बारिश के बीच काम बंद, पथरीली-मुरम जमीन ने बढ़ाई मुश्किलें; मजदूरी दर को लेकर वन विभाग घेरे में
एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पा रहा
मजदूरों ने बताया कि गड्ढे का आकार 2×2 फीट रखा गया है, लेकिन मौके की जमीन सामान्य मिट्टी वाली नहीं है। कई जगह मुरम और पत्थर निकलने के कारण एक गड्ढा तैयार करने में काफी मेहनत लग रही है। मजदूरों का कहना है कि एक मजदूर दिनभर मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से 10 गड्ढे तक भी नहीं खोद पा रहा है। ऐसे में ₹20 प्रति गड्ढे की दर से मिलने वाली मजदूरी उनके लिए पर्याप्त नहीं बैठ रही है।मजदूरों की मांग है कि उन्हें विभाग द्वारा निर्धारित वास्तविक मजदूरी दर के अनुसार भुगतान किया जाए, ताकि मेहनत के मुताबिक मजदूरी मिल सके।
मजदूरों का सवाल—मेहनत इतनी, मजदूरी इतनी कम क्यों?
मजदूरों की परेशानी सिर्फ काम की कठिनाई तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि गड्ढा खोदने में अपेक्षा से कहीं ज्यादा मेहनत लग रही है और जमीन भी पथरीली है, तो ऐसी स्थिति में तय दर पर काम करना उनके लिए घाटे का सौदा है। इसी वजह से मजदूरों ने फिलहाल काम बंद कर दिया है।
यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या गड्ढा खुदाई की दर जमीन की वास्तविक स्थिति और निर्धारित मजदूरी मानकों को ध्यान में रखकर तय की गई है? अगर मजदूरों को निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान की बात कर कार्य कराया जा रहा है तो इसकी जांच जरूरी है, और यदि ₹20 की दर ही स्वीकृत है तो इसकी गणना और आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए।
मौके पर तैयारी अधूरी, फिर बारिश में गड्ढे क्यों?
गौरतलब है कि CA प्लांटेशन का उद्देश्य पौधरोपण के माध्यम से वन क्षेत्र की भरपाई करना है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान प्लांटेशन स्थल पर कई कमियां नजर आई। बताया गया कि कई स्थानों पर जमीन की ढंग से सफाई नहीं हुई है, सिंचाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है,इसके अलावा फेंसिंग की व्यवस्था भी नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में जब प्लांटेशन की जमीन की पूरी तैयारी और पौधों के संरक्षण की व्यवस्था पर ही सवाल हैं, तब बारिश के बीच गड्ढा खुदाई कराने का फैसला चर्चा में आना स्वाभाविक है।
CA के नाम पर काम, लेकिन मजदूरों के हक का क्या?
मजदूरों का कहना है कि वे काम करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि जिस दर से मजदूरी निर्धारित की गई है, उसी के अनुसार उन्हें भुगतान मिले और कठिन जमीन में काम करने की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।अगर मजदूरों की बात सही है और एक मजदूर पूरे दिन में मुश्किल से 10 गड्ढे खोद पा रहा है, तो ₹20 प्रति गड्ढे के हिसाब से उसकी दैनिक कमाई बेहद कम रह जाती है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मजदूरी की दर किस आधार पर तय की गई और क्या यह निर्धारित मजदूरी मानकों के अनुरूप है?
वन विभाग के रिकॉर्ड से खुल सकता है पूरा मामला
मुगम बारी CA प्लांटेशन में मजदूरों को दिए जाने वाली दर की वास्तविक तस्वीर कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका मस्टर रोल से सामने आ सकती है। यदि रिकॉर्ड में एक दर है और मजदूरों को दूसरी दर बताई जा रही है, तो यह गंभीर विषय होगा।वहीं, यदि वन विभाग के अनुसार ₹20 प्रति गड्ढा ही स्वीकृत दर है, तो विभाग को यह भी बताना चाहिए कि 2×2 फीट के गड्ढे के लिए यह दर किस स्वीकृत लागत/मापदंड के आधार पर तय की गई है और मजदूरों की वास्तविक मजदूरी कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
डाका किस पर—सरकारी योजना पर या मजदूर की मेहनत पर?
CA प्लांटेशन के नाम पर सरकारी राशि खर्च होती है, लेकिन उस काम की सबसे पहली कड़ी मजदूर होता है। यदि वही मजदूर अपनी मेहनत के उचित भुगतान के लिए काम बंद करने को मजबूर हो जाए, तो यह सिर्फ मजदूरी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि मुगम बारी में एक तरफ बारिश के बीच गड्ढा खुदाई, दूसरी तरफ पथरीली-मुरम जमीन, अधूरी सफाई, सिंचाई और फेंसिंग की कमी तथा ऊपर से मजदूरों की कम दर को लेकर नाराजगी—इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए पूरे CA प्लांटेशन की स्वीकृति से लेकर गड्ढा खुदाई, मजदूरी भुगतान दर, पौधरोपण के बाद पौधों के संरक्षण तक की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है।
फिलहाल मुंगुम बारी में CA प्लांटेशन कार्य बंद है, मजदूरों को 25रूपये प्रति गड्ढा देने कहा गया है, वास्तविक दर पूछना पड़ेगा,गड्ढा खुदाई का कार्य हाजरी में है या ठेका में इसकी स्पष्ट जानकारी मुझे नहीं मालूम।
संतोष तिवारी,वन परिक्षेत्र अधिकारी बैकुंठपुर













0 Comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.