न नियमों का खौफ, न छुट्टी की परवाह: संडे को भी वन मंडल में 'हाड़तोड़ मेहनत' कर रहे रिटायर्ड मानचित्रकार पटेल; पूछने पर साधी चुप्पी!




बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में नियमों, कायदों और शासकीय व्यवस्था का जिस तरह से मखौल उड़ाया जा रहा है, वह अब हास्यास्पद और बेहद संदिग्ध मोड़ पर पहुँच चुका है। करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल की निष्ठा और हाड़तोड़ मेहनत का आलम यह है कि सामान्य कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में भी उनका कार्यालय प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सेवामुक्त सी.पी. पटेल छुट्टियों के दिन भी दफ्तर में बैठकर शासकीय  फाइलें खंगालते देखे जा रहे हैं। जब उनसे इस अनधिकृत उपस्थिति और अवकाश के दिन भी दफ्तर में काम करने की वजह पूछी गई, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

पूछने पर साधी चुप्पी: आखिर किस आश में दी जा रही 'निःशुल्क' सेवा?

जब रिटायर्ड मानचित्रकार से पूछा गया कि बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति या सरकारी आदेश के वे अवकाश के दिनों में दफ्तर खोलकर किस हैसियत से काम कर रहे हैं, तो वे  कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके। यह चुप्पी इस बात को पुख्ता करती है कि दफ्तर में उनकी मौजूदगी पूरी तरह अनधिकृत और गैर-कानूनी है।

बिना किसी स्वार्थ के इतनी 'मेहनत' संभव नहीं:

स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी आश या मजबूरी है कि रिटायरमेंट के बाद भी शनिवार-रविवार को दफ्तर में हाजिरी लगानी पड़ रही है? क्या वर्षों से कोरिया वन मंडल पर जमा कब्जा अब करोड़ों के प्लांटेशन प्रोजेक्ट्स में किसी बड़े लेन-देन के लिए इस्तेमाल हो रहा है?



शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ की गंभीर आशंका

छुट्टी के दिन जब कार्यालय में कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं होता, तब अकेले बैठकर फाइलों का निपटारा करना किसी बड़े फेरबदल या साक्ष्यों को ठिकाने लगाने की साजिश की ओर इशारा करता है।

एक तरफ रिटायर्ड कर्मचारी से सवाल पूछने पर निरुत्तर हो जाता है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार आला अधिकारी फोन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। अधिकारियों और पूर्व कर्मचारी का यह मिला-जुला मौन इस बात का पुख्ता सबूत है कि कोरिया वन मंडल में 'अमर' कुर्सी का यह खेल ऊपर तक फैले किसी संरक्षण के बिना संभव नहीं है।



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