छुट्टी के दिन भी मानचित्रकार, क्या अब रात में बनेंगे वन मंडल के चौकीदार? ढीठ और नियम-कायदों से बेखबर व्यवस्था के नाक के नीचे चल रहा 'अमर' कुर्सी का खेल!

कोरिया जिले में आखिर सी.पी. पटेल ही क्यों हैं अपवाद? क्या अन्य विभागों के रिटायर्ड कर्मचारी भी चला रहे हैं दफ्तर या सिर्फ यहीं मेहरबान है प्रशासन?



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल कार्यालय में नियमों, प्रशासनिक मर्यादाओं और शासकीय कायदों की जिस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वह अब हास्यास्पद होने के साथ-साथ बेहद शर्मनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल का दफ्तर मोह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आम कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में भी यह सेवामुक्त व्यक्ति दफ्तर में बैठकर सरकारी फाइलें और नक्शे खंगालता पाया जा रहा है।हालत यह हो गई है कि लोग अब तंज कसते हुए पूछ रहे हैं"छुट्टी के दिन भी काम करने वाले ये मानचित्रकार क्या अब रात में वन मंडल कार्यालय के चौकीदार की भी जिम्मेदारी संभालेंगे?

शासकीय नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था की नाक के नीचे एक गैर-कानूनी और अनधिकृत काम बदस्तूर जारी है। बिना किसी वैधानिक आदेश या संविदा नियुक्ति के एक बाहरी व्यक्ति का दफ्तर की सरकारी कुर्सी पर बैठकर फाइलें निपटाना यह साबित करता है कि जिले में नियम-कायदों की समझ और जिम्मेदारी का कितना भारी अकाल पड़ चुका है।

क्या पूरे कोरिया जिले में सी.पी. पटेल ही एकमात्र 'अमर' अपवाद हैं?

कोरिया जिले के  अन्य शासकीय विभागों में भी हर महीने m कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। क्या रिटायरमेंट के बाद वे भी इसी तरह दफ्तर में आकर फाइलें निपटाते हैं? यदि नहीं, तो केवल कोरिया वन मंडल में सी.पी. पटेल को ही यह 'विशेष छूट' और अनधिकृत लाइसेंस क्यों दिया गया है?बड़ा सवाल है  कि,छुट्टी के दिन जब नियमित कर्मचारी अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, तब एक रिटायर्ड कर्मचारी का अकेले बैठकर दफ्तर में फाइलों को खंगालना किसी बड़े लेन-देन, साक्ष्यों को नष्ट करने या करोड़ों रुपये के प्लांटेशन के नक्शों में हेराफेरी की आशंका को सीधे तौर पर बल देता है।यदि कल को वन मंडल कार्यालय से कोई संवेदनशील नक्शा या गोपनीय फाइल गायब होती है या उसमें कोई हेरफेर पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

शीर्ष अधिकारियों का ढर्रा सवालों के घेरे में

प्रशासनिक दक्षता का तकाजा कहता है कि कार्यालय प्रमुख को अपने मातहत चल रही हर गतिविधि की खबर होनी चाहिए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। लेकिन कोरिया वन मंडल में स्थिति इसके ठीक उलट है।इस पूरे गंभीर मामले, नियमों की अनदेखी और उठते सवालों पर जब वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी और वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) दोनों से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो दोनों ही आला अधिकारी कॉल का जवाब देने से कतराते नजर आए।

जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारियों का यूं मुंह फेर लेना और मामले पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना यह साफ दर्शाता है कि इस अनधिकृत कार्यशैली को ऊपर से लेकर नीचे तक का मौन संरक्षण हासिल है। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य का वन मंत्रालय और जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर इस 'अपवाद' पर पूर्ण विराम लगाता है या वन मंडल यूं ही राम भरोसे चलता रहेगा।

इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का मूल आधार मानवीय सेवा, सहयोग एवं संवेदना- चेयरमैन तोमन साहू’


राज्य चेयरमैन ने ली रेडक्रॉस की समीक्षा बैठक, कोरिया को अत्याधुनिक वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस देने की घोषणा’


कोरिया / भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा कोरिया की समीक्षा बैठक गत मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य चेयरमैन  तोमन साहू ने की। कलेक्टर एवं जिला शाखा की अध्यक्ष श्रीमती रोक्तिमा यादव की मार्गदर्शन में बैठक आहूत की गई थी।

बैठक में रेडक्रॉस की विभिन्न सेवा गतिविधियों की समीक्षा करते हुए राज्य चेयरमैन तोमन साहू ने कहा कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का मूल आधार मानवीय सेवा, सहयोग एवं संवेदना है। उन्होंने जूनियर रेडक्रॉस एवं यूथ रेडक्रॉस को मजबूत करने, सदस्यता अभियान को विस्तार देने, रक्तदान एवं अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा सिकल सेल, टीबी एवं एड्स नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने पर बल दिया।

इसी दौरान राज्य चेयरमैन श्री तोमन साहू ने राज्य शाखा की ओर से कोरिया जिला शाखा को अत्याधुनिक वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की। इससे जिले में जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सेवाओं में सहायता मिलने की उम्मीद है।

इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारी सह सचिव डॉ. बलवंत सिंह, जिला शाखा की वाइस चेयरमैन श्रीमती गीता राजवाड़े, वाइस चेयरमैन छत्तीसगढ़ प्रदेश रेडक्रास प्रबंध समिति  कमलेश शर्मा, कोषाध्यक्ष  जितेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।



सेवा संकल्प अभियान के तहत हो रही विभिन्न गतिविधियां’

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने जिले में रेडक्रॉस की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में रक्तदान के साथ शुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन एवं सिकल सेल की निःशुल्क जांच भी की जा रही है। शिक्षा विभाग के सहयोग से जिला स्तरीय ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है।

बैठक में रेडक्रॉस दल द्वारा 15 अगस्त एवं 26 जनवरी के राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित परेड में सहभागिता, जिला रेडक्रॉस कार्यालय के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय परिसर अथवा अन्य उपयुक्त स्थान का चयन तथा आवश्यकतानुसार कर्मचारी की नियुक्ति सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।इसके अलावा भविष्य में ब्लड स्टोरेज सेंटर की स्थापना, अंगदान के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन तथा युवाओं को युवोदय रेडक्रॉस मितान योजना से जोड़ने सहित अन्य गतिविधियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में वाइस चेयरमैन  बालाराम साहू,  गिरीश कुर्रे,  केशव साहू,  आर्यन सिन्हा,  अमन गुप्ता,  यूगल किशोर, सीएस डॉ. आयुष जायसवाल , डीपीएम  अशरफ अंसारी सहित जिला प्रबंध समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

न नियमों का खौफ, न छुट्टी की परवाह: संडे को भी वन मंडल में 'हाड़तोड़ मेहनत' कर रहे रिटायर्ड मानचित्रकार पटेल; पूछने पर साधी चुप्पी!




बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में नियमों, कायदों और शासकीय व्यवस्था का जिस तरह से मखौल उड़ाया जा रहा है, वह अब हास्यास्पद और बेहद संदिग्ध मोड़ पर पहुँच चुका है। करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल की निष्ठा और हाड़तोड़ मेहनत का आलम यह है कि सामान्य कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में भी उनका कार्यालय प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सेवामुक्त सी.पी. पटेल छुट्टियों के दिन भी दफ्तर में बैठकर शासकीय  फाइलें खंगालते देखे जा रहे हैं। जब उनसे इस अनधिकृत उपस्थिति और अवकाश के दिन भी दफ्तर में काम करने की वजह पूछी गई, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

पूछने पर साधी चुप्पी: आखिर किस आश में दी जा रही 'निःशुल्क' सेवा?

जब रिटायर्ड मानचित्रकार से पूछा गया कि बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति या सरकारी आदेश के वे अवकाश के दिनों में दफ्तर खोलकर किस हैसियत से काम कर रहे हैं, तो वे  कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके। यह चुप्पी इस बात को पुख्ता करती है कि दफ्तर में उनकी मौजूदगी पूरी तरह अनधिकृत और गैर-कानूनी है।

बिना किसी स्वार्थ के इतनी 'मेहनत' संभव नहीं:

स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी आश या मजबूरी है कि रिटायरमेंट के बाद भी शनिवार-रविवार को दफ्तर में हाजिरी लगानी पड़ रही है? क्या वर्षों से कोरिया वन मंडल पर जमा कब्जा अब करोड़ों के प्लांटेशन प्रोजेक्ट्स में किसी बड़े लेन-देन के लिए इस्तेमाल हो रहा है?



शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ की गंभीर आशंका

छुट्टी के दिन जब कार्यालय में कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं होता, तब अकेले बैठकर फाइलों का निपटारा करना किसी बड़े फेरबदल या साक्ष्यों को ठिकाने लगाने की साजिश की ओर इशारा करता है।

एक तरफ रिटायर्ड कर्मचारी से सवाल पूछने पर निरुत्तर हो जाता है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार आला अधिकारी फोन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। अधिकारियों और पूर्व कर्मचारी का यह मिला-जुला मौन इस बात का पुख्ता सबूत है कि कोरिया वन मंडल में 'अमर' कुर्सी का यह खेल ऊपर तक फैले किसी संरक्षण के बिना संभव नहीं है।



’आइए, किसी चेहरे की मुस्कान का हिस्सा बनें’’सेवा दान महा अभियान से जुड़ने जिलेवासियों में बढ़ रहा उत्साह’

कपड़े, किताबें और खेल सामग्री दान करने करा रहे पंजीयन’
घर में रखी चीजें, किसी के काम आएगी
1अक्टूबर को रामानुज मिनी स्टेडियम में विशेष आयोजन



कोरिया/ घर में रखी वह किताब, जिसे अब कोई नहीं पढ़ता.. वह खिलौना, जिससे बच्चे बड़े हो चुके हैं.. वह कपड़ा, जो अब अलमारी में उपयोग में नहीं आता... हो सकता है कि यही छोटी-सी चीज किसी जरूरतमंद बच्चे या परिवार के लिए बड़ी उपयोगिता और खुशी का कारण बन जाए। इसी भावना को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से कोरिया जिले में 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत 'सेवा दान महाअभियान' चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत जिले में नागरिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों की सहभागिता देखने को मिल रही है। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी दान सामग्री जमा कराकर अभियान में सहभागिता की है। नागरिक क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीयन कर अपनी ओर से दान की जाने वाली सामग्री की जानकारी भी दर्ज करा सकते हैं।

’दान के लिए जरूरी नहीं कि वस्तु नई होए उपयोगी होना जरूरी है’

कलेक्टर श्रीमती यादव का कहना है कि सेवा दान महाअभियान के तहत घरों में उपलब्ध ऐसी उपयोगी वस्तुएं दान की जा सकती हैंए जिनका वर्तमान में परिवार में उपयोग नहीं हो रहा है। इनमें बच्चों के खिलौने, शैक्षणिक एवं खेल सामग्री, कहानी की किताबें, स्कूल की पाठ्यपुस्तक, कॉपियां और अच्छी स्थिति के कपड़े शामिल हैं। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के उपयोग के साफ.सुथरे कपड़े भी दान किए जा सकते हैं।

अभियान का संदेश सरल है

सेवा के लिए बड़ी चीज देना जरूरी नहीं, मन से दी गई छोटी.सी उपयोगी वस्तु भी किसी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

30 सितंबर को जिला कार्यालय में जमा कर सकते हैं सामग्री

जिलेवासी 30 सितंबर 2026 को जिला कार्यालय, बैकुण्ठपुर में अपनी दान सामग्री जमा कर सकते हैं। इच्छुक नागरिक कलेक्टर अथवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सामग्री जमा करा सकते हैं।

’1 अक्टूबर को रामानुज मिनी स्टेडियम में सेवा दान आयोजन’

अभियान के अंतर्गत 1 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रामानुज मिनी स्टेडियम, बैकुंठपुर में विशेष सेवा दान आयोजन किया जाएगा। नागरिक इस आयोजन में अपने घर की उपयोगी दान सामग्री लेकर पहुंच सकते हैं।

’क्यूआर कोड से पंजीयन की सुविधा’

अभियान में सहभागिता के लिए जिला प्रशासन ने क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई है। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर अपने द्वारा दान की जाने वाली सामग्री की जानकारी दर्ज करा सकते हैं। अभियान से संबंधित जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9907203250 पर संपर्क किया जा सकता है।

’कलेक्टर की अपील.अपने साथ दूसरों को भी जोड़ें’

कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने जिलेवासियों से सेवा दान महा अभियान में सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि सेवा और सहयोग की भावना समाज को जोड़ती है। घर में अनुपयोगी पड़ी कोई उपयोगी वस्तु किसी जरूरतमंद तक पहुंचकर उसके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

उन्होंने नागरिकों के साथ सामाजिक संस्थाओं समाज प्रमुखों साहित्यकारों, पत्रकारों, खेल संघों, व्यावसायिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों एवं परिवारों से अभियान में सहभागिता करने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इससे जोड़ने का आह्वान किया है। विभिन्न समाज प्रमुखों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को पत्र के माध्यम से 'सेवा मेरा योगदान' के तहत सहभागिता का आग्रह भी किया गया है।

’एक छोटी पहल... किसी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान’

अभियान लोगों को अपने घर की ऐसी वस्तुओं को जरूरतमंदों तक पहुँचाने का अवसर दे रहा हैए जो उनके लिए भले ही उपयोग में न हों, लेकिन किसी दूसरे के लिए काम आ सकती हैं। आपके घर की अलमारी, बच्चों की पुरानी किताबें या खिलौनों का एक छोटा हिस्सा किसी और के जीवन में उपयोग और खुशी जोड़ सकता है।







कोरिया वन मंडल में 'महाघोटाले' की बू! वर्षों से डटे सी.पी. पटेल की संपत्ति की हो जांच; क्या सेवानिवृत्ति के बाद करोड़ों के 'प्लांटेशन प्रोजेक्ट' पर टिकी इनकी नजर ?


छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोलकर फाइलों में हेराफेरी का अंदेशा; DFO की चुप्पी से भ्रष्टाचार के संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा!

बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं का जिस बेशर्मी से मखौल उड़ाया जा रहा है, उसने अब एक साधारण प्रशासनिक लापरवाही से बढ़कर एक बड़े 'वित्तीय घोटाले' और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। पूरे सेवाकाल के दौरान एक ही जगह जमे रहकर वन मंडल की जड़ों को खोखला करने वाले सेवानिवृत्त मानचित्रकार सी.पी. पटेल का रिटायरमेंट के महीने भर बाद भी दफ्तर पर कब्जा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आम कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार जैसे शासकीय अवकाश के दिन भी यह सेवामुक्त 'आम इंसान' दफ्तर में बैठकर सरकारी नक्शों और फाइलों को खंगालता पाया जा रहा है।
अब इस पूरे अनधिकृत खेल के पीछे का असली खेल सामने आने लगा है। सूत्रों और स्थानीय जानकार लोगों का दावा है कि सी.पी. पटेल का यह 'पुनर्वसन' केवल किसी सेवा-भाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे वन मंडल में आने वाले करोड़ों रुपये के CA प्लांटेशन प्रोजेक्ट (वृक्षारोपण परियोजनाओं) के भारी-भरकम बजट पर नजर टिके होना माना जा रहा है।

करोड़ों के प्रोजेक्ट्स और नक्शों का 'मास्टरमाइंड': संपत्ति की उच्च स्तरीय जांच की मांग

कोरिया वन मंडल में वन CA प्लांटेशन पोड़ी बचरा में करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत हैं। इन परियोजनाओं का वास्तविक सीमांकन, नक्शा पास कराना और कागजी खानापूर्ति करना मानचित्रकार के हाथ में होता है। आशंका जताई जा रही है कि धरातल पर होने वाले फर्जीवाड़े और कागजी पौधों को सही ठहराने के लिए ही सी.पी. पटेल को रिटायरमेंट के बाद भी अनधिकृत रूप से कुर्सी पर बिठाकर रखा गया है।

अकूत संपत्ति की विजिलेंस/ACB से हो जांच:

एक ही जगह पर दशकों तक बने रहने और अब रिटायरमेंट के बाद भी दफ्तर न छोड़ने की इस जिद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जागरूक नागरिकों और जन प्रतिनिधियों का कहना है कि सी.पी. पटेल के सेवाकाल के दौरान अर्जित की गई  संपत्ति की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

शासकीय अवकाश के दिन दफ्तर में एंट्री: साक्ष्य मिटाने की साजिश?

शनिवार को जब दफ्तर पूरी तरह बंद रहता है और कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं होता, तब एक बाहरी व्यक्ति का अकेले बैठकर फाइलें खंगालना इस बात का सीधा संकेत है कि या तो पुराने घोटालों के सबूतों को नष्ट किया जा रहा है या फिर आने वाले करोड़ों के प्रोजेक्ट्स की फाइलें तैयार की जा रही हैं।

DFO की संदिग्ध खामोशी: बाइट देने से कतराते रहे शीर्ष अफसर

इस पूरे गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक भ्रष्टाचार के मामले में जब कोरिया वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी से उनका पक्ष (बाइट) जानने के लिए दूरभाष पर बार-बार संपर्क साधा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह फोन का कोई जवाब नहीं दिया।

मामले का दायरा बड़ा होते देख जब वृत्त स्तर के सबसे बड़े अधिकारी यानी मुख्य वन संरक्षक (CCF) से आधिकारिक बयान लेने का प्रयास किया गया, तो वे भी इस पूरे घालमेल पर कुछ भी कहने से बचते दिखे।

शीर्ष अधिकारियों का यूं अपना मुंह बंद कर लेना और कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना यह साबित करता है कि करोड़ों के इस खेल में तार नीचे से लेकर ऊपर तक जुड़े हो सकते हैं। अगर समय रहते छत्तीसगढ़ का वन मंत्रालय और उच्च स्तरीय जांच एजेंसियां इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लेती हैं, तो कोरिया वन मंडल में सरकारी जमीनों और प्रोजेक्ट्स के नाम पर भारी चूना लगना तय है।

पोड़ी बचरा CA प्लांटेशन बना कोरिया वन मण्डल का 'सेंट जेवियर गार्डन': करोड़ों के 'बजट'पर टिकीं नजरें, औपचारिकता में सिमटता दिख रहा वनीकरण!


डीएफओ  की वापसी, एसडीओ का 'होम ग्राउंड' में लौटना, सेवानिवृत्त मानचित्रकार का 'कुर्सी मोह' और 'कथित एक शुभचिंतक' क्या परसा कोल माइंस का फंड ही है इस 'धमाल' की असली वजह?
​'धमाल' के स्टारकास्ट जैसा प्रशासनिक सिंडिकेट: बंद कमरों से 'W' (खजाने) तक बिछी बिसात



​बैकुण्ठपुर/कोरिया वन मण्डल का यह प्रशासनिक ड्रामा 'धमाल' फिल्म के उस सीन जैसा लगता है, जहाँ हर किरदार की नजरें सिर्फ और सिर्फ उस '10 करोड़ के खजाने' पर टिकी होती हैं। परसा कोल माइंस से मिले करोड़ों रुपये के बजट की फाइलें खुलते ही वनमंलड में DFO की वापसी होती है और पोड़ी बचरा CA  का शांत पड़ा वनीकरण प्रोजेक्ट अचानक स्पीड पकड़ लेता है। ठीक इसी मोड़ पर बैकुंठपुर के स्थानीय निवासी और वानण्डल के पूर्व रेंजर साहब अब SDO की पावरफुल भूमिका में सामने आते हैं। लोकल भूगोल का कोना-कोना जानने के कारण इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट से जुड़ जाते है। वहीं दफ्तर के कोने में शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार का अंदाज़  "हम अंग्रेजों के ज़माने के मानचित्रकार हैं!" की तर्ज पर बिना किसी आधिकारिक जवाबदेही के कुर्सी से चिपके दिखते हैं। वहीं एक 'कथित क्षेत्रीय शुभचिंतक' ठेकेदारी के समीकरण सेट कर रहा है। इस पूरी स्टारकास्ट के बीच  रेंजर साहब फूले नहीं समा रहे—क्योंकि जब ऊपर से 'ग्रीन सिग्नल' हो, तो जमीनी बदहाली की फिक्र किसे होती है!



​ 'धमाल' की तर्ज पर सिस्टम को ठेंगा दिखाकर काम शुरू

फिल्म 'धमाल' में जैसे बिना किसी प्लानिंग के सीधे ज़मीन खोदना शुरू कर दिया जाता था, मुगम बारी में भी कुछ इसी  अंदाज वही रीटेक दोहराया जा रहा है। वन विभाग के नियम (SOP) कहते हैं कि पहले ज़मीन की सफाई (साइट क्लीयरेंस), समतलीकरण, फेंसिंग और पानी का इंतज़ाम होना चाहिए, उसके बाद गड्ढे खुदने चाहिए। लेकिन यहाँ का ड्रामा बिल्कुल उल्टा फिल्माया जा रहा है—न ज़मीन साफ हुई, न सुरक्षा घेरा बना और न सिंचाई की एक बूंद दिखी... सीधे मजदूरों को उतारकर गड्ढा खुदाई शुरू करा दी गई। शुरुवाती  व्यवस्था का नामोनिशान नहीं है, पर कुदालें बज रही हैं। यह कोई वनीकरण की गंभीरता नहीं, बल्कि सिर्फ मस्टर रोल भरकर बजट पचाने का 'कागजी स्टंट' नजर आ रहा है।



​ मजदूरों का दर्द: ₹20 की प्रस्तावित दर और ठप होता काम

​फिल्म में जैसे 'मानव' और 'आदित्य' से हाड़-तोड़ काम करवाकर अंत में निराशा हाथ लगती थी, वैसा ही सीन मुगूम बारी के मैदान में घट रहा है। हालांकि मजदूरों को अभी भुगतान नहीं हुआ है, लेकिन उनका स्पष्ट कहना है कि अधिकारियों ने प्रति गड्ढा महज ₹20 देने की बात कही है। मुरम और अत्यधिक पत्थरीली जमीन पर दोपहर की धूप में 2×2 फीट का गड्ढा खोदकर मजदूर दिनभर में मुश्किल से 10 गड्ढे भी तैयार नहीं कर पाता है, यानी दिनभर की कुल दिहाड़ी का अंदाजा आप लगा सकते है मेहनत के अनुपात में इस ₹20 के रेट को मजदूरों ने सरासर अन्याय और शोषण करार दिया है।

​नियमों के साथ खिलवाड़

यह पूरा घटनाक्रम किसी ऐसी फिल्म की शूटिंग जैसा है जो गलत मौसम में की जा रही हो। वनीकरण के वैज्ञानिक नियम और मौसम का मिजाज साफ कहते हैं कि गड्ढा खुदाई का सही वक्त अक्टूबर के बाद (ठंड में) होता है, ताकि धूप और हवा से मिट्टी का प्राकृतिक उपचार हो सके। लेकिन वन विभाग भारी बारिश के बीचों-बीच गड्ढे खुदवाने की ज़िद पर अड़ा है। गड्ढे पानी से भरकर कीचड़ में तब्दील हो रहे हैं। वैज्ञानिक तरीका और नियम ताक पर हैं, मानो अफसरों को पौधों को ज़िंदा रखने से कोई मतलब नहीं, बस समय-सीमा के भीतर बजट के आंकड़ों की एंट्री पूरी करनी है।

​बिना तैयारी के 'रोल-कैमरा-एक्शन'

ग्राउंड जीरो का दृश्य देखकर लगता है कि वन विभाग ने बिना किसी तैयारी के सीधे 'एक्शन' बोल दिया है। जिस ज़मीन पर नया पौधा रोपा जाना है, वहां घुटनों तक उगी जंगली घास और कंटीली झाड़ियों का राज है। नियम के मुताबिक पहले पूरे इलाके की सफाई होनी चाहिए थी, लेकिन झाड़ियों के बीच ही जैसे-तैसे कुदाल चलाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। अगर इस घने जंगल के बीच नया पौधा लगा भी दिया जाए, तो जंगली खरपतवार उसका दम घोंट देगी। यह दृश्य साबित करता है कि धरातल पर तैयारी के नाम पर सिर्फ शून्य है।



​बिना फेंसिंग के 'ओपन गार्डन'

मैदान का अगला सीन किसी कॉमेडी ड्रामा जैसा है। करोड़ों रुपये का बजट होने के बाद भी पूरे प्लांटेशन क्षेत्र में सुरक्षा फेंसिंग (तार घेरा) का कोई वजूद नहीं है। आवारा मवेशी बेखौफ होकर खुदे हुए गड्ढों के बीच टहल रहे हैं। बिना फेंसिंग के पौधरोपण का यह काम वैसा ही है जैसे बिना चौकीदार के खुली सड़क पर खजाना छोड़ देना! मवेशियों की बेरोक-टोक आवाजाही यह साबित करती है कि अफसरों का ध्यान लगने वाले पौधों को बचाने पर बिल्कुल नहीं, बल्कि केवल ठेकेदारी और बजट ठिकाने लगाने पर केंद्रित है।

​क्या 'W' का खजाना बचेगा या फाइल दफन होगी?

इस पूरी खोजी रिपोर्ट का क्लाइमैक्स एक बड़े सवाल पर आकर रुकता है। परसा कोल माइंस के एवज में मिला करोड़ों रुपये का यह फंड क्या इसी तरह बिना फेंसिंग, बिना पानी, बिना सफाई और मजदूरों के असंतोष की बलि चढ़कर 'प्रशासनिक सिंडिकेट' की जेब में चला जाएगा? क्या विभाग के आला अधिकारी इस 'धमाल' शैली के कागजी दावों और धरातलीय बदहाली की निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर हर बार की तरह इस बार भी करोड़ों का वनीकरण सिर्फ फाइलों में हरा-भरा दिखाकर दफन कर दिया जाएगा?

बेपरवाह व्यवस्था! रिटायरमेंट के बाद भी दफ्तर में जमे मानचित्रकार; अधिकारियों की मौन स्वीकृति का आखिर क्या है मतलब?

नियमित कर्मचारी की तरह रोजाना निपटा रहे सरकारी काम; कोरिया वन मंडल में नियमों को ठेंगा दिखाने का खेल जारी!



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में सेवानिवृत्त होने के बाद भी शासकीय कार्यों का निपटारा कर रहे मानचित्रकार सी.पी. पटेल का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रथम दृष्टया गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय नियमों की अनदेखी उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना रही है।​रिटायरमेंट के महीने भर बाद भी सी.पी. पटेल का एक नियमित कर्मचारी की तरह रोजाना वन मंडल कार्यालय आना, शासकीय सीट पर बैठना और गोपनीय फाइलों व नक्शों का निपटारा करना अब व्यवस्था पर बड़ा प्रहार कर रहा है।

​अधिकारियों की चुप्पी के आखिर क्या हैं मायने?क्या अनधिकृत मौजूदगी को मौन स्वीकृति?

कार्यालय प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे एक सेवानिवृत्त व्यक्ति बेधड़क सरकारी रिकॉर्ड खंगाल रहा है। ऐसे में अधिकारियों की यह चुप्पी सवाल खड़ा करती है कि क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर इसे संरक्षण दिया जा रहा है?

​गोपनीयता के उल्लंघन पर आंखें मूंदे क्यों बैठा है वन विभाग?

शासकीय अभिलेखों और वन मंडल के नक्शों की एक गोपनीयता होती है। बिना किसी वैधानिक आदेश के किसी बाहरी व्यक्ति को इन दस्तावेजों तक खुली पहुंच देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद जिम्मेदारो की मौन समझ से परे है।

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फाइलों में ऐसा क्या है, जिसे नए कर्मचारी को नहीं सौंपा जा सकता?

चर्चा जोरों पर है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी या राज़ है कि सी.पी. पटेल का विकल्प विभाग को नहीं मिल पा रहा? क्या किसी पुराने लेनदेन, सीमांकन के विवादों या संवेदनशील फाइलों को सुलझाने/छिपाने के लिए ही उनकी उपस्थिति अनिवार्य बनाई गई है?

गड़बड़ी हुई तो बलि का बकरा कौन?

जिस प्रकार  नियमित कर्मचारियों की तरह रिटायर्यड  मानचित्रकार का कार्यकाल में मौजूदगी देखने को मिल रहा है, यदि कल  किसी नक्शे में फेरबदल या दस्तावेजों में कोई छेड़छाड़ की जाती है, तो कानूनी तौर पर किस अधिकारी पर कार्रवाई होगी? सवाल यह है कि,क्या चुप्पी साधे बैठे आला अधिकारी इसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं?

​DFO से संपर्क का प्रयास फिर विफल 

​इस पूरे गंभीर मामले और उठते सवालों पर कोरिया वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष (कॉल) के माध्यम से संपर्क साधने का पुनः प्रयास किया गया, परंतु उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका।जिम्मेदार अधिकारियों का फोन न उठाना और मामले से दूरी बनाना यह साबित करता है कि वन विभाग इस अनधिकृत कार्यशैली पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह है कि विभाग  अधिकारी इस पर संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करते हैं।


गणेश उत्सव और कर्मा पूजा की धूम: मांदर की थाप पर थिरके अशोक जायसवाल, अपनों के बीच पाकर खिले लोगों के चेहरे


कोरिया -जिले में इन दिनों गणेशोत्सव की भक्तिमय बहार के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति और पारंपरिक त्योहार 'कर्मा पूजा' का उल्लास चरमोत्कर्ष पर है। एक ओर जहाँ घर-घर और गली-मोहल्लों में स्थापित गणेश पंडालों में मंत्रोच्चार और आरती की गूंज है, वहीं दूसरी ओर कर्मा पूजा में मांदर की गूंज और पारंपरिक गीतों की धुन ने उत्सव के माहौल को दोगुना कर दिया है।

इसी पावन अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने क्षेत्र के विभिन्न गणेश पंडालों और कर्मा पूजा आयोजनों में पहुँचकर पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्रवासियों की सुख, शांति और खुशहाली की कामना की।

गणेश पंडालों में टेका माथा, मांगी खुशहाली की दुआ

अशोक जायसवाल ने क्षेत्र के अनेक सार्वजनिक गणेश पंडालों का दौरा किया। उन्होंने सार्वजनिक गणेश पूजा समिति दीवानी बांध, मनसुख, अंगा, पूटा, पटना बड़का पारा, मजगवा, आमापारा, केनापारा बीच गली और साल्ही सहित बैमा और अनेक ग्रामीण अंचलों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं के दर्शन कर भगवान श्री गणेश से क्षेत्र की समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।



मांदर की थाप पर थिरकी लोक-संस्कृति

छत्तीसगढ़ी परंपरा और लोक-संस्कृति का अनूठा दृश्य तब देखने को मिला जब अशोक जायसवाल सार्वजनिक गणेश पूजा समिति केनापारा बीच गली और बैमा में आयोजित कर्मा पूजा में शामिल हुए। कर्मा पूजा के दौरान वे स्वयं को छत्तीसगढ़िया माटी के इस पारंपरिक उत्सव से अलग नहीं रख सके और मांदर थामकर उसकी सुरीली थाप पर थिरकते नज़र आए। मांदर की थाप और कर्मा गीतों की धुन के बीच पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का यह आत्मीय अंदाज़ देख उपस्थित जनसमूह झूम उठा।

अपनों के बीच पाकर लोगों में दिखा अपार उत्साह

अपने जनप्रिय नेता और आत्मीय साथी अशोक जायसवाल को अपने बीच साधारण ढंग से कर्मा पूजा में मांदर बजाते और गणेश उत्सव की खुशियाँ बाँटते देखकर स्थानीय ग्रामीण, बुजुर्ग, माताएँ, बहनें और युवा बेहद खुश और उत्साहित नज़र आए। लोगों ने सहर्ष उनका स्वागत किया और त्यौहार की खुशियों को एक साथ साझा किया।

बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला जेल बैकुण्ठपुर के तिमाही निरीक्षण में विधिक सहायता, भोजन, स्वच्छता एवं मूलभूत सुविधाओं का लिया जायजा


कोरिया/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के रिट पीटिशन (सी) क्रमांक 1404/2023 सुकन्या संस्था विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में पारित निर्णय के अनुपालन में आज जिला जेल बैकुण्ठपुर का तिमाही निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा, उन्हें उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति तथा बिना किसी भेदभाव के विधिक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बैकुण्ठपुर योगेश पारीक, पुलिस अधीक्षक  हरिश राठौर एवं अपर कलेक्टर  सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य के नेतृत्व में निरीक्षण दल ने जिला जेल का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रतीक्षा अग्रवाल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती अमृता दिनेश मिश्रा सहित डिस्ट्रिक्ट विजिटर्स बोर्ड के सदस्य एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


बंदियों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल में निरुद्ध बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं तथा उन्हें प्राप्त हो रही सुविधाओं की जानकारी ली। बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता की भी जानकारी ली गई तथा यह सुनिश्चित किया गया कि जरूरतमंद बंदियों को समय पर विधिक सेवाएं उपलब्ध हों और किसी भी बंदी को उसकी सामाजिक या जातिगत पहचान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े। निरीक्षण के दौरान बंदियों के बैरकों, साफ-सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था का भी अवलोकन किया गया।अधिकारियों ने बंदियों को प्रदान किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की और व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी ली।


लीगल एड क्लिनिक के माध्यम से मिल रही विधिक सहायता की समीक्षा

जिला जेल में स्थापित लीगल एड क्लिनिक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं बंदियों को प्रदान की जा रही विधिक सहायता की समीक्षा की गई।अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया कि विधिक सहायता से वंचित कोई भी पात्र बंदी न रहे तथा प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक न्याय और विधिक सहायता की पहुंच सुनिश्चित हो। निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक  शेख आविद रजा, लीगल एड डिफेंस कौंसिल डिप्टी चीफ  के.बी. नामदेव एवं पैरालीगल वॉलिंटियर्स उपस्थित रहे।

हर बंदी के अधिकारों की रक्षा पर विशेष जोर

माननीय उच्चतम न्यायालय के रिट पीटिशन (सी) क्रमांक 1404/2023 में 03 अक्टूबर 2024 को पारित निर्णय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं डिस्ट्रिक्ट विजिटर्स बोर्ड कोरिया द्वारा जिला जेल बैकुण्ठपुर का प्रत्येक तिमाही में निरीक्षण किया जाता है।इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य जेल में निरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति के साथ मानवीय एवं गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना तथा जातिगत अथवा किसी भी अन्य प्रकार के भेदभाव की संभावना को समाप्त करना है। निरीक्षण के दौरान वर्तमान व्यवस्थाओं में जातिगत अथवा अन्य किसी प्रकार का भेदभाव नहीं पाया गया।

अधिकारियों ने कहा कि कानून के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और जरूरतमंदों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना विधिक सेवा व्यवस्था की मूल भावना है। जेल भी समाज का ही एक हिस्सा है और यहां निरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों, सम्मान तथा आवश्यक विधिक सहायता की जानकारी मिलना आवश्यक है।

कोरिया वन मंडल में रिटायरमेंट के बाद भी डटे सेवानिवृत्त मानचित्रकार! न पद, न आदेश... फिर भी दफ्तर में रोजाना हाजिरी; नक्शों व फाइलों में फेरबदल हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल कार्यालय से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर शासकीय कार्य संपादित कराए जा रहे हैं। वन मंडल में पदस्थ रहे मानचित्रकार सी.पी. पटेल करीब एक माह पूर्व सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे रोजाना कार्यालय पहुंचकर नियमित कर्मचारियों की तरह शासकीय कामकाज निपटा रहे हैं और फाइलों को संभाल रहे हैं।बिना किसी शासकीय आदेश के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का कार्यालय में बैठकर काम करना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



गोपनीयता और दस्तावेजों की सुरक्षा पर खतरा: सेवानिवृत्ति के बाद कोई भी व्यक्ति आम नागरिक की श्रेणी में आ जाता है। ऐसे में बिना किसी पद या जिम्मेदारी के किसी बाहरी/सेवानिवृत्त व्यक्ति को शासकीय व गोपनीय दस्तावेजों तक सीधी पहुंच देना किस हद तक सही है?दफ्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे महीने भर से चल रहा यह खेल कई कई सवाल उठाता है, कि क्या उच्च अधिकारियों को इसकी भनक नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी मौन स्वीकृति दी गई है?

बता दे कि,सेवानिवृत्त होने के बावजूद मानचित्रकार सी.पी. पटेल रोजाना कार्यालय के मानचित्र शाखा में बैठकर बेझिझक शासकीय कार्यों का संपादन करते देखे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अपने पूरे सेवाकाल के दौरान उनका कभी स्थानांतरण नहीं हुआ और वे पूरी सर्विस एक ही जगह डटे रहे। अब रिटायरमेंट के बाद भी कोरिया वन मंडल से उनका 'मोह' खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

क्या गहरा राज छिपा है फाइलों में? 

स्थानीय गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर ऐसा कौन सा 'विशेष मोह' या राज़ है जिसके चलते रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें दफ्तर से दूर नहीं किया जा रहा है।एक ही स्थान पर लंबे समय तक सेवा देने के बाद रिटायरमेंट उपरांत बिना किसी आधिकारिक पद या वैधानिक आदेश के दफ्तर की फाइलें संभाले रखना विभागीय निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। देखना यह होगा कि मामले में उच्चाधिकारी इस पर कोई कड़ा संज्ञान लेते हैं या 'मोह' का यह सिलसिला ऐसे ही जारी रहता है ।

"इस पूरे मामले में कोरिया वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका।


खेत में काम कर रहे नाबालिग पर गिरी आकाशीय बिजली, मौत; संकट की घड़ी में मदद को आगे आए अशोक जायसवाल

तेज बारिश के दौरान बड़े साल्ही गाँव में हुआ दुखद हादसा

​पूर्व पालिका अध्यक्ष अशोक जायसवाल ने तत्काल कराई एम्बुलेंस की व्यवस्था, परिजनों को बंधाया ढांढस







​बैकुंठपुर / कोरिया:

कोरिया जिले के ग्राम बड़े साल्ही में बीते 17 सितंबर को कुदरत का कहर टूट पड़ा। तेज बारिश के बीच खेत में काम कर रहे एक नाबालिग की आकाशीय बिजली गिरने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस अचानक हुए हादसे से परिवार की खुशियां छिन गईं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

​सूचना मिलते ही हरकत में आई व्यवस्था-घटना के बाद स्थानीय पुलिस की सहायता से शव को उप स्वास्थ्य केंद्र बचरा पोंडी लाया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम एवं आगे की प्रक्रिया के लिए जिला अस्पताल बैकुंठपुर पहुँचाने की आवश्यकता थी।

​मामले की जानकारी मिलते ही ग्राम बड़े साल्ही निवासी सरवन ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया।

​त्वरित समन्वय से मिली मदद-सूचना पाते ही अशोक जायसवाल ने तत्काल जिला अस्पताल प्रबंधन से समन्वय स्थापित किया और त्वरित पहल करते हुए बचरा पोंडी के लिए एम्बुलेंस रवाना करवाई। एम्बुलेंस के पहुँचते ही शव को सम्मानपूर्वक जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर लाया गया, जहाँ उसे पोस्टमार्टम कक्ष में सुरक्षित रखवाया गया।

​मानवीय संवेदनाओं की मिसाल-​अशोक जायसवाल ने अस्पताल पहुँचकर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और इस कठिन समय में उन्हें ढांढस बंधाया। दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े होकर तुरंत सहायता उपलब्ध कराने की इस मानवीय पहल की ग्रामीणों ने सराहना की।

​यह हादसा परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन विपदा के समय में मिली इस त्वरित मदद और सहयोग ने यह संदेश दिया कि संवेदनशीलता और सामाजिक एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

कोरिया वनमंडल की खुली पोल: न पानी, न फेंसिंग... CA प्लांटेशन के नाम पर सिर्फ गड्ढा खोदने की औपचारिकता! स्थल सफाई और सुरक्षा घेरे के बिना पौधरोपण की तैयारी; क्या सिर्फ बजट खपाने में जुटा है वन विभाग?

कोरिया/बैकुंठपुर: कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र में स्थित बहुचर्चित क्षतिपूरक वनीकरण (CA) प्लांटेशन 'पोड़ी बचरा'एक बार फिर सुर्खियों में है। पैच मुगूम बारी में वन विभाग की जल्दबाजी और अधूरी तैयारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि धरातल पर पुख्ता इंतजाम किए बिना ही विभाग पौधरोपण के काम को आनन-फानन में निपटाने की तैयारी में जुटा हुआ है। 

 मजदूरी दर पर असंतोष और काम 

 

बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पोड़ी बचरा के '

मुगूम बारी' पैच में क्षतिपूरक वनीकरण (CA) का काम विवादों के 

घेरे में आ गया है। बारिश के इस मौसम में वन विभाग द्वारा आनन-

फानन में कराई जा रही गड्ढा खुदाई को लेकर मजदूरों ने मोर्चा खोल

दिया है। मजदूरों का कहना है कि मुरम और पत्थरीली जमीन पर 

2×2 फीट का गड्ढा खोदने के लिए उन्हें महज ₹20 प्रति गढ्ढे देने कहा

गया है। इतनी कठिन जमीन पर दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद भी 

एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पाता है, जिससे मेहनत

के अनुपात में मजदूरी दर बेहद कम है, जिसके विरोध में मजदूरों ने 

फिलहाल काम बंद कर दिया है। 

 

समय से पहले गड्ढा खुदाई समझ से परे।  


तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो पौधरोपण के लिए 

गड्ढा खुदाई का सही समय अक्टूबर के बाद (ठंड के मौसम में) माना 

जाता है, ताकि बारिश के दौरान जमी हुई मिट्टी को सुखाया और 

उपचारित किया जा सके। लेकिन कोरिया वन मंडल के 

जिम्मेदार  अधिकारियों ने नियमों और वैज्ञानिक तरीकों को 

दरकिनार 

कर इस बारिश के मौसम में ही गड्ढा खुदाई का काम कराने पर 

उतारू 

है। 


सफाई और धरातलीय तैयारी नदारद 


बता दे कि,जिस स्थान पर  पौधरोपण किया जाना है, वहां 

धरातलीय स्तर पर कोई बुनियादी तैयारी नहीं दिख रही है। 

पौधरोपण 

से पहले पूरे क्षेत्र की समुचित सफाई और खरपतवार हटाना अनिवार्य

होता है, लेकिन मौके पर घास और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। 

सफाई के अभाव में लगने वाले नए पौधों का पनपना बेहद मुश्किल 

नजर आ रहा है।

 


 सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव 


सिंचाई की व्यवस्था को लेकर भी विभाग की घोर अनदेखी उजागर 

हुई है। यदि इस समय जैसे-तैसे पौधे लगा भी दिए जाते हैं, तो आने 

वाले शुष्क दिनों में उन्हें जीवित रखने के लिए वन विभाग के पास 

पानी का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। बिना सिंचाई व्यवस्था के 

लगाए गए पौधों का सूखना तय माना जा सकता है। 

 

सुरक्षा फेंसिंग के नाम पर घोर लापरवाही 


सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले फेंसिंग कार्य को 

भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। वर्तमान में मुगम बारी 

पैच में मवेशियों और बाहरी खतरों से पौधों को बचाने के लिए फेंसिंग 

(सुरक्षा घेरा) का काम तक नहीं कराया गया है। यह लापरवाही 

दर्शाती है कि विभाग को पौधों के संरक्षण से ज्यादा काम को 

निपटाने की जल्दी है। 


भारी-भरकम बजट के बाद भी तैयारी अधूरी  


गौरतलब है कि यह इंटीग्रेटेड CA प्लांटेशन "पोड़ी  बचरा' परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में कराया जा रहा है, जिसके लिए वन विभाग को भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या इतने बड़े बजट के बाद भी वन विभाग इसी तरह बिना फेंसिंग, बिना पानी और घटिया तैयारियों के साथ प्लांटेशन का काम पूरा करेगा? ऐसे में निष्पक्ष जांच होने पर ही कागजी दावों और जमीनी हकीकत का सच सामने आ सकेगा।

भारतीय पनिका समाज जिला कोरिया की जिला स्तरीय बैठक संपन्न हुआ


कोरिया/भारतीय पनिका समाज जिला कोरिया छत्तीसगढ़ की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन सामाजिक भवन खोड़री,बैकुंठपुर में दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राजाराम जांता ने की। बैठक में जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी,विकासखंड के पदाधिकारी एवं विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्तरीय बैठक अमरकंटक एवं बिलासपुर की रिपोर्टिंग,शहीद दयाल पनिका का शहादत दिवस मनाए जाने,सामाजिक नियमावली बनाए जाने,बैठक में अनुपस्थित पदाधिकारियों की समीक्षा तथा रिक्त पदों की पूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शहीद दयाल पनिका का शहादत दिवस 20 सितंबर 2026 को बिशुनपुर चर्चा ब्लॉक के शिवपुर चर्चा इकाई में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर आवश्यक तैयारियों एवं जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की गई।

इसी क्रम में समाज के लिए सामाजिक नियमावली तैयार किए जाने हेतु 11 सदस्यों के दल का गठन किया गया। गठित दल द्वारा जन्म संस्कार नियमावली,विवाह संस्कार नियमावली, मृत्यु संस्कार नियमावली एवं अन्य सामाजिक नियमावली के संबंध में आवश्यक विचार-विमर्श कर नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बैठक में संगठन को मजबूत करने,समाज में आपसी एकता एवं समन्वय बढ़ाने तथा सामाजिक गतिविधियों को व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया। पदाधिकारियों ने समाजहित में सक्रिय सहभागिता एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया।

अंत में जिला अध्यक्ष राजाराम जांताने उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए समाज की एकता,संगठनात्मक मजबूती एवं सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया,और सभा का समाप्ति कि घोषणा किए!

राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान से सम्मानित हुए रनई के डॉ. आलोक तिवारी मानद पीएचडी के बाद एक और बड़ी उपलब्धि, कोरिया जिले का बढ़ाया गौरव

 


बैकुंठपुर/रनई। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले और ग्राम रनई के लिए एक बार फिर गौरव का क्षण आया है। ग्राम रनई निवासी ज्योतिषाचार्य डॉ. आलोक तिवारी (मनीष) को ज्योतिष की प्राचीन एवं वैदिक विद्या के क्षेत्र में उनके ज्ञान, ज्योतिषीय विद्वता, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, मानव सेवा और समाज में उल्लेखनीय योगदान के लिए “राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया है।

बताया गया कि 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सेवाप्रीत फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा डॉ. आलोक तिवारी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के बाद उनके गृह ग्राम रनई सहित पूरे कोरिया जिले में हर्ष का माहौल है।

मानद पीएचडी के बाद मिली दूसरी बड़ी उपलब्धि

डॉ. आलोक तिवारी को इससे पहले 29 जून 2026 को ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में उनके अनुभव और शोध के आधार पर Honorary Doctorate (मानद पीएचडी) की उपाधि प्राप्त हुई थी। इसके बाद वे “डॉ. आलोक तिवारी” के नाम से जाने जाने लगे। अब राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान मिलने के साथ ही उनके खाते में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।

डॉ. तिवारी ने अपनी दोनों उपलब्धियों का श्रेय अपने गुरुदेव श्री अन्तरिक्ष शुक्ला (अयोध्या) को दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के बिना इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था। उनके लिए गुरुदेव का मार्गदर्शन सदैव महत्वपूर्ण रहा है।


छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर, विदेशों तक पहचान

डॉ. आलोक तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम रनई के शासकीय विद्यालय से हुई। एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अपने परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और ज्योतिष के प्रति समर्पण के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। बताया जाता है कि ज्योतिष के क्षेत्र में उनके कार्य और अनुभव को देश के बाहर भी पहचान मिली है।उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और उचित मार्गदर्शन के साथ व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

यूट्यूब के माध्यम से निःशुल्क दे रहे ज्योतिष की शिक्षा

डॉ. आलोक तिवारी “Alok Tiwari ASTROLOGER” नामक यूट्यूब चैनल के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र की निःशुल्क शिक्षा भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि ज्योतिष जैसी प्राचीन वैदिक विद्या का अधिक से अधिक विस्तार होना चाहिए और इसी उद्देश्य से वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।

गुरु ने कहा—“यह मेरे लिए भी गौरव का क्षण”

डॉ. आलोक तिवारी के गुरुदेव श्री अन्तरिक्ष शुक्ला से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि किसी गुरु के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती कि उसका शिष्य कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करे। उन्होंने कहा कि डॉ. आलोक तिवारी की उपलब्धि उनके लिए भी गौरव का विषय है।गुरुदेव ने डॉ. तिवारी को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे इसी तरह आगे बढ़ते रहें और अपने ज्ञान के माध्यम से मानव कल्याण के लिए कार्य करते रहें।

बचपन के मित्रों में भी खुशी की लहर

डॉ. आलोक तिवारी के बचपन के मित्र शशि प्रकाश जायसवाल ने उनकी उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जिस मित्र के साथ बचपन में गांव की गलियों और धूल में खेलते थे, आज वही अपनी मेहनत और ज्योतिषीय ज्ञान के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बना रहा है।

उन्होंने कहा कि डॉ. तिवारी की उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि ग्राम रनई के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उनकी इस सफलता से ग्रामवासियों में खुशी की लहर है। उन्होंने अपने बचपन के मित्र को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुगूम बारी CA प्लांटेशन में मजदूरों का दर्द: ₹20 में 2×2 फीट का गड्ढा, मजदूर बोले—इतनी दर में तो मेहनत भी नहीं निकल रही!

बारिश के बीच काम बंद, पथरीली-मुरम जमीन ने बढ़ाई मुश्किलें; मजदूरी दर को लेकर वन विभाग घेरे में



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत मुगम बारी में CA प्लांटेशन के तहत चल रहा गड्ढा खुदाई का कार्य फिलहाल बंद है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान मौके पर मौजूद कुछ मजदूरों ने काम बंद होने की वजह और अपनी परेशानियां साझा कीं। मजदूरों के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि 2×2 फीट का एक गड्ढा खोदने के लिए  ₹20 की दर से भुगतान किया जाएगा। मजदूरों का कहना है कि जमीन मुरम और पथरीली होने के कारण इतनी कम दर में काम करना उनके लिए नुकसान का सौदा बन रहा है।

एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पा रहा

मजदूरों ने बताया कि गड्ढे का आकार 2×2 फीट रखा गया है, लेकिन मौके की जमीन सामान्य मिट्टी वाली नहीं है। कई जगह मुरम और पत्थर निकलने के कारण एक गड्ढा तैयार करने में काफी मेहनत लग रही है। मजदूरों का कहना है कि एक मजदूर दिनभर मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से 10 गड्ढे तक भी नहीं खोद पा रहा है। ऐसे में ₹20 प्रति गड्ढे की दर से मिलने वाली मजदूरी उनके लिए पर्याप्त नहीं बैठ रही है।मजदूरों की मांग है कि उन्हें विभाग द्वारा निर्धारित वास्तविक मजदूरी दर के अनुसार भुगतान किया जाए, ताकि मेहनत के मुताबिक मजदूरी मिल सके।


मजदूरों का सवाल—मेहनत इतनी, मजदूरी इतनी कम क्यों?

मजदूरों की परेशानी सिर्फ काम की कठिनाई तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि गड्ढा खोदने में अपेक्षा से कहीं ज्यादा मेहनत लग रही है और जमीन भी पथरीली है, तो ऐसी स्थिति में तय दर पर काम करना उनके लिए घाटे का सौदा है। इसी वजह से मजदूरों ने फिलहाल काम बंद कर दिया है।

यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या गड्ढा खुदाई की दर जमीन की वास्तविक स्थिति और निर्धारित मजदूरी मानकों को ध्यान में रखकर तय की गई है? अगर मजदूरों को निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान की बात कर कार्य कराया जा रहा है तो इसकी जांच जरूरी है, और यदि ₹20 की दर ही स्वीकृत है तो इसकी गणना और आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए।



मौके पर तैयारी अधूरी, फिर बारिश में गड्ढे क्यों?

गौरतलब है कि CA प्लांटेशन का उद्देश्य पौधरोपण के माध्यम से वन क्षेत्र की भरपाई करना है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान प्लांटेशन स्थल पर कई कमियां नजर आई। बताया गया कि कई स्थानों पर जमीन की ढंग से सफाई नहीं हुई है, सिंचाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है,इसके अलावा फेंसिंग की व्यवस्था भी नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में जब प्लांटेशन की जमीन की पूरी तैयारी और पौधों के संरक्षण की व्यवस्था पर ही सवाल हैं, तब बारिश के बीच गड्ढा खुदाई कराने का फैसला चर्चा में आना स्वाभाविक है।

CA के नाम पर काम, लेकिन मजदूरों के हक का क्या?

मजदूरों का कहना है कि वे काम करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि जिस दर से मजदूरी निर्धारित की गई है, उसी के अनुसार उन्हें भुगतान मिले और कठिन जमीन में काम करने की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।अगर मजदूरों की बात सही है और एक मजदूर पूरे दिन में मुश्किल से 10 गड्ढे खोद पा रहा है, तो ₹20 प्रति गड्ढे के हिसाब से उसकी दैनिक कमाई बेहद कम रह जाती है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मजदूरी की दर किस आधार पर तय की गई और क्या यह निर्धारित मजदूरी मानकों के अनुरूप है?



वन विभाग के रिकॉर्ड से खुल सकता है पूरा मामला

मुगम बारी CA प्लांटेशन में मजदूरों को दिए जाने वाली दर की वास्तविक तस्वीर कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका मस्टर रोल से सामने आ सकती है। यदि रिकॉर्ड में एक दर है और मजदूरों को दूसरी दर बताई जा रही है, तो यह गंभीर विषय होगा।वहीं, यदि वन विभाग के अनुसार  ₹20 प्रति गड्ढा ही स्वीकृत दर है, तो विभाग को यह भी बताना चाहिए कि 2×2 फीट के गड्ढे के लिए यह दर किस स्वीकृत लागत/मापदंड के आधार पर तय की गई है और मजदूरों की वास्तविक मजदूरी कैसे सुनिश्चित की जा रही है।

डाका किस पर—सरकारी योजना पर या मजदूर की मेहनत पर?

CA प्लांटेशन के नाम पर सरकारी राशि खर्च होती है, लेकिन उस काम की सबसे पहली कड़ी मजदूर होता है। यदि वही मजदूर अपनी मेहनत के उचित भुगतान के लिए काम बंद करने को मजबूर हो जाए, तो यह सिर्फ मजदूरी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि मुगम बारी में एक तरफ बारिश के बीच गड्ढा खुदाई, दूसरी तरफ पथरीली-मुरम जमीन, अधूरी सफाई, सिंचाई और फेंसिंग की कमी तथा ऊपर से मजदूरों की कम दर को लेकर नाराजगी—इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए पूरे CA प्लांटेशन की स्वीकृति से लेकर गड्ढा खुदाई, मजदूरी भुगतान दर, पौधरोपण के बाद पौधों के संरक्षण तक की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। 


फिलहाल मुंगुम बारी में CA प्लांटेशन कार्य बंद है, मजदूरों को 25रूपये प्रति गड्ढा देने कहा गया है, वास्तविक दर पूछना पड़ेगा,गड्ढा खुदाई का कार्य हाजरी में है या ठेका में इसकी स्पष्ट जानकारी मुझे नहीं मालूम।

संतोष तिवारी,वन परिक्षेत्र अधिकारी बैकुंठपुर 

जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में कायाकल्प राज्य स्तरीय टीम द्वारा निरीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न


कोरिया,बैकुंठपुर/जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में आज कायाकल्प अभियान अंतर्गत राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम द्वारा अस्पताल का विस्तृत मूल्यांकन एवं निरीक्षण किया गया। राज्य स्तरीय टीम के जिला अस्पताल आगमन पर अस्पताल प्रबंधन एवं समस्त स्टाफ द्वारा टीम का स्वागत किया गया।

कायाकल्प मूल्यांकन हेतु राज्य स्तरीय टीम में डॉ. टी. के. टोंडर, उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं; डॉ. नेतराम बेक, उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं; श्री आनंद साहू, कार्यक्रम प्रबंधक, एनएचएम; श्री महेश सिंह, राज्य सलाहकार, एनएचएम; श्री आसिम एक्का, संभागीय सलाहकार, एनएचएम तथा डॉ. उरया नाग, HSO-WHO रायपुर शामिल रहे।


निरीक्षण कार्यक्रम की शुरुआत अस्पताल की कार्यप्रणाली एवं कायाकल्प अभियान के अंतर्गत की गई तैयारियों से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण (Presentation) से हुई, जिसे हॉस्पिटल कंसल्टेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतीकरण में अस्पताल में स्वच्छता एवं हाइजीन, संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, शौचालय व्यवस्था, अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल वातावरण, अग्नि सुरक्षा, रिकॉर्ड एवं दस्तावेज संधारण तथा गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।


इसके पश्चात राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम द्वारा अस्पताल के विभिन्न विभागों, वार्डों एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्वच्छता एवं सैनिटेशन, इंफेक्शन प्रिवेंशन एवं कंट्रोल, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाएं, दवा एवं उपकरणों का रखरखाव, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, जल एवं विद्युत व्यवस्था, अस्पताल परिसर का सौंदर्यीकरण, हरित क्षेत्र, रिकॉर्ड संधारण तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुपालन का बारीकी से अवलोकन किया गया।


इस अवसर पर CMHO डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल, RMO डॉ. कार्तिकेय सिंह, BMO डॉ. अनित बक्सला (पोड़ी बचरा) सहित समस्त वार्ड प्रभारी, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम के निरीक्षण में आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया।

कायाकल्प मूल्यांकन के दौरान जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वच्छ, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को टीम के समक्ष प्रदर्शित किया गया। अस्पताल परिसर में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, अग्नि सुरक्षा, मरीज सुविधाओं एवं गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए गए विभिन्न कार्यों का भी अवलोकन किया गया।

अस्पताल प्रबंधन एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों के समन्वित प्रयास, सक्रिय सहभागिता एवं टीम भावना से कायाकल्प राज्य स्तरीय मूल्यांकन कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।