कोरिया में चर्चाओं के केंद्र में परलकोट वाले साहब, मोबाइल ढूंढने में बहाया था पानी, अब PDS की चौखट पर टिकीं नजरें!



बैकुंठपुर /छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में अपनी अनूठी कार्यशैली और 'जल निकासी' के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले चर्चित फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। कांकेर के पखांजूर स्थित परलकोट जलाशय में अपने महंगे आईफोन को तलाशने के लिए लाखों लीटर पानी बहाकर रातों-रात स्टार बने यह साहब अब कोरिया जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

खास बात यह है कि कोरिया जैसे  जिले में इस समय महज दो फूड इंस्पेक्टरों के कंधों पर पूरे जिले की राशन व्यवस्था का दारोमदार है। एक ओर जहां जिले की उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों का राशन गायब होने, वितरण में भारी गड़बड़ी और कालाबाजारी की शिकायतें आम जनता की चीख बनकर गूंज रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन 'हाई-प्रोफाइल' साहब की मौजूदगी ने आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है।

आईफोन के लिए बहा दिया था 41 लाख लीटर पानी

मई 2023 का वह वाकया किसे याद नहीं होगा, जब कांकेर के परलकोट जलाशय में सेल्फी लेते वक्त साहब का मोबाइल पानी में जा गिरा था। उसे बाहर निकालने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए डीजल पंपों के जरिए 41 लाख लीटर पानी बर्बाद कर दिया गया था। उस दौरान प्रशासन और जल संसाधन विभाग को पानी की बर्बादी पर लीपापोती करने में पसीने छूट गए थे। अब जबकि साहब कोरिया जिले में डेरा डाले हुए हैं, तो स्थानीय स्तर पर यह सवाल लाजिमी है कि क्या उनकी प्रशासनिक तत्परता उतनी ही तेज है जितनी उस वक्त आईफोन को खोजने में दिखाई दी थी?

कोरिया में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की चुनौतियाँ प्रशासनिक कसावट के बीच राशन वितरण में सुधार की दरकार

कोरिया जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करना और राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना हमेशा से एक बड़ा प्रशासनिक  दायित्व रहा है। वर्तमान में जिले में सीमित विभागीय अमले के भरोसे पूरी आपूर्ति व्यवस्था चल रही है। एक ओर जहाँ राशन दुकानों में अनियमितताओं और वितरण प्रक्रिया को दुरुस्त करने की माँगे उठ रही हैं, वहीं दूसरी ओर हाल की समीक्षा  बैठक में मिली हिदायतों के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

जानकारी के मुताबिक जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। गरीबों के हिस्से का चावल समय पर न पहुंचना,और संचालकों की मनमानी यहां की आम समस्या बन चुकी है।ऐसे में क्या आईफोन वाले साहब ने कभी इतनी ही तत्परता और दिन-रात एक करने की जिद कोरिया जिले की राशन दुकानों की जांच में दिखाई है? गरीबों के निवाले पर डाका डालने वालों पर वैसी ही सख्ती बरती जाएगी जैसे उस समय पंप ऑपरेटरों पर दबाव बनाकर पानी खाली कराने में दिखाई गई थी।

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