बैकुंठपुर में हर्षाेल्लास से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस साइबर अपराध के खिलाफ कोरिया में जागृति अभियान की शुरुआत दो साल से पाइपलाइन तैयार, फिर भी नलों में पानी का इंतजार

बंजारी डांड में राशन संकट: चावल, शक्कर और चना वितरण ठप, हितग्राहियों में आक्रोश

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बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजारी डांड की शासकीय उचित मूल्य की दुकान में राशन वितरण को लेकर हितग्राहियों की परेशानी बढ़ गई है। महीने का आखिरी सप्ताह आ जाने के बावजूद हितग्राहियों को चावल का वितरण नहीं हुआ है। वहीं शक्कर और चना भी नहीं मिलने की बात सामने आ रही है।

राशन लेने दुकान पहुंच रहे ग्रामीणों, खासकर महिलाओं में इस व्यवस्था को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। हितग्राहियों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान्न पर कई परिवार निर्भर हैं, ऐसे में समय पर राशन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।

मामले में जिला खाद्य अधिकारी नटवर सिंह राठौर से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि राशन वितरण नहीं होना गलत है। जांच  कराकर कार्यवाही की बात कही है।

अब सवाल यह है कि जब महीने का अंतिम सप्ताह आ गया है और चावल, शक्कर तथा चना का वितरण नहीं हो पाया है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ग्रामीणों ने खाद्य विभाग से मामले की जांच कर तत्काल राशन वितरण शुरू कराने की मांग की है।


कमलेश शर्मा को मिले मौका तो बैकुण्ठपुर के विकास को मिल सकती है नई रफ्तार, पार्टी को करना चाहिए गंभीरता से विचार

 


बैकुण्ठपुर। नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित होने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित दावेदारों के नामों के बीच कमलेश शर्मा का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह मांग उठने लगी है कि पार्टी को उनके नाम पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पत्रकारिता, सामाजिक गतिविधियों और संगठनात्मक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे कमलेश शर्मा की स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और शहर की समस्याओं से परिचित होने को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है। यदि पार्टी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाती है और जनता का आशीर्वाद मिलता है, तो बैकुण्ठपुर के विकास को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

शहर की समस्याओं की जमीनी समझ

बैकुण्ठपुर में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, यातायात और बेहतर नागरिक सुविधाएं आज भी प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में शहर की समस्याओं को करीब से समझने वाला और लगातार जनहित के मुद्दों को उठाने वाला नेतृत्व नगर पालिका के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कमलेश शर्मा लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने स्थानीय समस्याओं और जनसरोकार के विषयों को प्रमुखता से उठाया है। यही अनुभव यदि उन्हें नगर पालिका के नेतृत्व का अवसर देता है तो योजनाओं को जमीन पर उतारने में उपयोगी साबित हो सकता है।

विकास के साथ जवाबदेही की उम्मीद

नगर पालिका अध्यक्ष का पद केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर के विकास की बड़ी जिम्मेदारी है। जनता को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो विकास योजनाओं के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी नजर रखे।

कमलेश शर्मा को टिकट मिलने की स्थिति में उनके समर्थकों को उम्मीद है कि वे शहर के विकास के लिए नई सोच और सक्रिय कार्यशैली के साथ आगे बढ़ेंगे। खासकर मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता और व्यवस्थित शहर के निर्माण को प्राथमिकता मिल सकती है।

पार्टी के लिए भी हो सकता है मजबूत विकल्प

अनारक्षित सीट होने के बाद पार्टी के सामने कई संभावित नाम हो सकते हैं। ऐसे में उम्मीदवार का चयन केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी जनस्वीकार्यता, सक्रियता, संगठन से जुड़ाव और शहर के विकास के विजन को ध्यान में रखकर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

इन्हीं कसौटियों पर कमलेश शर्मा का नाम पार्टी के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और जनसरोकारों से जुड़े रहने का अनुभव उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान दे सकता है।

बैकुण्ठपुर की जनता अब ऐसे नेतृत्व की उम्मीद कर रही है जो शहर को योजनाओं से आगे बढ़ाकर धरातल पर विकास की नई तस्वीर दे सके। यदि पार्टी कमलेश शर्मा के नाम पर गंभीरता से विचार करती है और उन्हें चुनावी मैदान में उतारती है, तो यह फैसला बैकुण्ठपुर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

छठियार की खुशियां मातम में बदलीं, आर्केस्ट्रा देख रहे लोगों को तेज रफ्तार बस ने कुचला

 


पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में छठियार समारोह की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब सड़क किनारे आयोजित आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में तेज रफ्तार बस घुस गई। हादसे में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घटना लौरिया थाना क्षेत्र के बनकटवा की बताई जा रही है। एक परिवार में नवजात बच्चे के छठियार का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। समारोह में आर्केस्ट्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क किनारे जुटे थे। इसी दौरान गोरखपुर से बेतिया जा रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर भीड़ में जा घुसी।

बताया जा रहा है कि सामने से आ रहे गैस सिलेंडर लदे ट्रक से बचने के प्रयास में बस चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया। बस लोगों को कुचलते हुए आगे निकल गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और समारोह स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायलों को बेतिया के जीएमसीएच अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है। हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिला।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। घटना ने एक खुशहाल परिवार के समारोह को देखते ही देखते दर्दनाक हादसे में बदल दिया।

शिक्षा विभाग में करोड़ों के भुगतान की जांच में बड़ा खुलासा, 4.51 करोड़ के अनियमित भुगतान का उल्लेख

 


बलरामपुर-रामानुजगंज।
जिला शिक्षा विभाग में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न मदों में किए गए सरकारी खर्च को लेकर सामने आई शिकायत की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने दस्तावेजों, कैशबुक, स्टॉक पंजी और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के कार्यकाल में आकस्मिक व्यय, साइकिल, फर्नीचर, पाठ्य पुस्तक, स्वच्छता सामग्री, व्यायाम उपकरण, खेल सामग्री, स्टेशनरी तथा अन्य मदों में खरीदी और भुगतान की प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

4.51 करोड़ रुपये के भुगतान को नियम विरुद्ध बताया

जांच दल के निष्कर्ष में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध सरकारी बजट में से लगभग 4 करोड़ 51 लाख 65 हजार 159 रुपये के देयक तैयार कर नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर और व्यापक वित्तीय एवं सेवा संबंधी अनियमितता के रूप में दर्ज किया गया है।

साइकिल से लेकर फर्नीचर तक खरीदी पर सवाल

सरस्वती साइकिल योजना में बड़ी राशि खर्च किए जाने के बावजूद जांच में भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता प्रमाणिकरण, डिलीवरी चालान और स्टॉक एंट्री से संबंधित गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं।

गैर कार्यालयीन फर्नीचर की खरीदी में भी जिला स्तरीय क्रय समिति के गठन और अनिवार्य भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कई सामग्रियों की जिला, विकासखंड अथवा विद्यालय स्तर पर स्टॉक एंट्री का प्रमाण उपलब्ध नहीं था।

पाठ्य पुस्तकों की खरीदी में भी नियमों की अनदेखी

पाठ्य पुस्तक मद में करीब 64,285 रुपये के भुगतान की जांच में क्रय समिति का गठन नहीं होने, क्रय आदेश उपलब्ध नहीं होने, डिलीवरी चालान नहीं मिलने तथा भौतिक सत्यापन नहीं कराए जाने जैसी कमियां सामने आईं।

जांच दल ने यह भी दर्ज किया कि संबंधित संस्थाओं से पुस्तकों की मांग प्राप्त करने के बजाय जिला शिक्षा कार्यालय स्तर से ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

राजपुर के फर्नीचर में बजट से अधिक भुगतान

कन्या शिक्षा परिसर राजपुर के फर्नीचर की खरीदी में भी अनियमितता पाई गई। जांच के अनुसार स्थानीय फर्म से बिना निर्धारित प्रक्रिया के सामग्री खरीदी गई। उपलब्ध बजट की तुलना में देयक अधिक होने के बावजूद भुगतान किया गया, जबकि खरीदी गई सामग्री की स्टॉक एंट्री और संस्था को वास्तविक प्राप्ति का प्रमाण जांच दल को नहीं मिला।

स्वच्छता सामग्री में सबसे गंभीर सवाल

विद्यालयों के लिए स्वच्छता सामग्री की खरीदी में भी जांच दल ने कई गंभीर बिंदु दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बजट को विकासखंडों में पुनः आवंटित करने के बजाय जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी की गई।

जांच में क्रय समिति के गठन, तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी, स्टॉक एंट्री, डिलीवरी चालान और संस्थावार वितरण सूची को लेकर गंभीर कमियां पाई गईं।

रिपोर्ट में लगभग 25.23 लाख रुपये की खरीदी का उल्लेख है। जांच दल ने यह भी पाया कि निर्धारित फर्मों के अलावा अन्य फर्म से भी खरीदी की गई और कुछ मामलों में निविदा अथवा कोटेशन प्रक्रिया पर सवाल उठे।

व्यायाम उपकरण की 6 लाख की खरीदी भी घेरे में

प्राथमिक विद्यालयों के लिए करीब 6 लाख रुपये के व्यायाम उपकरण की खरीदी की जांच में भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।

जांच दल के अनुसार इतनी राशि की खरीदी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सीमित कोटेशन के माध्यम से खरीदी किए जाने, क्रय समिति की संरचना में नियमों का पालन नहीं होने तथा सामग्री की स्टॉक एंट्री और वितरण के प्रमाण उपलब्ध नहीं होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निर्धारित वित्तीय सीमा से बचने का प्रयास किया गया।

खेल सामग्री की करीब 15 लाख रुपये की खरीदी

जिले में खेल सामग्री की आपूर्ति के लिए लगभग 14.99 लाख रुपये के खर्च का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है। जांच में क्रय समिति गठन, निविदा प्रक्रिया, डिलीवरी चालान, स्टॉक एंट्री और संस्थावार वितरण से संबंधित दस्तावेजों की कमी सामने आई।

जांच दल ने तकनीकी विशेषज्ञों के बिना गुणवत्ता प्रमाणिकरण किए जाने को भी नियम विरुद्ध बताया।

स्टेशनरी और अन्य खरीदी में भी अनियमितताएं

जांच के दौरान स्टेशनरी एवं अन्य सामग्री की खरीदी से संबंधित बिलों और भुगतान की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कई बिलों में क्रय आदेश, स्वीकृति, सत्यापन और संबंधित अभिलेखों के अभाव का उल्लेख है।

कुछ मामलों में एक ही खरीदी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई, जिसे जांच दल ने निविदा प्रक्रिया से बचने का अनुचित प्रयास माना।

कैशबुक के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल

जांच दल ने जिला शिक्षा कार्यालय की कैशबुक का परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार कैशबुक में कई स्थानों पर अत्यधिक कटिंग, ओवरराइटिंग और संशोधन पाए गए।

कई भुगतान प्रविष्टियों के साथ संबंधित बिल, स्वीकृति आदेश और अन्य वित्तीय दस्तावेज संलग्न नहीं पाए गए। भुगतान किस योजना अथवा मद से, किस बिल के आधार पर और किस माध्यम से किया गया, इसका स्पष्ट विवरण कई प्रविष्टियों में नहीं होने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।

कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका रखने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने शासकीय निवास में कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं एवं अन्य कार्यालयीन दस्तावेज रखे जाते हैं। जांच में इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों का परीक्षण किया गया।

हालांकि शिकायत के एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप—रिश्तेदारों के बैंक खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर करने—के संबंध में जांच दल ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त तथ्यात्मक जानकारी अथवा प्रारंभिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। इसलिए इस बिंदु पर निष्कर्ष नहीं दिया गया।

इसी तरह अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप पर भी जांच दल ने तत्काल कोई निष्कर्ष नहीं दिया और संपत्ति की अलग से नियमानुसार जांच कराए जाने को उचित बताया।

विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान ने बढ़ाए सवाल

जांच के दौरान जिले के छह विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान लिए गए। उन्होंने स्वच्छता सामग्री प्राप्त होने की बात कही, लेकिन सामग्री किस स्थान से, किस तारीख को और किस अधिकारी के हस्ताक्षर से प्राप्त हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके।

फर्नीचर, साइकिल, स्टेशनरी, व्यायाम सामग्री और खेल सामग्री के संबंध में भी विकासखंड स्तर से खरीदी और वितरण की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

जांच दल ने माना—आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित

जांच के अंतिम निष्कर्ष में जांच दल ने कहा है कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के परीक्षण से शिकायत के प्रमुख वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

रिपोर्ट में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन एवं दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके बैंक खाते में उपलब्ध राशि के आहरण पर तत्काल रोक लगाने की अनुशंसा भी की गई है।

अब आगे की कार्रवाई पर नजर

11 अगस्त 2026 को तैयार जांच प्रतिवेदन में कैशबुक की मूल प्रतियां, स्टॉक पंजी और कर्मचारियों के बयान सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। अब इस जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।


सजग रहें: साइबर ठगी और दुर्घटना से बचें - एसपी हरीश राठौर, कोरिया जिले में साइबर एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, एसपी ने युवाओं को ऑनलाइन फ्रॉड और सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रति किया जागरूक

 


पटना, कोरिया। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मंशानुरूप, पुलिस महानिदेश अरुण देव गौतम के आदेशानुसार एवं पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक झा के मार्गदर्शन में जिले में 14 अगस्त से 2 अक्टूबर तक व्यापक पैमाने पर साइबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जिलेभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं आमजन को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

 गुरुवार को पंडित ज्वाला प्रसाद उपाध्याय शासकीय महाविद्यालय, पटना में साइबर एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव शंकर राजवाड़े ने पुलिस अधीक्षक श्री हरीश राठौर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। महाविद्यालय के प्राध्यापक गणों ने उपस्थित समस्त अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों को सम्मानित किया गया।

     जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक श्री हरीश राठौर ने छात्रों व युवाओं को साइबर अपराध एवं यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य को जन्म लेने के उपरांत मृत्यु तक सभी कार्य ऑनलाइन करने पड़ते  हैं। ऐसे में हर पल, हर क्षण सजग रहने की आवश्यकता है। साइबर मामलों में आपकी जरा सी लापरवाही आपको जीवनभर की गाढ़ी कमाई से हाथ धोने पर मजबूर कर सकती है। वहीं यातायात में आपकी जरा सी लापरवाही आपके और आपके परिवार के अरमानों को अधूरा रख सकती है।विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी साइबर अपराध तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।ऑनलाइन ठगी, APK लिंक और WhatsApp वीडियो कॉल, फर्जी लिंक तथा अनधिकृत रूप से OTP साझा करने के खतरों से सावधान किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, पासवर्ड, बैंक खाते अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अज्ञात लिंक या APK फाइल को डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।

            कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को साइबर अपराध की स्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त करने के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे बिना समय गंवाए 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि ठगी गई राशि को रोकने एवं आवश्यक कार्रवाई करने का प्रयास समय रहते किया जा सके।

       यातायात जागरूकता के अंतर्गत विद्यार्थियों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बाद ही वाहन चालन करने, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने तथा यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके साथ ही गुड सेमेरिटन (नेक इंसान) नीति के बारे में जानकारी देते हुए सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की तत्काल मदद करने एवं उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। दुर्घटना के समय घायल की मदद करना मानवता का परिचय है और समय पर मिली चिकित्सा किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकती है। इसके साथ ही राहवीर एवं नगदी रहित उपचार योजना की जानकारी प्रदान की गई।

           कार्यक्रम के दौरान साइबर जागरूकता संबंधी स्टैंडी के समक्ष महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ ने सेल्फी ली और उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर साइबर सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता का संदेश प्रसारित किया।

            कार्यक्रम को जिला युवा अधिकारी सुश्री चहल कैलाशिया एवं उप पुलिस अधीक्षक श्री श्याम मधुकर ने भी संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने तथा यातायात नियमों का पालन कर स्वयं एवं दूसरों के जीवन को सुरक्षित रखने की अपील की।

              कार्यक्रम थाना प्रभारी पटना प्रमोद पांडेय, प्रधान आरक्षक सत्येंद्र तिवारी, महिला प्रधान आरक्षक गीता टोप्पो, यातायात हवलदार डॉ. महेश मिश्रा, महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. बरखा सिंह, सुश्री पूनम टोप्पो, सहायक ग्रेड-1 रोहित साहू सहित महाविद्यालय के अतिथि व्याख्याता एवं काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती दुर्गावती राजवाड़े ने किया।

बैकुंठपुर में हर्षाेल्लास से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस’ ’विधायक भईया लाल राजवाड़े ने किया ध्वजारोहण, ली परेड की सलामी’

 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के परिजनों का किया सम्मान’


’विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को मिला प्रशस्ति पत्र’




कोरिया /  जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह देशभक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। रामानुज मिनी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में बैकुंठपुर विधायक  भईया लाल राजवाड़े ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के स्वतंत्रता दिवस संदेश का वाचन करते हुए जिलेवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

ध्वजारोहण के बाद विधायक श्री राजवाड़े ने कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव एवं पुलिस अधीक्षक  हरीश राठौर के साथ परेड का निरीक्षण किया। रक्षित निरीक्षक के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, छत्तीसगढ़ पुलिस बल, महिला पुलिस बल, नगर सेना पुरुष एवं महिला तथा एनसीसी सीनियर कैडेट्स की टुकड़ियों ने आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत किया। समारोह में शांति और सौहार्द के प्रतीक रंगीन गुब्बारे भी आकाश में छोड़े गए।

’स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के परिजनों का सम्मान’
समारोह में विधायक  भईया लाल राजवाड़े ने शहीदों के परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात की। उन्होंने उनका हालचाल जाना और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।

’उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र’
जिले में अपने दायित्वों का उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय निर्वहन करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इनमें कलेक्टर कार्यालय, स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक निर्माण, पुलिस, नगर सेना एवं अग्निशमन, वन, खेल एवं युवा कल्याण, आयुष तथा आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।

सम्मानित होने वालों में कलेक्टर कार्यालय के ई-जिला प्रबंधक  राकेश कुमार एवं सहायक ग्रेड-03 श्रीमती किरण टोप्पो शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग से जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनित कुमार बखला, 108 संजीवनी एंबुलेंस सेवा के ईएमटी  परमेश्वर, वाहन चालक  दिनेश तथा जिला चिकित्सालय के ड्रेसर ग्रेड-02  सचिन कुमार शर्मा को सम्मानित किया गया।

शिक्षा विभाग से प्राचार्य  कमल डडसेना, व्याख्याता  राजीव जायसवाल, शैक्षिक समन्वयक  जय प्रताप सिंकुल, सहायक शिक्षक श्रीमती शांति देवी बैगा, कुमारी रितु बैगा एवं  रिप चन्द्र साहू को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। लोक निर्माण विभाग की उप अभियंता श्रीमती सुरेखा मिंज को भी सम्मानित किया गया।

पुलिस विभाग से उप निरीक्षक  विकास नामदेव, प्रधान आरक्षक  राम प्रकाश तिवारी,  नवीन साहू,  संतोष सिंह,  अमित त्रिपाठी,  शिव मिंज, महिला प्रधान आरक्षक श्रीमती सुनीता पैंकरा तथा आरक्षक  राकेश कुमार मिश्रा,  संदीप साय पैकरा,  राघवेन्द्र पुरी एवं  निखिलेश राजवाड़े को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

नगर सेना एवं अग्निशमन विभाग से  अजय कुमार एवं  राजेश कुमार सहित संबंधित कर्मियों को सम्मानित किया गया। वन विभाग के वनरक्षक  दुष्यंत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के व्यायाम शिक्षक  विजय विश्वकर्मा एवं श् पप्पू कुमार, आयुष विभाग के फार्मासिस्ट  नीलेश गोयल एवं औषधालय सेवक  शिव कुमार साहू, तथा आदिवासी विकास विभाग के भृत्य  सोंस लाल को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

’देशभक्ति गीतों से गूंजा मिनी स्टेडियम’

स्वतंत्रता दिवस समारोह में स्कूली बच्चों ने बैंड की धुन पर देशभक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह को आकर्षक बना दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों में देशभक्ति का जोश भर दिया और पूरा मिनी स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  मोहित पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े, जिला पंचायत, जनपद पंचायत व नगरीय निकाय बैकुंठपुर, शिवपुर-चरचा तथा नगर पंचायत पटना के जनप्रतिनिधि, शहर के गणमान्य नागरिक  देवेंद्र तिवारी,  कृष्णा बिहारी जायसवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  योगेंद्र श्रीवास, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के संचालक  सौरभ सिंह, वन मण्डलाधिकारी  चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी, एडीएम  सुरेन्द्र सिंह वैद्य, अपर कलेक्टर  डीडी मण्डावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  अभिषेक सिंह, एसडीएम सोनहत   अमित गुप्ता, एसडीएम बैकुंठपुर  उमेश पटेल,  डीएसपी  श्याम मधुकर,  राजेश साहू, विभिन्न विभागों के अधिकारी- कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

दो साल से पाइपलाइन तैयार, फिर भी नलों में पानी का इंतजार हैंडपंप पर्याप्त होने के बावजूद करोड़ों की जल योजना, 50 किलोमीटर दूर से पानी लाने की तैयारी

बैकुंठपुर,कोरिया। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना बैकुंठपुर विकासखंड के बंजारीडांड, गड़तर और गोविंदपुर में दो साल से अधिक समय बाद भी अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकी है। पाइपलाइन बिछाने और प्लेटफार्म बनाने के बाद निर्माण एजेंसी और ठेकेदार का काम मानो पूरा हो गया, लेकिन ग्रामीणों के नलों से अब तक पानी नहीं निकला।

विभागीय जवाब में बताया गया है कि बंजारीडांड में 52, गड़तर में 39 और गोविंदपुर में 33 हैंडपंप पहले से स्थापित हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि जब गांवों में पेयजल के लिए पर्याप्त हैंडपंप उपलब्ध थे, तो करोड़ों रुपये खर्च कर पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्य कराने के बाद भी नलजल की सुविधा क्यों नहीं मिल पाई।

विभाग ने अपने जवाब में उधनापुर समूह जल प्रदाय योजना का भी उल्लेख किया है, जिसके माध्यम से इन गांवों में पानी पहुंचाने की बात कही गई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार उधनापुर करीब 50 किलोमीटर दूर है। ऐसे में दूरस्थ स्रोत से पानी लाने वाली योजना पर निर्भरता ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

निर्माण हो गया, सुविधा अभी बाकी

जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन यहां पाइपलाइन और प्लेटफार्म बनने के बावजूद नियमित नलजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।

अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि योजना कब पूरी होगी और नल से पानी कब पहुंचेगा। साथ ही योजना में अब तक हुए निर्माण, भुगतान और देरी के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आने की मांग भी उठ रही है।

हैंडपंप बनाम करोड़ों की पाइपलाइन

जब विभाग स्वयं बंजारीडांड, गड़तर और गोविंदपुर में कुल 124 हैंडपंप स्थापित होने की जानकारी दे रहा है, तब करोड़ों रुपये की पाइपलाइन योजना का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता पैदा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कागजों में नहीं, बल्कि नियमित रूप से नल से पानी चाहिए।

साइबर अपराध के खिलाफ कोरिया में जागृति अभियान की शुरुआत, SP ने जारी किया QR कोड ,15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा सात सप्ताह का अभियान, सेल्फी के जरिए लोगों को साइबर सुरक्षा का संदेश

 


कोरिया। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस ने प्रदेशवासियों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से “साइबर जागृति अभियान” की शुरुआत की है। यह अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

राजधानी रायपुर में अभियान के शुभारंभ के साथ ही कोरिया जिले में भी पुलिस अधीक्षक ने प्रेस वार्ता के दौरान अभियान की लिंक और QR कोड जारी कर इसकी शुरुआत की। एसपी ने स्वयं QR कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी फ्रेम में सेल्फी ली और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया।

साइबर जागृति की एक सेल्फी” होगी अभियान की पहचान

अभियान की मुख्य थीम “साइबर जागृति की एक सेल्फी” रखी गई है। इसके तहत नागरिक छत्तीसगढ़ पुलिस अथवा जिला पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल्स पर जारी लिंक पर क्लिक कर अथवा QR कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी फ्रेम में अपनी तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। पुलिस का मानना है कि इससे साइबर सुरक्षा का संदेश लोगों के दोस्तों, फॉलोअर्स और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स तक तेजी से पहुंचेगा।

एसपी कोरिया ने जिले के नागरिकों, सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों, संस्थानों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, प्रोफेशनल्स और कलाकारों से अभियान में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की।

सात सप्ताह, अलग-अलग विषयों पर जागरूकता

अभियान के दौरान सात सप्ताह में साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पहले सप्ताह स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और बुनियादी साइबर सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

दूसरे सप्ताह बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों में वित्तीय धोखाधड़ी और UPI सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

तीसरे सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल के विषय पर टाउन हॉल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

चौथे सप्ताह महिलाओं और सामुदायिक समूहों के बीच स्मार्टफोन प्राइवेसी तथा सुरक्षित ब्राउजिंग को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

पांचवें सप्ताह रोजगार कार्यालय, ITI और कौशल विकास केंद्रों में युवाओं को जॉब फ्रॉड और फिशिंग से बचाव की जानकारी दी जाएगी।

छठे सप्ताह डेटा प्राइवेसी और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर अभियान चलाया जाएगा।

सातवें सप्ताह गांधी जयंती के अवसर पर ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में “साइबर मुक्त छत्तीसगढ़” का संकल्प अभियान चलाया जाएगा।

चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक होगा प्रचार

अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिला पुलिस की टीमें और स्थानीय थाने सार्वजनिक स्थानों, चौक-चौराहों, पार्कों और बाजारों में पोस्टर-बैनर के माध्यम से QR कोड का प्रचार करेंगे। इसके अलावा पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से भी अभियान की लिंक साझा की जाएगी।

एसपी कोरिया ने कहा कि जिस तरह देश की आजादी के लिए करोड़ों देशवासी एकजुट हुए थे, उसी तरह साइबर अपराध के खिलाफ भी समाज को एकजुट होकर जागरूकता फैलानी होगी। उन्होंने जिलेवासियों से “जागरूकता की एक सेल्फी” लेकर उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने और साइबर अपराध रोकने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की,2 अक्टूबर 2026, गांधी जयंती के दिन “साइबर जागृति अभियान” का समापन किया जाएगा।

पहले हटे, फिर लौटे परदेशी: कोरिया DFO की कुर्सी और तबादला नीति पर सवाल


बैकुण्ठपुर। कोरिया वन मंडल में डीएफओ की पदस्थापना को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 8 अगस्त 2026 को जारी वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आदेश में चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी, भा.व.से. को पुनः कोरिया वन मंडल, बैकुण्ठपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं श्रीमती प्रभाकर खलखो को कोरिया से हटाकर उनके पुराने पदस्थापना स्थल कार्य योजना मंडल, अंबिकापुर भेजा गया है।

इससे पहले 23 मार्च 2026 के आदेश में प्रभाकर खलखो को कार्य योजना मंडल, अंबिकापुर से कोरिया वन मंडल भेजा गया था, जबकि चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी को कोरिया से हटाकर कार्य आयोजना मंडल, अंबिकापुर की जिम्मेदारी दी गई थी।यानी कुछ ही महीनों के भीतर दोनों अधिकारियों की पदस्थापना एक बार फिर लगभग उसी स्थिति में लौट आई है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया और इसके पीछे रहे प्रशासनिक कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एक ही कुर्सी, बार-बार बदलते अधिकारी

23 मार्च और 8 अगस्त के दोनों आदेशों को साथ रखकर देखने पर कोरिया वन मंडल और कार्य आयोजना मंडल अंबिकापुर के बीच दोनों अधिकारियों की अदला-बदली साफ नजर आती है। हालांकि स्थानांतरण शासन की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन इतने कम अंतराल में महत्वपूर्ण पदों पर हुए बदलाव के कारणों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

डीएफओ परदेशी की वापसी के साथ पूर्व कार्यकाल की जांच की मांग

डीएफओ चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी की कोरिया वन मंडल में पुनः वापसी के बाद उनके पूर्व कार्यकाल से जुड़े विभागीय कार्यों और निर्णयों की निष्पक्ष समीक्षा/जांच की मांग भी उठ रही है।

जांच में पूर्व कार्यकाल के दौरान हुए वन विकास कार्यों, विभागीय योजनाओं में व्यय, कार्यों की प्रगति, भुगतान प्रक्रिया, प्रशासनिक निर्णयों तथा पूर्व में प्राप्त शिकायतों का परीक्षण किया जाना चाहिए।

सरकार के सामने  अहम सवाल

कुछ ही महीनों में कोरिया वन मंडल और कार्य आयोजना मंडल अंबिकापुर के बीच दोनों अधिकारियों की पदस्थापना में दोबारा बदलाव क्यों हुआ?कोरिया में पुनः जिम्मेदारी संभालने वाले डीएफओ के पूर्व कार्यकाल से संबंधित शिकायतों और विभागीय कार्यों की समीक्षा शासन किस स्तर पर करेगा?

कोरिया वन मंडल प्राकृतिक संसाधनों और वन संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में डीएफओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर होने वाले प्रशासनिक बदलावों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, ताकि जनता के बीच शासन की नीतियों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो।

तबादला नीति पर सवाल: कुछ महीनों में फिर बदली कुर्सियां, कोरिया DFO की पोस्टिंग बनी चर्चा का विषय

प्रभाकर खलखो फिर कार्य आयोजना वनमंडल अंबिकापुर, शंकर सिंह परदेशी को दोबारा कोरिया DFO की जिम्मेदारी; क्या अधिकारियों की पसंद के मुताबिक तय हो रही पोस्टिंग?


बैकुण्ठपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग में जारी ताजा तबादला आदेश ने एक बार फिर स्थानांतरण नीति और अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 अगस्त 2026 को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी आदेश में कोरिया वनमंडल की DFO श्रीमती प्रभाकर खलखो का तबादला उनके पुराने पदस्थापना स्थल कार्य आयोजना वनमंडल, अंबिकापुर कर दिया गया है, जबकि शंकर सिंह परदेशी को पुनः कोरिया वनमंडल का DFO बनाया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब दोनों अधिकारियों की पदस्थापना के बीच इस तरह फेरबदल हुआ है। कुछ माह पहले हुए स्थानांतरण में श्रीमती प्रभाकर खलखो को कोरिया से हटाकर कार्य आयोजना वनमंडल अंबिकापुर भेजा गया था। इसके बाद हुए फेरबदल में शंकर सिंह परदेशी को कार्य आयोजना अंबिकापुर भेजते हुए प्रभाकर खलखो को पुनः कोरिया वनमंडल की जिम्मेदारी दी गई थी।

आज अब 8 अगस्त को जारी नए आदेश ने एक बार फिर दोनों अधिकारियों की पदस्थापना को लगभग उसी दिशा में लौटा दिया है—प्रभाकर खलखो कार्य आयोजना अंबिकापुर और शंकर सिंह परदेशी कोरिया वनमंडल।

क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या पसंदीदा पोस्टिंग का खेल?

लगातार होने वाले इन तबादलों ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि आखिर छत्तीसगढ़ में स्थानांतरण की कोई स्पष्ट और स्थायी नीति है भी या नहीं? यदि अधिकारियों को कुछ ही महीनों में एक स्थान से दूसरे स्थान और फिर पुराने अथवा पसंदीदा स्थान पर भेजा जा सकता है, तो क्या सामान्य तबादला नीति केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

वन विभाग के अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी को बार-बार महत्वपूर्ण पदों पर भेजे जाने और कुछ ही समय में तबादला आदेश बदलने की प्रक्रिया पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

सरकार बताए—किस आधार पर हो रहे हैं तबादले?

ताजा आदेश के बाद सरकार और वन विभाग से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि,क्या अधिकारियों के तबादले निर्धारित प्रशासनिक नीति और आवश्यकता के आधार पर हो रहे हैं या फिर उनकी सुविधा एवं पसंद के अनुसार?

यदि स्थानांतरण के पीछे प्रशासनिक कारण हैं, तो सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि कुछ महीनों के भीतर ही एक ही अधिकारियों की पदस्थापना में बार-बार बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी?

वहीं यदि किसी अधिकारी को किसी विशेष स्थान पर भेजने के पीछे प्रशासनिक दक्षता या विभागीय आवश्यकता है, तो ऐसे मानदंड सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू क्यों नहीं होते?

'तबादला उद्योग' जैसे आरोपों के बीच पारदर्शिता जरूरी

सरकारी विभागों में तबादले सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया हैं, लेकिन जब एक ही पद और उन्हीं अधिकारियों के बीच बार-बार अदला-बदली दिखाई देती है तो स्वाभाविक रूप से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं।

कोरिया जैसे वन क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण जिले में DFO की पदस्थापना का सीधा असर वन संरक्षण, खनन क्षेत्र, वन विकास कार्य, विभागीय योजनाओं और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों पर पड़ता है। ऐसे में यह और भी जरूरी हो जाता है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां स्पष्ट प्रशासनिक मापदंडों और पारदर्शी नीति के आधार पर हों।अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले को महज सामान्य प्रशासनिक फेरबदल मानती है या फिर यह बताने की पहल करती है कि आखिर कुछ महीनों के भीतर अधिकारियों की पोस्टिंग में बार-बार बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

सोनहत वन परिक्षेत्र में मजदूरी भुगतान का खेल? परिजनों के नाम से भुगतान के आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल

 


कोरिया। कोरिया वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सोनहत वन परिक्षेत्र में मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि विभाग में कराए जा रहे विभिन्न कार्यों के मजदूरी भुगतान में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि रेंज में पदस्थ कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के नाम से भी मजदूरी का भुगतान दर्शाकर राशि आहरित की गई है।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम से भुगतान दिखाया गया है, उनमें से कुछ के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने संबंधित कार्यों में वास्तविक रूप से मजदूरी नहीं की। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई मस्टर रोल, दैनिक उपस्थिति पंजी, कार्यस्थल के अभिलेख, बैंक खातों में हुए भुगतान और संबंधित कार्यों के भौतिक सत्यापन से सामने आ सकती है। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि जिन व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किया गया, वे वास्तव में मजदूरी कार्य में शामिल थे या नहीं।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वन मंडल स्तर अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

मोर गांव मोर पानी महाभियान से ग्रामीणों को आजीविका का सहारा, 140 से अधिक श्रमिकों को प्रतिदिन मिल रहा काम ’


’नवा तरिया से संवर रहा मेण्ड्रा का भविष्य, जल संरक्षण के साथ मिल रहा रोजगार’

कोरिया / प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा प्रारंभ मोर गांव मोर पानीष् महाभियान के तहत कोरिया जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में वनांचल क्षेत्र के जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत मेण्ड्रा में मनरेगा के तहत नवा तरिया निर्माण कार्य तेजी से जारी है।

कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशन में संचालित इस कार्य को आगामी 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच एवं पंचों के नेतृत्व में गांव के पंजीकृत श्रमिक पूरी सक्रियता के साथ निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि नवा तरिया निर्माण कार्य का चयन ग्रामसभा की सहमति से किया गया है। भूमिपूजन के बाद से ही निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। बारिश से पहले कार्य पूरा करने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर काम कर रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से गांव के प्रत्येक पात्र अकुशल श्रमिक परिवार को मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

मनरेगा के अंतर्गत इस कार्य के लिए 19 लाख 48 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें 17 लाख 28 हजार रुपये श्रम मद में व्यय किए जाएंगे। ग्राम पंचायत मेण्ड्रा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है। लगभग 60 मीटर लंबाई एवं 50 मीटर चौड़ाई वाले इस तालाब में निर्माण पूर्ण होने के बाद 6600 घनमीटर से अधिक जल भंडारण क्षमता विकसित होगी।

परियोजना के तहत प्रस्तावित 6,624 मानव दिवसों में से अब तक 2,000 से अधिक मानव दिवस का सृजन किया जा चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 140 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।नव निर्मित तालाब का प्रत्यक्ष लाभ आसपास के 25 परिवारों को मिलेगा। इसके माध्यम से लगभग 5 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को बहुफसलीय खेती में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम अधिकारी  प्रतीक ने बताया कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब का संचालन स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को सौंपा जाएगा, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। तालाब में प्रतिवर्ष लगभग 13 से 15 क्विंटल मछली उत्पादन की संभावना है, जिससे ग्रामीणों की आय में अतिरिक्त वृद्धि होगी।

इस प्रकार ष्मोर गांव मोर पानीष् महाभियान के तहत मेण्ड्रा में बन रहा नवा तरिया जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।

सरगुजा वन वृत में RTI व्यवस्था पर सवाल: एक परिक्षेत्र में अवकाश, दूसरे में उसी दिन सूचना अपलोड


अम्बिकापुर,सरगुजा/छत्तीसगढ़ सरगुजा वन वृत के अंतर्गत आने वाले दो वनमंडल के अलग अलग दो वन परिक्षेत्रों में सूचना का अधिकार (RTI) पोर्टल पर दिखाई दे रही कार्यप्रणाली ने पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला यह है कि वनमंडल मनेन्द्रगढ़ के एक वन परिक्षेत्र में एक RTI कार्यकर्ता द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने पर पोर्टल यह संदेश प्रदर्शित करता है कि आवेदन शासकीय अवकाश के दिन प्राप्त हुआ है, इसलिए उसे आगामी कार्य दिवस से मान्य माना जाएगा। वहीं दूसरी ओर वनमंडल बलरामपुर के एक वन परिक्षेत्र में उसी अवकाश दिवस पर सूचना अपलोड कर प्रकरण का निराकरण भी कर दिया गया।

एक ही वन वृत के अंतर्गत आने वाले दो अलग-अलग वनमंडलों के दो परिक्षेत्रों में दिखाई दे रही यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। यदि अवकाश दिवस में आवेदन को अगले कार्य दिवस से मान्य माना जाता है, तो उसी दिन सूचना अपलोड कर प्रकरण पूर्ण करने की प्रक्रिया किस नियम के तहत की गई?

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

●क्या सरगुजा वन वृत के अलग-अलग वनमंडलों में RTI नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है?

●यदि अवकाश दिवस में आवेदन प्रभावी नहीं माना जाता, तो उसी दिन सूचना उपलब्ध कराना कैसे संभव है?

●क्या RTI पोर्टल की कार्यप्रणाली सभी कार्यालयों में समान रूप से लागू नहीं हो रही?

●क्या राज्य सूचना आयोग इस प्रकार की विसंगतियों की निगरानी कर रहा है?

सूचना के अधिकार से जुड़े जानकारों का मानना है कि राज्य सूचना आयोग एवं वन विभाग को इस मामले की जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि अवकाश दिवस में ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों और उन पर की जाने वाली कार्रवाई की वास्तविक प्रक्रिया क्या है, ताकि पूरे प्रदेश में RTI कानून का समान और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।एक ही वन वृत, एक ही RTI पोर्टल, लेकिन दो अलग-अलग प्रक्रियाएं— यही सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

रिश्तेदारों पर बने व्यंग्यात्मक वीडियो ने मचाया धमाल, 5 दिनों में 10 लाख व्यूज के करीब पहुँची रील

 



न्यूज़ डेस्क -सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर #अल्हड़_पँछी नाम के अकाउंट का एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। रिश्तेदारों और समाज की दखलअंदाजी पर व्यंग्य करते हुए बनाई गई यह रील लोगों को इतनी पसंद आई कि महज 5 दिनों के भीतर इसे लगभग 10 लाख लोगों ने देख लिया।

वीडियो में एक युवती पारंपरिक अंदाज और सहज अभिनय के जरिए रिश्तेदारों के सवालों पर तंज कसती नजर आती है। रील में इस्तेमाल की गई पंक्तियाँ —

“हाय रे मेरे रिश्तेदार,

काम काज सब छोड़ के अपना,

बन बैठे ये पहरेदार…”

दर्शकों के बीच खूब वायरल हो रही हैं।

देखें video



रील को अब तक करीब 9.41 लाख व्यूज, 50 हजार से ज्यादा लाइक्स, हजारों शेयर और सेव मिल चुके हैं। वहीं इस वीडियो के जरिए अकाउंट पर सैकड़ों नए फॉलोअर्स भी जुड़े हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को “ग्रामीण जीवन की सच्चाई” और “रिश्तेदारों की टोकाटाकी पर सटीक व्यंग्य” बता रहे हैं। कम संसाधनों में बनाए गए इस वीडियो की सादगी और देसी अंदाज ही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है।

“अल्हड़ पंछी” अकाउंट हिंदी कविता, कहानी और सामाजिक भावनाओं से जुड़े कंटेंट के लिए जाना जाता है। लगातार बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि अब छोटे क्रिएटर्स भी अपने ओरिजिनल कंटेंट के दम पर सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान बना रहे हैं।

आबकारी ने दो अवैध शराब तस्कर और विक्रेता को न्यायिक रिमांड पर भेजा जेल

 


कोरिया बैकुंठपुर/कलेक्टर कोरिया श्रीमती राेक्तिमा यादव के निर्देश तथा जिला आबकारी अधिकारी  रमेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन जिले में अवैध मदिरा के तस्करी, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला आबकारी विभाग द्वारा दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए अवैध शराब जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पहली कार्रवाई के दौरान ग्राम रोबो में मध्यप्रदेश से तस्करी कर लाई शराब की बिक्री की सूचना पर छापामार कार्रवाई की गई। आरोपी कृष्णा लक्ष्मी w/o शिव प्रसाद उम्र 50 जाति रजवार निवासी रोबो थाना बैकुंठपुर के रिहायशी मकान से 6 पाव नग विदेशी मदिरा (गोवा व्हिस्की) और जरीकेन में भरी हुई 9 लीटर महुआ शराब जप्त की गई.

आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर  सी जे एम कोर्ट बैकुंठपुर से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया.

चरचा क्षेत्र में मालती बुधराम बरगाह को अवैध रूप से 8 लीटर मदिरा विक्रय करते हुए पकड़ा गया। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जिला जेल बैकुंठपुर भेजा गया.

इन कार्रवाइयों में सहायक जिला आबकारी अधिकारी श्रीमती सपना सिन्हा, आबकारी उप निरीक्षक राम सनेही यादव, आरक्षक किशुन, बबुआ, नरेंद्र और हेमन्त का विशेष योगदान रहा।आबकारी विभाग ने बताया कि अवैध शराब विक्रय एवं तस्करी पर नियंत्रण हेतु अभियान निरंतर जारी रहेगा। आमजन से अपील है कि अवैध शराब संबंधी किसी भी सूचना जानकारी या शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 14405, व्हाट्सएप नम्बर 9424102102 और मनपसंद ऐप पर संपर्क करें। 

जिले में बैकुंठपुर में प्रीमियम और तलवापारा दुकान के अलावा पटना,चरचा, पण्डोपारा, सोनहत और जिल्दा में दुकानें संचालित है. इन दुकानों में मैनपावर एजेंसी टीम एच आर जी एस ए प्राइवेट लिमिटेड और सुरक्षा गार्ड फर्स्ट चॉइस फैसिलिटी कंपनी अधिकृत है

नवा तरिया से बदलेगी घुघरा की तस्वीर, जलसंरक्षण के साथ महिलाओं को मिलेगा आजीविका का सहारा

घुघरा में नवीन तालाब निर्माण से ग्रामीणों को रोजगार और सिंचाई की नई सौगात





कोरिया/बैकुंठपुर।कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत सोनहत की ग्राम पंचायत घुघरा में “नवा तरिया आय के जरिया” योजना के तहत नवीन तालाब निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीण श्रमिकों की सक्रिय सहभागिता से यह कार्य मनरेगा अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जलसंरक्षण के साथ ग्रामीणों को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

ग्राम पंचायत घुघरा को वित्तीय वर्ष 2026 में इस कार्य हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। पंचायत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आगामी जून माह के मध्य तक तालाब निर्माण कार्य पूर्ण होने की संभावना है।

ग्रामीण सहभागिता से मिल रही गति’
ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती चंद्रवती गरूण एवं उपसरपंच श्री रामभजन राजवाड़े ने बताया कि वरिष्ठ ग्रामीणों की सलाह और सहमति के बाद उपयुक्त स्थल का चयन किया गया। भूमिपूजन उपरांत बीते सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। ग्रामीणों का प्रयास है कि बारिश शुरू होने से पहले तालाब निर्माण पूर्ण हो जाए।

’20 लाख की लागत से बन रहा जलसंरक्षण का आधार’
मनरेगा अंतर्गत लगभग 20 लाख रुपए की स्वीकृति इस कार्य के लिए प्रदान की गई है, जिसमें 17 लाख 37 हजार रुपए श्रममूलक मद के अंतर्गत व्यय होंगे। ग्राम पंचायत घुघरा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।

निर्माणाधीन तालाब की लंबाई एवं चौड़ाई लगभग 70×70 मीटर निर्धारित की गई है। कार्य पूर्ण होने पर इसमें लगभग 6300 घनमीटर से अधिक जलभराव क्षमता विकसित होगी। प्रस्तावित 6 हजार 657 मानव दिवसों के विरुद्ध अब तक लगभग 500 मानव दिवस अकुशल श्रम का सृजन किया जा चुका है।

’महिलाओं की आजीविका और मत्स्य उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा’
यह नवीन तालाब आसपास के 16 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगा। इसके माध्यम से लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में बहुफसलीय सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रतीक ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी और आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब को स्थानीय महिला समूह को हस्तांतरित किया जाएगा। तालाब में निर्धारित गहराई अनुसार आने वाले वर्षों में लगभग 10 से 15 क्विंटल तक मत्स्य उत्पादन संभव होगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।

वन रक्षक से सहायक वन संरक्षक तक का प्रेरणादायक सफर, बेदाग छवि के साथ सेवानिवृत्त होंगे-अखिलेश मिश्रा


सहायक वन संरक्षक-अखिलेश मिश्रा

कोरिया बैकुंठपुर/कोरिया वन मंडल में अपनी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सादगीपूर्ण कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सहायक वन संरक्षक अखिलेश मिश्रा  31 मार्च यानि आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनका लंबा सेवाकाल विभाग के लिए एक मिसाल रहा है।

श्री मिश्रा ने अपने करियर की शुरुआत वन रक्षक के पद से की थी। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने न केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, बल्कि लगातार मेहनत और लगन से पदोन्नति प्राप्त करते हुए सहायक वन संरक्षक के पद तक पहुंचे।उनका पूरा सेवा काल एकदम बेदाग रहा। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, वन संरक्षण के प्रति समर्पण और अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार उनकी पहचान बन गया। जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और अवैध कटाई पर नियंत्रण के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों को विभाग में हमेशा सराहा गया।

वन्य प्राणियों के लिए जल संरक्षण की पहल

श्री मिश्रा ने वन्य प्राणियों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जंगलों में पानी की कमी को दूर करने के लिए  कई तालाबों का निर्माण कराया। गर्मी के मौसम में इन जल स्रोतों ने वन्यजीवों को राहत दी और मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 चामट पहाड़ में इको-टूरिज्म का विकास

कोरिया वन मंडल अंतर्गत चामट पहाड़  में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का कार्य भी उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। यहां विकसित की गई सुविधाओं ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए।

 आनंदपुर नर्सरी व पर्यटक पार्क का निर्माण

आनंदपुर में आधुनिक नर्सरी एवं आकर्षक पार्क का निर्माण कर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया। यह स्थान आज स्थानीय लोगों व पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है, जहां हरियाली के बीच लोग सुकून के पल बिताते हैं।

 वन ग्रामों को जोड़ने के लिए मार्ग निर्माण

दूरस्थ और पहुंच विहीन वन ग्रामों तक सड़क मार्ग का निर्माण कर उन्होंने ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाया। इन मार्गों से वन विभाग की पहुंच भी मजबूत हुई और विकास कार्यों में तेजी आई।

अग्नि सुरक्षा व वन्य प्राणी संरक्षण में सक्रिय भूमिका

वनाग्नि जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए श्री मिश्रा हमेशा तत्पर रहे। समय-समय पर जागरूकता अभियान और सुरक्षा उपायों के जरिए जंगलों को आग से बचाने के साथ वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने अनेक प्रयास किये।वही वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ उन्होंने सख्त रुख अपनाया। उनके नेतृत्व में कई कार्रवाईयां की गईं, जिससे वन क्षेत्र सुरक्षित रहा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिली।

आज श्री मिश्रा सहायक वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं,सहकर्मियों के बीच वे एक सरल, मिलनसार और मार्गदर्शक अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे। उन्होंने अपने अनुभवों से कई युवा कर्मचारियों को प्रेरित किया और उन्हें ईमानदारी से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका पूरा सेवाकाल एक प्रेरणा है—जहां उन्होंने वन रक्षक से लेकर सहायक वन संरक्षक तक का सफर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ तय किया। उनके सेवानिवृत्त होने पर विभाग में भावुक माहौल है। सहकर्मियों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य के साथ उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

“बोल बच्चन न्यूज़” की टीम भी श्री मिश्रा जी के उत्तम स्वास्थ्य, सुखमय जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।



“सरकारी अनुदान या निजी कृपा?” स्वास्थ्य मंत्री पर स्वैच्छिक अनुदान की बंदरबांट का आरोप RTI से खुलासा: स्वैच्छिक अनुदान के नाम पर अपात्रों को लाखों, शासन को भारी नुकसान



मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर/RTI कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने कलेक्टर को जनदर्शन में सनसनीखेज शिकायत सौंपते हुए छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर शासकीय स्वैच्छिक अनुदान राशि को निजी अनुकंपा फंड की तरह बांटने का गंभीर आरोप लगाया है। मिश्रा का आरोप है कि मंत्री द्वारा अपात्र लोगों, अपने राजनीतिक शुभचिंतकों और करीबी व्यक्तियों को नियमों को ताक पर रखकर अनुदान दिलाया गया, जिससे शासन को लाखों रुपये की सीधी आर्थिक क्षति हुई है।

RTI कार्यकर्ता के अनुसार, स्वैच्छिक अनुदान की राशि का वितरण नियमों के बजाय “सिफारिश तंत्र” के आधार पर किया गया। मंत्री के करीबी लोग स्वयं कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर चेक प्राप्त करते हैं और लाभार्थियों के घर तक पहुंचाते हैं। बदले में उपकृत होने का खेल चलता है। इतना ही नहीं, इस पूरी प्रक्रिया को फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाता है, जबकि नियम स्पष्ट है कि कोई भी जनप्रतिनिधि या उसका प्रतिनिधि स्वैच्छिक अनुदान राशि वितरित नहीं कर सकता।

RTI कार्यकर्ता श्री मिश्रा का कहना है कि यदि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अपात्र व्यक्तियों के लिए भुगतान की अनुशंसा नहीं की जाती, तो यह राशि जारी ही नहीं होती। स्पष्ट है कि अनुशंसा ही अनियमित भुगतान की जड़ है और इसी कारण राज्य सरकार का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए मिश्रा ने आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में स्वैच्छिक अनुदान वितरण में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मदों में ऐसे लोगों को राशि दी गई जिनका न तो शिक्षा से कोई संबंध है और न ही स्वास्थ्य संकट से। कई अत्यंत वृद्ध और अशिक्षित व्यक्तियों को शिक्षा के नाम पर ₹20-20 हजार दिए गए, जबकि मंत्री के करीबी लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों शीर्षों में ₹20 हजार से ₹25 हजार तक की राशि दिलाई गई।

शिकायत में यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि ₹1 लाख से अधिक मासिक वेतन पाने वाले एसईसीएल कर्मचारियों को भी स्वैच्छिक अनुदान दिया गया। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को एक साथ बीमार दर्शाकर प्रत्येक को ₹25-25 हजार की राशि जारी कर दी गई। सवाल यह है कि क्या पूरा परिवार एक साथ बीमार पड़ा या फिर कागजों पर बीमारी का कारोबार चलाया गया?

RTI कार्यकर्ता ने इसे सीधा-सीधा वित्तीय अनियमितता और आपराधिक कृत्य करार देते हुए कहा कि स्वैच्छिक अनुदान कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि की जेब से दिया जाने वाला धन नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार का सार्वजनिक धन है। नियमों के अनुसार अनुदान देने से पहले लाभार्थी की पात्रता, उद्देश्य, अधिकतम सीमा और उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। इन शर्तों की अनदेखी कर अनुदान देना भारत के संविधान के अनुच्छेद 266(3) का खुला उल्लंघन है।

मिश्रा ने कलेक्टर से मांग की है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में स्वैच्छिक अनुदान पाने वाले सभी लाभार्थियों की आधार से उम्र की पुष्टि, अनुदान के उद्देश्य की भौतिक जांच तथा बैंक खातों की विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि यह सामने आ सके कि सरकारी धन का उपयोग वास्तव में किसके लिए और किस उद्देश्य से किया गया।

RTI कार्यकर्ता ने साफ कहा है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो यह स्वैच्छिक अनुदान नहीं बल्कि शासकीय धन की खुली बंदरबांट का उदाहरण बन जाएगा। अब देखना यह है कि कलेक्टर स्तर पर इस गंभीर शिकायत पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई होती है, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाता है।





कोरिया पुलिस की अनोखी पहल!नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पटना बाजार सहित विविध स्थलों पर आयोजित हुए यातायात जागरूकता कार्यक्रम

 


कोरिया/बैकुंठपुर-सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के आदेशानुसार,राज्य सरकार के मनसानुरूप कलेक्टर कोरिया श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी एवं पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे के दिशा-निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती सुरेश चौबे व उप पुलिस अधीक्षक श्याम मधुकर के मार्गदर्शन में जिले में 01 जनवरी से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत शनिवार को पं. ज्वाला प्रसाद उपाध्याय शासकीय महाविद्यालय पटना के छात्रों एवं यातायात पुलिस  टीम द्वारा पटना बाजार के साथ ही विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति के माध्यम से वाहन चालकों एवं आमजन को यातायात नियमों, संकेतों एवं चिन्हों की जानकारी प्रदान की गई । नाबालिग बच्चों को वाहन न चलाने की समझाइश दी गई साथ ही 18 वर्ष से ऊपर की आयु होने पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बाद वाहन चलाने के लिए कहा गया। यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उपस्थित जनों को भविष्य में यातायात नियमों का उल्लंघन ना करने के लिए संकल्पित किया गया।

यातायात हवलदार महेश मिश्रा द्वारा यातायात के अनिवार्य, चेतावनी एवं सूचनात्मक चिन्ह की जानकारी के साथ यातायात संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए चौराहा पार करने का नियम, ट्रैफिक सिग्नल लाइट, हाथों के संकेतों के माध्यम से यातायात व्यवस्था का संचालन, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता, दो पहिया वाहन में तीन सवारी ना चलना, वाहन चलाते समय मादक द्रव्यों का सेवन ना करना, तेज गति व लापरवाही पूर्वक वाहन ना चलाना, प्रेशर हॉर्न का उपयोग ना करना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने, ज़ेब्रा क्रॉसिंग रेलवे क्रॉसिंग, गुड समेरिटन, राहवीर योजना, लाइसेंस बनवाने के नियम, दुर्घटना के कारण, दुर्घटना घटित होने पर चालक के कर्तव्य, सड़क पर वाहन चलाने के सही तरीका, मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराएं व उसमें निर्धारित जुर्माने की राशि से संबंधित जानकारी प्रदान की गई एवं जीवन में यातायात नियमों के पालन करने की शपथ दिलाई गई।

उक्त नुक्कड़ नाटक जागरूकता अभियान के दौरान यातायात प्रभारी बीरबल राजवाड़े, सहायक उप निरीक्षक धनंजय सिंह, प्राचार्य डॉ. शिव शंकर राजवाड़े, सहायक प्राध्यापक डॉ. बरखा सिंह, डॉ. पूनम टोप्पो, सहायक ग्रेड 1 रोहित साहू, प्रयोगशाला तकनीशियन श्रीमती दुर्गा राजवाड़े, आरक्षक राकेश मिश्रा, देव प्रसाद टोप्पो, विश्वनाथ सिंह, शिव साय, हवलदार महेश मिश्रा के साथ महाविद्यालय के छात्र-छात्रा व आमजन काफी संख्या में उपस्थित रहे।

रनई में धर्म, सेवा और सम्मान का संगम, 26 दिसंबर को भव्य हिन्दू सम्मेलन



कोरिया/रनई।गिरजापुर मण्डल के अंतर्गत ग्राम रनई स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में 26 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन की जिम्मेदारी श्री हनुमान सेवा समिति रनई द्वारा निभाई जा रही है। समिति के अध्यक्ष विकास शुक्ला ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की।

सम्मेलन का शुभारंभ हनुमान चालीसा पाठ के साथ होगा। इसके पश्चात पंडित सुयश देव जी महाराज एवं पंडित विक्रम शास्त्री जी महाराज धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता पर अपने उद्बोधन देंगे। कार्यक्रम में समाज सेविका सुनीता कुर्रे, राज्यपाल सम्मानित सेवा निवृत्त शिक्षक राजलाल राजवाड़े तथा मातृ शक्ति समुंद्री राजवाड़े भी सामाजिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करेंगी।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता एवं भाईचारे के उद्देश्य से विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रवासी सामूहिक रूप से सहभागिता करेंगे।

सेवा भावना से जुड़े लोगों का होगा सम्मान

हिन्दू सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित सम्मान समारोह में मण्डल गिरजापुर (केन्द्र–रनई) के शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारी, मितानिन एवं कोटवारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

आयोजकों ने क्षेत्र की जनता से कार्यक्रम में उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।