कोरिया वन मंडल में 'सुपर DFO' बने रिटायर्ड मानचित्रकार, SECL फाइलों और वनीकरण के नक्शों पर गैर-कानूनी कब्जा!



• बिना किसी जवाबदेही के संवेदनशील एस्टीमेट  निपटारा का अंदेशा

• डीएफओ परदेशी के मौन से और गहराया रहस्य,अवैध रूप से काम लेने के पीछे की क्या है साठगांठ?


कोरिया वन मंडल में नियमों को ताक पर रखकर डीएफओ परदेशी के नाक के नीचे सेवानिवृत्त मानचित्रकार सीपी पटेल की अनधिकृत मौजूदगी का मामला अब और गहराता जा रहा है। कभी एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के भू-अर्जन, वन भूमि डायवर्जन और सीमांकन से जुड़े पेचीदा प्रकरणों में जो रिटायर्ड मानचित्रकार कभी दबाव में दिखे थे, वही सीपी पटेल अब वन मंडल कार्यालय बैकुंठपुर में डीएफओ की सीधी निगरानी में काम निपटाते नजर आ रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, शासकीय सेवा से महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके सीपी पटेल को आज भी दफ्तर की मानचित्रकार शाखा में विशेष तरजीह दी जा रही है। सीए प्लांटेशन  जीपीएस मैपिंग और एसईसीएल खदान क्षेत्र से जुड़े करोड़ों रुपये के प्राक्कलन और अति-संवेदनशील जमीनी फाइलों का निपटारा आज भी वही कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति की शासकीय जवाबदेही शून्य हो चुकी है, उसे संवेदनशील नक्शों और सरकारी अभिलेखों के साथ काम करने की छूट किसके आदेश  आखिर डीएफओ परदेशी ने किसके कहने या किस मजबूरी पर दी है?

डीएफओ परदेशी की लाचारी या मौन सहमति





इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात कोरिया डीएफओ का रवैया है। सेवानिवृत्त कर्मचारी की दफ्तर में रोज की मौजूदगी और फाइलों पर उनके सीधे नियंत्रण को लेकर लगातार उठ रहे मुद्दों के बावजूद डीएफओ ने चुप्पी साध रखी है। वनांचल के जागरूक नागरिकों और वन महकमे के भीतर ही अब यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर ऐसी  डीएफओ की क्या मजबूरी है जिसे  सार्वजनिक नहीं कर पा रहे हैं? क्या पूर्व में हुए एसईसीएल प्रकरणों और वर्तमान में वनीकरण के मामलों में हो रहे अनियमितता के राज छुपाने के लिए ही सीपी पटेल को बैकडोर से दफ्तर में बैठाया गया है।

बता दे कि,नियमों के मुताबिक, किसी भी गैर-अधिकृत या सेवानिवृत्त व्यक्ति द्वारा कार्यालय में शासकीय दस्तावेजों में फेरबदल या प्राक्कलन तैयार करना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। यदि कल को एसईसीएल चिरमिरी प्रकरण या सीए प्लांटेशन के नक्शों में कोई तकनीकी या वित्तीय गड़बड़ी उजागर होती है, तो इसकी जिम्मेदारी  डीएफओ परदेशी पर  तय होगी?

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मांग की है कि वन प्रधान मुख्य संरक्षक इस मामले पर तत्काल हस्तक्षेप करें। वन मंडल कार्यालय कोरिया की मानचित्रकार शाखा की के पिछले लगभग एक माह के रिकॉर्ड्स को जब्त कर सेवानिवृत्त मानचित्रकार सीपी पटेल की अनधिकृत दखलंदाजी पर अविलंब रोक  लगाई जाए।



भारतीय पनिका समाज की जिला स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न,सामाजिक नियमावली,सामाजिक जनगणना एवं सामाजिक भवन के विकास को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय!


कोरिया/भारतीय पनिका समाज,जिला कोरिया छत्तीसगढ़ की जिला स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक दिनांक 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार को सम्पन्न हुई। बैठक में समाज के संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ सामाजिक हित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई तथा सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।


समाज की सामाजिक नियमावली तैयार किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया कि जिले के प्रत्येक ग्राम इकाई समिति स्तर से लिखित प्रस्ताव 01 नवंबर 2026 के पूर्व जिला कार्यकारिणी द्वारा गठित 11 सदस्यीय दल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर सामाजिक नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

सामाजिक जनगणना कराने का निर्णय

समाज के सदस्यों की वास्तविक एवं व्यवस्थित जानकारी संकलित करने के उद्देश्य से सामाजिक जनगणना कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया एवं रूपरेखा आगामी चरण में निर्धारित की जाएगी।

सामाजिक भवन खोड़री के विकास की रणनीति

सामाजिक भवन खोड़री, बैकुंठपुर में आवश्यक बाउंड्री वॉल एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण कराए जाने को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया गया। भवन के विकास एवं समाज के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

बैठक में राजाराम जांता,जिलाध्यक्ष,रामलाल टांडिया,जिला कोषाध्यक्ष,चंद्रिका प्रसाद,जिला उपाध्यक्ष,दीपक कुमार,ब्लॉक अध्यक्ष बैकुंठपुर,बबीता ग्वाले,जिलाध्यक्ष महिला समिति,हीराकली,उपाध्यक्ष महिला समिति,उमेश कुमार,सचिव युवा समिति,संजू पड़वार,उपाध्यक्ष युवा समिति,भरत देवांगन,उपाध्यक्ष युवा समिति सहित श्रवण कुमार,राकेश कोराम,बिजेंद्र पड़वार,गंगाराम,रामलखन,सुभाष पड़वार,राजकुमार देवांगन,जयप्रकाश,राममिलन तांजे, शोमदास,विजय कोराम,अरविन्द कुमार (ब्लॉक सचिव,पटना),बबली देवांगन (सदस्य) एवं भारती (मीडिया प्रभारी,महिला समिति) उपस्थित रहे।


कभी सड़कों पर बिखेरती थी अपनी चमक, आज कोरिया में विश्राम फरमा रही है 'सवारी-ए-खास' एम्बेसेडर


​बैकुंठपुर (कोरिया, छत्तीसगढ़)

​वक्त भले ही बदल जाए और आधुनिक गाड़ियों का दौर आ जाए, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं जो सीधा अतीत के उस सुनहरे दौर में ले जाती हैं जहाँ सादगी, मजबूती और रुतबे की अपनी अलग ही पहचान हुआ करती थी। कोरिया जिले में विश्राम फरमा रही सफेद रंग की हिंदुस्तान एम्बेस्डर आज भी उस दौर की गरिमा और शानदार यादों को अपने आप में समेटे हुए है।

​अतीत का वह रसूखदार दौर

एक जमाना था जब भारतीय सड़कों पर एम्बेसेडर का राज हुआ करता था। यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीति और सामाजिक गौरव का प्रतीक थी। कलेक्टर, एसपी, मंत्री और उच्चाधिकारियों की पसंदीदा सवारी रही इस गाड़ी की छत पर लगी बत्ती और इसकी कतारबद्ध आवाजाही सत्ता और सम्मान की पहचान मानी जाती थी। जब यह कार अपनी खास गड़गड़ाहट और धमक के साथ सड़कों से गुजरती थी, तो हर किसी की निगाहें इसकी ओर टिक जाती थीं।

​प्रकृति के सानिध्य में बीते दिनों की यादें

कोरिया जिले की हरियाली और पेड़ों की छांव के बीच खड़ी यह एम्बेसेडर कार आज प्रकृति के आगोश में एक शांत पहरेदार की तरह नजर आती है। कार पर लिपटी हरी-भरी लताएं और पत्तियां ऐसा अहसास कराती हैं मानो समय ने इसे एक यादगार स्मारक का रूप दे दिया हो। इसके पिछले हिस्से पर लगा भारत स्टेज-II का मार्क और पुराना रजिस्ट्रेशन नंबर आज भी उन बीते पन्नों को जिंदा करता है जब कोरिया के विकास और प्रशासनिक निर्णयों की गवाह यही एम्बेसेडर हुआ करती थी।

​एक अनमोल ऐतिहासिक धरोहर

1950 के दशक से लेकर दशकों तक देश की सड़कों पर एकछत्र राज करने वाली एम्बेसेडर को यूं ही 'किंग ऑफ इंडियन रोड्स' नहीं कहा जाता था। इसका विशाल सोफे जैसा कम्फर्ट, मजबूत बॉडी और रॉयल लुक हर भारतीय के दिल में खास जगह रखता था। आज कोरिया में मौजूद यह गाड़ी भले ही शांत खड़ी हो, लेकिन इसके दर्शन मात्र से ही उस दौर की गरिमा, सादगी और वीआईपी संस्कृति के दिन आंखों के सामने जीवंत हो उठते हैं।

​यह गाड़ी मात्र एक धातु का ढांचा नहीं, बल्कि कोरिया जिले के प्रशासनिक इतिहास और हमारे अतीत की एक बेहद खूबसूरत और अनमोल यादगार है।

'पोड़ी बचरा' CA प्लांटेशन के करोड़ों के बजट पर अफसरों की नजर'!

परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में मिले भारी-भरकम फंड को 'खपाने' की होड़; डीएफओ की वापसी या एसडीओ का'गृह प्रेम'?




बैकुंठपुर/कोरिया:परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत 'पोड़ी बचरा में स्वीकृत हुआ क्षतिपूरक वनीकरण (CA Plantation) का करोड़ों का प्रोजेक्ट अब हरियाली लाने के बजाय अफसरों की 'अवैध कमाई' का जरिया बनता नजर आ रहा है। बोल बच्चन न्यूज के लगातार खुलासों के बाद अब विभागीय गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि आखिर क्यों इस वन मंडल में कुछ खास अधिकारियों और कर्मचारियों का जमावड़ा अचानक बढ़ गया है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट और 'जुगाड़' से वापसी की पटकथा

सूत्रों के मुताबिक, कोरिया वनमंडल के डीएफओ की इस वन मंडल में दोबारा पदस्थापना होना महज एक इत्तेफाक नहीं है। बताया जा रहा है कि डीएफओ को पहले से ही भली-भांति जानकारी थी कि परसा माइंस के एवज में 'इंटीग्रेटेड CA प्लांटेशन' का करोड़ों रुपये का बजट कोरिया वन मंडल में ही खर्च किया जाना है। इसी भारी-भरकम राशि को 'साधने' के लिए कथित तौर पर रसूख और जुगाड़ के दम पर दोबारा कोरिया में पोस्टिंग कराई गई।अगर इन दावों पर तनिक भी सच्चाई है तो  निश्चित ही शासन के स्थानांतरण नीति के सामने जुगाड़ की यह नीति ज्यादा कारगर साबित हो रहा है।






'गृह वन मंडल' का मोह या CA प्लांटेशन पर नजर?

इस पूरे खेल में सबसे अहम और चर्चित किरदार के रूप में एसडीओ के.एस. कंवर का नाम उभरकर सामने आ रहा है। कभी इसी कोरिया वन मंडल में रेंजर के पद पर तैनात रहे कंवर साहब, पदोन्नति के बाद अन्य जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन जैसे ही 'पोड़ी बचरा' के करोड़ों के CA फंड की मंजूरी की भनक लगी, वे भी अपने 'गृह वन मंडल' बैकुंठपुर लौटने से खुद को रोक नहीं पाए।चर्चा तो यहां तक है कि कंवर साहब ने एड़ी-चोटी का जोर लगाकर बैकुंठपुर में एसडीओ के रूप में अपनी वापसी पक्की की। इतना ही नहीं, जिस मुगूम बारी पैच में यह काम चल रहा है, वहां खुद को 'स्थानीय' बताकर मजदूरों के विरोध और धरातलीय बदहाली को दबाने  का जिम्मा भी इन्होंने ही संभाल रखा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक प्रशासनिक अधिकारी का यह 'अति-उत्साह' जंगलों को बचाने के लिए है या फिर करोड़ों के बजट में अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए?

 रिटायर कर्मचारी और चहेते भी मैदान में

सेवानिवृत्ति के बावजूद कार्यालय की कुर्सियों पर जमे मानचित्रकार और विभाग के 'स्वघोषित शुभचिंतक'की जुगलबंदी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।करोड़ों के प्रोजेक्ट का कार्य बिना किसी आगामी तैयारी  के बेमौशम शुरूवात करा देना कई सवाल खड़े करता है, प्लांटेशन के नाम पर सिर्फ गढ्ढे की खुदाई कर भारी भरकम राशि आहरण होने के अंदेशों से इंकार नहीं किया जा सकता। जरूरत है कि प्रोजेक्ट अनुसार वृक्षारोपण का कार्य कैसे हो सके।लेकिन जिस प्रकार से करोड़ों के इस वृक्षारोपण प्रोजेक्ट को हरियाली  के नाम पर विभागीय अधिकारी पलीता लगाने प्रयास कर रहे है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि हरियाली के नाम पर सिर्फ और सिर्फ प्रोजेक्ट से जुड़े लोग ही असल हरियाली का मजा ले सकेंगे।

गौरतलब है कि उक्त CA प्लांटेशन में मजदूरों से ₹20 प्रति गड्ढे की मामूली दर पर कार्य कराने  की बात सामने आई थी।बाद में मजदूरों के विरोध और काम रोकने के बाद बढ़ता विवाद देख विभागीय अधिकारी लोक लुभावन देकर फिर से काम शुरू कराये।बता दे कि गड्ढा खुदाई कार्य जिस पैच में कराया जा रहा है वहां बिना किसी तैयारी के ही डीएफओ कोरिया के निगरानी में कार्य कराया जा रहा है।कोरिया वनमण्डल के डीएफओ  और उनके मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा नियम-विरुद्ध तरीके से बारिश के दिनों से ही आनन-फानन में गढ्ढे की खुदाई कराकर केवल औपचारिकताओं की पूर्ति की जा रही है। इससे साफ जाहिर है कि अफसरों की इस तिकड़ी और उनके सिंडिकेट को लगने वाले पौधो को जिंदा रखने से कोई सरोकार नहीं है, इनका एकमात्र मकसद है कि,सिर्फ कागजों पर पौधरोपण दर्शाकर करोड़ों के सरकारी खजाने को किस प्रकार  से अपनी जेबों में भर सकें।बड़ा सवाल यह है किक्या शासन-प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारी इस 'जुगाड़ू सिंडिकेट' की मंशा और पोड़ी बचरा CA प्लांटेशन में पनप रहे इस बड़े घोटाले पर संज्ञान लेंगे, या फिर  मनमाफिक हो रहे  कार्यों पर गांधारी की तरह आँखो  पर  पट्टी बांध कर तमाशा देखेंगे।

छुट्टी के दिन भी मानचित्रकार, क्या अब रात में बनेंगे वन मंडल के चौकीदार? ढीठ और नियम-कायदों से बेखबर व्यवस्था के नाक के नीचे चल रहा 'अमर' कुर्सी का खेल!

कोरिया जिले में आखिर सी.पी. पटेल ही क्यों हैं अपवाद? क्या अन्य विभागों के रिटायर्ड कर्मचारी भी चला रहे हैं दफ्तर या सिर्फ यहीं मेहरबान है प्रशासन?



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल कार्यालय में नियमों, प्रशासनिक मर्यादाओं और शासकीय कायदों की जिस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वह अब हास्यास्पद होने के साथ-साथ बेहद शर्मनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल का दफ्तर मोह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आम कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में भी यह सेवामुक्त व्यक्ति दफ्तर में बैठकर सरकारी फाइलें और नक्शे खंगालता पाया जा रहा है।हालत यह हो गई है कि लोग अब तंज कसते हुए पूछ रहे हैं"छुट्टी के दिन भी काम करने वाले ये मानचित्रकार क्या अब रात में वन मंडल कार्यालय के चौकीदार की भी जिम्मेदारी संभालेंगे?

शासकीय नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था की नाक के नीचे एक गैर-कानूनी और अनधिकृत काम बदस्तूर जारी है। बिना किसी वैधानिक आदेश या संविदा नियुक्ति के एक बाहरी व्यक्ति का दफ्तर की सरकारी कुर्सी पर बैठकर फाइलें निपटाना यह साबित करता है कि जिले में नियम-कायदों की समझ और जिम्मेदारी का कितना भारी अकाल पड़ चुका है।

क्या पूरे कोरिया जिले में सी.पी. पटेल ही एकमात्र 'अमर' अपवाद हैं?

कोरिया जिले के  अन्य शासकीय विभागों में भी हर महीने m कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। क्या रिटायरमेंट के बाद वे भी इसी तरह दफ्तर में आकर फाइलें निपटाते हैं? यदि नहीं, तो केवल कोरिया वन मंडल में सी.पी. पटेल को ही यह 'विशेष छूट' और अनधिकृत लाइसेंस क्यों दिया गया है?बड़ा सवाल है  कि,छुट्टी के दिन जब नियमित कर्मचारी अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, तब एक रिटायर्ड कर्मचारी का अकेले बैठकर दफ्तर में फाइलों को खंगालना किसी बड़े लेन-देन, साक्ष्यों को नष्ट करने या करोड़ों रुपये के प्लांटेशन के नक्शों में हेराफेरी की आशंका को सीधे तौर पर बल देता है।यदि कल को वन मंडल कार्यालय से कोई संवेदनशील नक्शा या गोपनीय फाइल गायब होती है या उसमें कोई हेरफेर पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

शीर्ष अधिकारियों का ढर्रा सवालों के घेरे में

प्रशासनिक दक्षता का तकाजा कहता है कि कार्यालय प्रमुख को अपने मातहत चल रही हर गतिविधि की खबर होनी चाहिए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। लेकिन कोरिया वन मंडल में स्थिति इसके ठीक उलट है।इस पूरे गंभीर मामले, नियमों की अनदेखी और उठते सवालों पर जब वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी और वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) दोनों से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो दोनों ही आला अधिकारी कॉल का जवाब देने से कतराते नजर आए।

जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारियों का यूं मुंह फेर लेना और मामले पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना यह साफ दर्शाता है कि इस अनधिकृत कार्यशैली को ऊपर से लेकर नीचे तक का मौन संरक्षण हासिल है। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य का वन मंत्रालय और जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर इस 'अपवाद' पर पूर्ण विराम लगाता है या वन मंडल यूं ही राम भरोसे चलता रहेगा।

इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का मूल आधार मानवीय सेवा, सहयोग एवं संवेदना- चेयरमैन तोमन साहू’


राज्य चेयरमैन ने ली रेडक्रॉस की समीक्षा बैठक, कोरिया को अत्याधुनिक वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस देने की घोषणा’


कोरिया / भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा कोरिया की समीक्षा बैठक गत मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य चेयरमैन  तोमन साहू ने की। कलेक्टर एवं जिला शाखा की अध्यक्ष श्रीमती रोक्तिमा यादव की मार्गदर्शन में बैठक आहूत की गई थी।

बैठक में रेडक्रॉस की विभिन्न सेवा गतिविधियों की समीक्षा करते हुए राज्य चेयरमैन तोमन साहू ने कहा कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का मूल आधार मानवीय सेवा, सहयोग एवं संवेदना है। उन्होंने जूनियर रेडक्रॉस एवं यूथ रेडक्रॉस को मजबूत करने, सदस्यता अभियान को विस्तार देने, रक्तदान एवं अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा सिकल सेल, टीबी एवं एड्स नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने पर बल दिया।

इसी दौरान राज्य चेयरमैन श्री तोमन साहू ने राज्य शाखा की ओर से कोरिया जिला शाखा को अत्याधुनिक वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की। इससे जिले में जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सेवाओं में सहायता मिलने की उम्मीद है।

इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारी सह सचिव डॉ. बलवंत सिंह, जिला शाखा की वाइस चेयरमैन श्रीमती गीता राजवाड़े, वाइस चेयरमैन छत्तीसगढ़ प्रदेश रेडक्रास प्रबंध समिति  कमलेश शर्मा, कोषाध्यक्ष  जितेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।



सेवा संकल्प अभियान के तहत हो रही विभिन्न गतिविधियां’

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने जिले में रेडक्रॉस की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में रक्तदान के साथ शुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन एवं सिकल सेल की निःशुल्क जांच भी की जा रही है। शिक्षा विभाग के सहयोग से जिला स्तरीय ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है।

बैठक में रेडक्रॉस दल द्वारा 15 अगस्त एवं 26 जनवरी के राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित परेड में सहभागिता, जिला रेडक्रॉस कार्यालय के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय परिसर अथवा अन्य उपयुक्त स्थान का चयन तथा आवश्यकतानुसार कर्मचारी की नियुक्ति सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।इसके अलावा भविष्य में ब्लड स्टोरेज सेंटर की स्थापना, अंगदान के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन तथा युवाओं को युवोदय रेडक्रॉस मितान योजना से जोड़ने सहित अन्य गतिविधियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में वाइस चेयरमैन  बालाराम साहू,  गिरीश कुर्रे,  केशव साहू,  आर्यन सिन्हा,  अमन गुप्ता,  यूगल किशोर, सीएस डॉ. आयुष जायसवाल , डीपीएम  अशरफ अंसारी सहित जिला प्रबंध समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

न नियमों का खौफ, न छुट्टी की परवाह: संडे को भी वन मंडल में 'हाड़तोड़ मेहनत' कर रहे रिटायर्ड मानचित्रकार पटेल; पूछने पर साधी चुप्पी!




बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल में नियमों, कायदों और शासकीय व्यवस्था का जिस तरह से मखौल उड़ाया जा रहा है, वह अब हास्यास्पद और बेहद संदिग्ध मोड़ पर पहुँच चुका है। करीब एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके मानचित्रकार सी.पी. पटेल की निष्ठा और हाड़तोड़ मेहनत का आलम यह है कि सामान्य कार्य दिवस तो छोड़िए, शनिवार और रविवार जैसे शासकीय अवकाश के दिनों में भी उनका कार्यालय प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सेवामुक्त सी.पी. पटेल छुट्टियों के दिन भी दफ्तर में बैठकर शासकीय  फाइलें खंगालते देखे जा रहे हैं। जब उनसे इस अनधिकृत उपस्थिति और अवकाश के दिन भी दफ्तर में काम करने की वजह पूछी गई, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

पूछने पर साधी चुप्पी: आखिर किस आश में दी जा रही 'निःशुल्क' सेवा?

जब रिटायर्ड मानचित्रकार से पूछा गया कि बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति या सरकारी आदेश के वे अवकाश के दिनों में दफ्तर खोलकर किस हैसियत से काम कर रहे हैं, तो वे  कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके। यह चुप्पी इस बात को पुख्ता करती है कि दफ्तर में उनकी मौजूदगी पूरी तरह अनधिकृत और गैर-कानूनी है।

बिना किसी स्वार्थ के इतनी 'मेहनत' संभव नहीं:

स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी आश या मजबूरी है कि रिटायरमेंट के बाद भी शनिवार-रविवार को दफ्तर में हाजिरी लगानी पड़ रही है? क्या वर्षों से कोरिया वन मंडल पर जमा कब्जा अब करोड़ों के प्लांटेशन प्रोजेक्ट्स में किसी बड़े लेन-देन के लिए इस्तेमाल हो रहा है?



शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ की गंभीर आशंका

छुट्टी के दिन जब कार्यालय में कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं होता, तब अकेले बैठकर फाइलों का निपटारा करना किसी बड़े फेरबदल या साक्ष्यों को ठिकाने लगाने की साजिश की ओर इशारा करता है।

एक तरफ रिटायर्ड कर्मचारी से सवाल पूछने पर निरुत्तर हो जाता है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार आला अधिकारी फोन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। अधिकारियों और पूर्व कर्मचारी का यह मिला-जुला मौन इस बात का पुख्ता सबूत है कि कोरिया वन मंडल में 'अमर' कुर्सी का यह खेल ऊपर तक फैले किसी संरक्षण के बिना संभव नहीं है।