खौफ से बेखौफ तक का सफर: कभी वन मंडल में छुपने वाले रिटायर्ड सीपी पटेल, अब रात में भी कर रहे बेखौफ काम!



बैकुण्ठपुर/कोरिया वन मंडल में नियमों  का मखौल किस कदर उड़ाया जा रहा है, इसकी बानगी देखनी हो तो रात के वक्त वन मंडल कार्यालय के मानचित्रकार शाखा का चक्कर लगा लीजिए। करीब दो महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व मानचित्रकार  सीपी पटेल आज भी दफ्तर में डटे हुए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि अपने पूरे सेवाकाल के दौरान ऐसा कौन-सा अति-महत्वपूर्ण कार्य रह गया था, जिसे निपटाने के लिए अब उम्र के इस पड़ाव पर सीपी पटेल को छुट्टी के दिनों में भी रात आठ-आठ बजे तक हाड़-तोड़ मेहनत करनी पड़ रही है?

सूत्रों के मुताबिक सेवानिवृत्त होने के करीब दो माह बाद भी सीपी पटेल ने  अपना प्रभार  किसी  कर्मचारी को नहीं सौंपा है,इसकी पुष्टि हम नहीं करते है लेकिन यह दावा सच हुआ तो क्या कोरिया वन मंडल में छत्तीसगढ़ शासन के नियमों से इतर कोई नया विभागीय कानून लागू  है,जिससे कि किसी रिटायर्ड कर्मचारी को न तो कार्यभार से मुक्त किया जा रहा है और न ही दफ्तर की कुर्सियों से उनका मोह भंग हो रहा है?

DFO साहब! उम्र के इस पड़ाव पर तो तरस खाइए


 रिएटायर्ड मानचित्रकार की उम्र और  सेहत पर कम से कम इंसानियत के नाते ही सही,डीएफओ साहब को थोड़ा तरस खाना चाहिए। जिस उम्र में लोग पेंशन और आराम के हकदार होते हैं, उस उम्र में एक सेवानिवृत्त व्यक्ति से देर रात तक काम लिया जा रहा है। आख़िर ऐसी क्या  रहस्यमयी मजबूरी है, जिसके कारण डीएफओ साहब उन्हें दफ्तर के भीतर रात में भी कार्य करने की खुली छूट दे रखे है।

SECL चिरमिरी प्रकरण की पुरानी यादें: जब डर के मारे भाग खड़े होते थे पटेल


इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीपी पटेल का एक पुराना कारनामा फिर से चर्चा में आ गया है। कुछ वर्ष पूर्व एसईसीएल क्षेत्र चिरमिरी क्षेत्र से जुड़े एक मामले में बुरी तरह घिर गए थे। सूत्र बताते हैं कि उस समय सीपी पटेल की रातों की नींद उड़ी हुई थी और आलम यह था कि एक  व्यक्ति की आहट मात्र से वह वन मंडल दफ्तर छोड़कर भाग खड़े होते थे।खैर,वक्त का पहिया घूमा उस मामले पर क्या लीपापोती हुई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन आज वही सीपी पटेल डीएफओ की छत्रछाया में देर रात तक वन मंडल कार्यालय में बेखौफ  जमे हैं।

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