छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोलकर फाइलों में हेराफेरी का अंदेशा; DFO की चुप्पी से भ्रष्टाचार के संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा!
बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं का जिस बेशर्मी से मखौल उड़ाया जा रहा है, उसने अब एक साधारण प्रशासनिक लापरवाही से बढ़कर एक बड़े 'वित्तीय घोटाले' और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। पूरे सेवाकाल के दौरान एक ही जगह जमे रहकर वन मंडल की जड़ों को खोखला करने वाले सेवानिवृत्त मानचित्रकार सी.पी. पटेल का रिटायरमेंट के महीने भर बाद भी दफ्तर पर कब्जा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आम कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार जैसे शासकीय अवकाश के दिन भी यह सेवामुक्त 'आम इंसान' दफ्तर में बैठकर सरकारी नक्शों और फाइलों को खंगालता पाया जा रहा है।
अब इस पूरे अनधिकृत खेल के पीछे का असली खेल सामने आने लगा है। सूत्रों और स्थानीय जानकार लोगों का दावा है कि सी.पी. पटेल का यह 'पुनर्वसन' केवल किसी सेवा-भाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे वन मंडल में आने वाले करोड़ों रुपये के CA प्लांटेशन प्रोजेक्ट (वृक्षारोपण परियोजनाओं) के भारी-भरकम बजट पर नजर टिके होना माना जा रहा है।
करोड़ों के प्रोजेक्ट्स और नक्शों का 'मास्टरमाइंड': संपत्ति की उच्च स्तरीय जांच की मांग
कोरिया वन मंडल में वन CA प्लांटेशन पोड़ी बचरा में करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत हैं। इन परियोजनाओं का वास्तविक सीमांकन, नक्शा पास कराना और कागजी खानापूर्ति करना मानचित्रकार के हाथ में होता है। आशंका जताई जा रही है कि धरातल पर होने वाले फर्जीवाड़े और कागजी पौधों को सही ठहराने के लिए ही सी.पी. पटेल को रिटायरमेंट के बाद भी अनधिकृत रूप से कुर्सी पर बिठाकर रखा गया है।
अकूत संपत्ति की विजिलेंस/ACB से हो जांच:
एक ही जगह पर दशकों तक बने रहने और अब रिटायरमेंट के बाद भी दफ्तर न छोड़ने की इस जिद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जागरूक नागरिकों और जन प्रतिनिधियों का कहना है कि सी.पी. पटेल के सेवाकाल के दौरान अर्जित की गई संपत्ति की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
शासकीय अवकाश के दिन दफ्तर में एंट्री: साक्ष्य मिटाने की साजिश?
शनिवार को जब दफ्तर पूरी तरह बंद रहता है और कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं होता, तब एक बाहरी व्यक्ति का अकेले बैठकर फाइलें खंगालना इस बात का सीधा संकेत है कि या तो पुराने घोटालों के सबूतों को नष्ट किया जा रहा है या फिर आने वाले करोड़ों के प्रोजेक्ट्स की फाइलें तैयार की जा रही हैं।
DFO की संदिग्ध खामोशी: बाइट देने से कतराते रहे शीर्ष अफसर
इस पूरे गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक भ्रष्टाचार के मामले में जब कोरिया वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी से उनका पक्ष (बाइट) जानने के लिए दूरभाष पर बार-बार संपर्क साधा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह फोन का कोई जवाब नहीं दिया।
मामले का दायरा बड़ा होते देख जब वृत्त स्तर के सबसे बड़े अधिकारी यानी मुख्य वन संरक्षक (CCF) से आधिकारिक बयान लेने का प्रयास किया गया, तो वे भी इस पूरे घालमेल पर कुछ भी कहने से बचते दिखे।
शीर्ष अधिकारियों का यूं अपना मुंह बंद कर लेना और कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना यह साबित करता है कि करोड़ों के इस खेल में तार नीचे से लेकर ऊपर तक जुड़े हो सकते हैं। अगर समय रहते छत्तीसगढ़ का वन मंत्रालय और उच्च स्तरीय जांच एजेंसियां इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लेती हैं, तो कोरिया वन मंडल में सरकारी जमीनों और प्रोजेक्ट्स के नाम पर भारी चूना लगना तय है।


















