दुर्गा पूजा पंडालों व जगराता में पहुँचे अशोक जायसवाल, माँ दुर्गा के दर्शन कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की माँगी दुआएँ



कोरिया/बैकुंठपुर:शारदीय नवरात्रि की पावन और पवित्र तिथियों के अवसर पर कोरिया जिले के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में भक्ति और उल्लास का अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष व समाज सेवक अशोक जायसवाल ने जिले के कई प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर जगतजननी माँ दुर्गा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर क्षेत्रवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।

शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर जहाँ पंडालों में रंग-बिरंगी जगमगाती रोशनियाँ, गूँजते 'जय माता दी' के जयकारे और सड़कों पर उमड़े भक्ति के विशाल जनसैलाब ने हर किसी का मन मोह लिया। हर पंडाल की अनूठी छटा और श्रद्धालुओं का उत्साह वातावरण को अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा और शांति से भर देने वाला था। इस दौरान श्री जायसवाल  ने समस्त आयोजकों और क्षेत्रवासियों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इससे पूर्व, जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित भव्य जगराता कार्यक्रमों में भी अशोक जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जिसमें दुर्गा पूजा आयोजन समिति, खरवट चेरवापारा, बैकुंठपुर शामिल रहा। यहां सरगुजा के प्रसिद्ध जसगीत सम्राट लोक गायक एम.डी. महंत एवं लोक गायिका तारा देवांगन द्वारा अपनी शानदार प्रस्तुति दी गई। उनके भक्ति गीतों ने पंडाल में उपस्थित सभी भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

पूर्व नगर पालिका  अध्यक्ष के विभिन्न आयोजनों में पहुँचने पर आयोजन समितियों के सदस्यों और स्थानीय युवाओं द्वारा उनका आत्मीय और जोरदार स्वागत किया गया।कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में अशोक जायसवाल ने कहा कि "सच्ची भक्ति समाज को आपस में जोड़ती है। दुर्गा पूजा का यह महापर्व हमें एकता, सद्भाव और सेवा का अनमोल संदेश देता है।" उन्होंने माता शेरावाली से प्रार्थना की कि वे समूचे प्रदेशवासियों और क्षेत्रवासियों को सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान प्रदान करें।

रायपुर : सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर शासन गंभीर शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर पीडब्लूडी के 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब

 

 


रायपुर,17 अक्टूबर 2026/नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।


सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है।


विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी श्री अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता  केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता  घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता  रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता  प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 


इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता  डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता श्रीमती अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता  महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।


राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए। 


लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

वन विभाग में ठेका पद्धति पर छिड़ा संग्राम: क्या बढ़ेगा भ्रष्टाचार या आएगी पारदर्शिता? कर्मचारियों ने खोला मोर्चा


कोरिया/छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने जंगलों और वन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही ठेका प्रथा तथा मैदानी कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे द्वारा हस्ताक्षरित मांग पत्र में शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए वन विभाग के मैदानी अमले के हितों की रक्षा की अपील की गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के वन कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।  

ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि,जंगलों के भीतर और बाहर होने वाले समस्त निर्माण एवं वानिकी कार्यों (जैसे रपटा निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, सीसी रोड, मुरम रोड, वन मार्गों का रखरखाव, जल संरक्षण कार्य) में ठेका पद्धति को तत्काल बंद किया जाए। ये सभी कार्य केवल वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के माध्यम से ही कराए जाएं। और यदि शासन किसी कार्य को ठेका पद्धति से कराता भी है, तो उसकी गुणवत्ता, माप, मूल्यांकन और तकनीकी मानकों की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार और सक्षम अधिकारियों की हो। किसी भी गड़बड़ी या गुणवत्ता में कमी के लिए वनरक्षक, वनपाल व अन्य लिपिकीय कर्मचारियों को बलि का बकरा न बनाया जाए।  

संघ ने यह भी मांग की है कि,मैदानी कर्मचारियों के पारंपरिक कार्यक्षेत्र और अधिकारों को सीमित करने या उन्हें विभागीय कार्यों से अलग-थलग करने संबंधी निर्णयों पर रोक लगाई जाए। संघ के अनुसार, मैदानी अमला वन विभाग की रीढ़ है, इसलिए उन्हें आवश्यक संसाधन और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।संघ का मानना  है कि, विभागीय कार्यों को मैदानी अमले से कराने पर न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर वनवासियों के लिए रोजगार के अवसर भी सुरक्षित रहेंगे।  

बता दें कि, वन विभाग में जंगलों के भीतर और बाहर होने वाले विकास व निर्माण कार्यों के लिए लागू 'ठेका पद्धति' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां शासन इसे आधुनिकता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधारने का जरिया मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने इसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला और मैदानी अमले के अधिकारों पर डाका डालने वाला फैसला करार देते हुए चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दे दी है। 


वन विभाग का अनोखा जादू: ठग्गांव में 10 करोड़ों खर्च करके उगाए 'कागज़ी पौधे', धरातल पर सिफ़र, भुगतान में अव्वल!



बैकुंठपुर/मनेंद्रगढ़:सरगुजा वन वृत्त के मनेंद्रगढ़ वनमंडल अंतर्गत खड़गवां परिक्षेत्र के ठग्गांव में प्रतिपूरक वृक्षारोपण के नाम पर सरकारी राजस्व की बंदरबांट का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की 'परसा ओपन कास्ट कोल माइंस' परियोजना के एवज में मिले 10 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को ठिकाने लगाने के लिए जो चक्रव्यूह रचा गया, अब उसकी परतें आधिकारिक  ई-ग्रीनवॉच पोर्टल के आंकड़ों से खुलने लगी हैं।  प्लांटेशन के नाम पर इस  खेल में तत्कालीन प्रशिक्षु एसडीओ रहे मयंक सिंह और कार्य सत्यापन अधिकारी सह एसडीओ अवधेश सिंह की कार्यशैली और मार्च तक कराए गए भुगतानों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पोर्टल के पन्नों पर ₹10.17 करोड़ का आंकड़ा

विभागीय ई-ग्रीनवॉच पोर्टल पर दर्ज आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, ठग्गांव  के सात अलग-अलग पैचों में कुल 201.40 हेक्टेयर रकबे पर सिंचित वृक्षारोपण प्रस्तावित किया गया है। इन कार्यों के लिए स्वीकृत मदवार बजट के आंकड़े इस प्रकार हैं:

 पैच A (15.86 ha): ₹93,80,100.00 स्वीकृत लागत।  

पैच B (22.87 ha): ₹1,23,37,300.00 स्वीकृत लागत।  

पैच C (35.50 ha): ₹1,88,77,900.00 स्वीकृत लागत।  

पैच D (37.78 ha): ₹1,92,36,900.00 स्वीकृत लागत।  

पैच E (54.27 ha): ₹2,94,82,500.00 स्वीकृत लागत (सबसे बड़ा पैच)।  

पैच F (22.43 ha): ₹1,47,57,200.00 स्वीकृत लागत।  

पैच G (12.69 ha): ₹76,57,000.00 स्वीकृत लागत।  

कुल स्वीकृत बजट: ₹10,17,28,900/- (दस करोड़ सत्रह लाख अट्ठाईस हजार नौ सौ रुपये)

कुल रोपे जाने वाले पौधे: 2,01,400 पौध सामग्री (सागौन, बांस, आमला, जामुन आदि)।

मार्च के भुगतानों पर आबोहवा गर्म: मयंक और अवधेश की जोड़ी पर सवाल

सरकारी नियमों के मुताबिक इरिगेटेड प्लांटेशन के तहत फेंसिंग, बोरवेल खनन, ड्रिप/सिंचाई व्यवस्था, मृदा परीक्षण और गड्ढा खुदाई का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन होना अनिवार्य है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि वित्तीय वर्ष के समापन यानी मार्च महीने में बजट खपाने की ऐसी जल्दीबाज़ी दिखाई गई कि नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।  

मैदानी स्तर पर प्रशिक्षु रेंजर मयंक सिंह की मॉनिटरिंग और एसडीओ अवधेश सिंह द्वारा किए गए कार्य सत्यापन  को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बिना ज़मीनी मुआयने और बिना गुणवत्ता जांचे, कागजी औपचारिकताओं के दम पर करोड़ों रुपये आहरित कर लिए गए।पोर्टल जहां 10 करोड़ से अधिक की लागत से हरे-भरे सिंचित वनों की तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर  पर तस्वीरे बिल्कुल अलग दास्तान बयां कर रही हैं। धरातल पर न तो कोई सुदृढ़ सिंचाई व्यवस्था दिखती है और न ही सघन फेंसिंग। केवल गड्ढों की खोदाई और नाममात्र के पौधे रोपड़ करके इतिश्री कर ली गई है।  

निष्पक्ष जांच हुई तो नपेंगे कई बड़े चेहरे

इस पूरे प्लांटेशन की यदि उच्चस्तरीय जांच और मार्च महीने में तक जारी हुए मस्टर रोल, वेंडरों के बिलों और जीपीएस कोऑर्डिनेट्स का भौतिक मिलान कराया जाए, तो वन विभाग के भीतर का यह वित्तीय घाटा और बड़ा रूप ले सकता है। देखना होगा कि विभाग इस करोड़ों के संभावित घोटाले पर निष्पक्ष जांच के आदेश देता है या अधिकारियों की यह जुगलबंदी मामले को ठंडे बस्ते में डालने में कामयाब रहती है।

अक्षय ऊर्जा से रोशन हुआ अनिल शर्मा का घर, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से शून्य हुआ बिजली बिल



कोरिया/ देश की उर्जा जरूरतों को विकल्प देने के लिए देश भर में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना लागू की गई है। इसके तहत उपभोक्ताओं को बेहद आसान प्रक्रिया के तहत सौर उर्जा उपकरण स्थापित कर वैकल्पिक उर्जा का माध्यम दिया जा रहा है। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक  अनिल शर्मा ने अपने घर की छत पर प्लांट लगाकर अपने मासिक बिजली बिल को लगभग शून्य कर लिया है। बढ़ती लागत के साथ अब तापीय विद्युत की आपूर्ति ना केवल उपभोक्ता के लिए मंहगी है वरन इस विद्युत का उत्पादन भी कहीं ना कहीं पर्यावरण की चिंता का मुख्य कारण बन रहा है। ऐसे में आज की आवश्यकता है कि हम बिजली के उन स्रोतों की ओर आगे बढ़े जो पर्यावरण के बिल्कुल अनुकूल हों। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना सौर उर्जा एक ऐसा ही शानदार विकल्प बनकर उभर रहा है।  

सूर्यघर योजना के तहत लाभ लेने वाले महलपारा निवासी अनिल शर्मा ने बताया कि उन्होने जानकारी होने पर अपने घर में बिजली की खपत के अनुसार अपने नाम पर तीन किलोवाट का एक संयंत्र लगवाया और फिर बढ़ती जरूरतों के अनुसार उन्होने अपने बेटे के नाम पर भी एक तीन किलो का सोलर प्लांट रूफटाप पर लगवाया है। अब उनके पास हर समय बिजली का एक शानदार स्रोत है।

श्री शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना बेहद शानदार है। इसमें आने वाली लागत का लगभग सत्तर प्रतिशत राशि आसानी से अनुदान के तहत प्राप्त हो जाती है और बैंक से आसान ऋण लेकर इसे अपने घरों की छत पर लगवाया जा सकता है। उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना में केंद्र सरकार से 78 हजार और राज्य सरकार से 30 हजार की सब्सिडी वह प्राप्त कर चुके हैं।

 उन्होंने ने बताया कि उनके घर में कुछ किराएदार भी रहते हैं जिससे बिजली की निरंतर खपत होती रहती हैं। अत्यधिक खपत के कारण बढ़ी हुई दरों से बिजली का मूल्यांकन होता था जिससे पहले बिजली बिल बहुत अधिक आता था लेकिन अब जबसे सोलर रूपटॉप लगा है बिजली बिल लगभग शून्य हो चुका है। उन्होने इस अच्छे और सस्ते उर्जा स्रोत के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देते हुए कहा यह योजना बहुत ही सराहनीय है उन्हे इसका लाभ अच्छे से मिल रहा है।

कोरिया में चर्चाओं के केंद्र में परलकोट वाले साहब, मोबाइल ढूंढने में बहाया था पानी, अब PDS की चौखट पर टिकीं नजरें!



बैकुंठपुर /छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में अपनी अनूठी कार्यशैली और 'जल निकासी' के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले चर्चित फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। कांकेर के पखांजूर स्थित परलकोट जलाशय में अपने महंगे आईफोन को तलाशने के लिए लाखों लीटर पानी बहाकर रातों-रात स्टार बने यह साहब अब कोरिया जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

खास बात यह है कि कोरिया जैसे  जिले में इस समय महज दो फूड इंस्पेक्टरों के कंधों पर पूरे जिले की राशन व्यवस्था का दारोमदार है। एक ओर जहां जिले की उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों का राशन गायब होने, वितरण में भारी गड़बड़ी और कालाबाजारी की शिकायतें आम जनता की चीख बनकर गूंज रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन 'हाई-प्रोफाइल' साहब की मौजूदगी ने आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है।

आईफोन के लिए बहा दिया था 41 लाख लीटर पानी

मई 2023 का वह वाकया किसे याद नहीं होगा, जब कांकेर के परलकोट जलाशय में सेल्फी लेते वक्त साहब का मोबाइल पानी में जा गिरा था। उसे बाहर निकालने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए डीजल पंपों के जरिए 41 लाख लीटर पानी बर्बाद कर दिया गया था। उस दौरान प्रशासन और जल संसाधन विभाग को पानी की बर्बादी पर लीपापोती करने में पसीने छूट गए थे। अब जबकि साहब कोरिया जिले में डेरा डाले हुए हैं, तो स्थानीय स्तर पर यह सवाल लाजिमी है कि क्या उनकी प्रशासनिक तत्परता उतनी ही तेज है जितनी उस वक्त आईफोन को खोजने में दिखाई दी थी?

कोरिया में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की चुनौतियाँ प्रशासनिक कसावट के बीच राशन वितरण में सुधार की दरकार

कोरिया जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करना और राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना हमेशा से एक बड़ा प्रशासनिक  दायित्व रहा है। वर्तमान में जिले में सीमित विभागीय अमले के भरोसे पूरी आपूर्ति व्यवस्था चल रही है। एक ओर जहाँ राशन दुकानों में अनियमितताओं और वितरण प्रक्रिया को दुरुस्त करने की माँगे उठ रही हैं, वहीं दूसरी ओर हाल की समीक्षा  बैठक में मिली हिदायतों के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

जानकारी के मुताबिक जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। गरीबों के हिस्से का चावल समय पर न पहुंचना,और संचालकों की मनमानी यहां की आम समस्या बन चुकी है।ऐसे में क्या आईफोन वाले साहब ने कभी इतनी ही तत्परता और दिन-रात एक करने की जिद कोरिया जिले की राशन दुकानों की जांच में दिखाई है? गरीबों के निवाले पर डाका डालने वालों पर वैसी ही सख्ती बरती जाएगी जैसे उस समय पंप ऑपरेटरों पर दबाव बनाकर पानी खाली कराने में दिखाई गई थी।

कागजों में टेंडर, मैदान में पोल: कोरिया वन मंडल में CA प्लांटेशन के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाता प्रशासनिक सिंडिकेट! • RTI में छिपाए आंकड़े, मजदूरों के पसीने का मोल दबाया... अब बिना कार्यादेश सामग्री खपाने की मची होड़


बैकुंठपुर
/कोरिया वन मंडल के कंपेंसेट्री एफॉरेस्टेशन प्लांटेशन मद से स्वीकृत करोड़ों रुपये के वनीकरण कार्यों में नियमों को ताक पर रखने का खेल अब अपनी सीमाओं को लांघता नजर आ रहा है। चाहे प्लांटेशन में बिना सूचना पट्ट के मजदूरों की दिहाड़ी दर छुपाने का मामला हो, या परसा कोल माइंस की फाइलों पर DFO और रेंजर कार्यालय द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दो अलग-अलग राग अलापने की बात हो|'बोल बच्चन न्यूज' ने हर धांधली की परतें प्रमुखता से खोलने प्रयास किया हैं। अब इसी शृंखला में CA प्लांटेशन की सुरक्षा घेराबंदी को लेकर एक और बड़ा वित्तीय व प्रक्रियात्मक झोल सामने आया है।

टेंडर अभी खुला नहीं, फिर कार्यस्थल पर फेंसिंग पोल

विश्वस्त सूत्रों और मैदानी पड़ताल से मिली जानकारी के अनुसार, कोरिया वन मंडल अंतर्गत CA प्लांटेशन क्षेत्रों की सुरक्षा फेंसिंग के लिए प्रयुक्त होने वाले आरसीसी  पोल की खरीद हेतु शासकीय 'जेम' (GeM) पोर्टल पर अभी टेंडर प्रक्रियाधीन ही है।  नियमों के मुताबिक जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होकर संबंधित फर्म को कार्यादेश जारी न हो जाए, तब तक कार्यस्थल पर किसी भी सामग्री का पहुंचना पूरी तरह गैर-कानूनी और नियम-विरुद्ध है। लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि टेंडर खुलने से पहले ही CA प्लांटेशन स्थलों पर फेंसिंग पोल पहुंचने की कि चर्चा हैं।

विभागीय गलियारों में तैरती खबरों की मानें तो कोरिया वमंडल के किसी पूर्ववर्ती निर्माण अथवा वनीकरण कार्य के लिए  क्रय किए गए फेंसिंग पोल का उपयोग होना शेष रह गया था। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कथित तौर पर मौखिक आदेशों पर उन पुराने पोलों को उठाकर  CA प्लांटेशन स्थल पर शिफ्ट करवाने की बात सामने आ रही है।इस दशा में बड़ा सवाल उठता है कि,स्थानांतरित कराए गए ये आरसीसी पोल मूलतःकिस योजना, किस बीट और किस कक्ष क्रमांक के लिए खरीदे गए थे? स्वीकृत  स्थल पर इनका उपयोग क्यों नहीं हुआ और इन्हें वहां से हटाने संबंधी भौतिक सत्यापन  की विभागीय रिपोर्ट कहाँ है? वहीं  जब CA प्लांटेशन का पृथक से भारी-भरकम बजट स्वीकृत है, जिसमें झाड़ी कटाई से लेकर घेराबंदी तक हर काम की राशि तय है, तो फिर दूसरे मद के सामान को यहाँ खपाने की हड़बड़ी क्यों मचाई जा रही है?

DFO के पूर्व पदस्थापना के दौरान'खास' सप्लायरों का गठजोड़?

सूत्रों का दावा तो यह भी है कि वर्तमान में पदस्थ वनमंडलाधिकारी के पूर्व पदस्थापना क्षेत्र के पसंदीदा सप्लायरों के इशारे पर ही यह सामग्री नियम-विरुद्ध तरीके से कार्यस्थल पर भिजवाई गई है। हालांकि, इस दावे की अंतिम प्रामाणिकता विभागीय जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों से ही तय होगी, लेकिन यदि आगामी टेंडर का आवंटन इत्तेफाक से उसी क्षेत्र या चहेते सप्लायर को हो जाता है, तो इस पूरे पर्दे के पीछे चल रहे सिंडिकेट का भंडाफोड़ खुद-ब-खुद हो जाएगा।

गौरतलब है कि,एक तरफ CA प्लांटेशन में 20और25 रुपये प्रति गड्ढा या 300 रुपये दिहाड़ी का भ्रम फैलाकर मजदूरों के पसीने का मोल छुपाया जा रहा है, दूसरी तरफ अब टेंडर से पहले सामग्री की नियम विरुद्ध सप्लाई ने साबित कर दिया है कि कोरिया वन मंडल में नियमों और वित्तीय पारदर्शिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देखना यह होगा कि इस फॉलो-अप रिपोर्ट के बाद उच्चाधिकारी गहरी नींद से जागते हैं या फिर कागजी लिपा-पोती कर करोड़ों के इस खेल को रफा-दफा कर दिया जाता है।