गत व्यय होंगे। ग्राम पंचायत घुघरा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।

निर्माणाधीन तालाब की लंबाई एवं चौड़ाई लगभग 70×70 मीटर निर्धारित की गई है। कार्य पूर्ण होने पर इसमें लगभग 6300 घनमीटर से अधिक जलभराव क्षमता विकसित होगी। प्रस्तावित 6 हजार 657 मानव दिवसों के विरुद्ध अब तक लगभग 500 मानव दिवस अकुशल श्रम का सृजन किया जा चुका है।

’महिलाओं की आजीविका और मत्स्य उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा’
यह नवीन तालाब आसपास के 16 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगा। इसके माध्यम से लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में बहुफसलीय सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रतीक ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी और आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब को स्थानीय महिला समूह को हस्तांतरित किया जाएगा। तालाब में निर्धारित गहराई अनुसार आने वाले वर्षों में लगभग 10 से 15 क्विंटल तक मत्स्य उत्पादन संभव होगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।