CA प्लांटेशन में उलटी चाल? बारिश में शुरू हुई गड्ढों की खुदाई, मुगम बारी में मानसून में गड्ढा से खुदाई से भ्रष्टाचार की आशंका, गड्ढों की संख्या से लेकर मजदूरी भुगतान तक जांच की जरूरत

 


बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत मुगम बारी में CA (Compensatory Afforestation) प्लांटेशन फिर सुर्खियों में है,कारण पौधरोपण से ज्यादा उसकी तैयारी को लेकर है। मानसून सक्रिय होने के बावजूद CA प्लांटेशन के लिए गड्ढा खुदाई का काम कराया जा रहा है।मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस भूमि पर प्लांटेशन की तैयारी की जा रही है, उसे लेकर पहले स्थानीय ग्रामीणों का विरोध सामने आ चुका है। ग्रामीणों का कहना था कि संबंधित भूमि पर लंबे समय से ग्रामीण काबिज थे। इसके बावजूद बाद में यही भूमि वन विभाग को प्लांटेशन के लिए उपलब्ध हो गई।

काबिज ग्रामीणों की जमीन से CA प्लांटेशन तक

मुगम बारी सहित CA प्लांटेशन के लिए चिन्हित भूमि को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से ही विवाद की स्थिति रही है। ग्रामीणों के काबिज होने के बावजूद भूमि का उपयोग CA प्लांटेशन के लिए किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया था।अब उसी क्षेत्र में प्लांटेशन की तैयारी के तहत गड्ढे खोदे जाने से पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं। ग्रामीणों का पक्ष क्या था, उनकी आपत्तियों का निराकरण किस स्तर पर हुआ इन सभी बिंदुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

बता दें कि,वर्तमान में मुगम बारी में CA प्लांटेशन के लिए गड्ढा खुदाई का कार्य वन विभाग के द्वारा कराया जा रहा है। बारिस के दौरान पौधरोपण किया जाना संभव है, लेकिन गड्ढा खुदाई का समय संबंधित स्वीकृत CA योजना और तकनीकी कार्ययोजना से तय होता है। इसलिए मुगम बारी में इस समय हो रही खुदाई पर सवाल यह नहीं है कि बारिश में काम किया ही नहीं जा सकता, बल्कि सवाल यह है कि वर्तमान गड्ढा खुदाई स्वीकृत समय-सारणी और तकनीकी मापदंडों के मुताबिक हो रहा है या नहीं?

गौरतलब है कि CA प्लांटेशन का उद्देश्य वन क्षेत्र की भरपाई के लिए पौधरोपण करना है, लेकिन बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के मुगम बारी में सक्रिय बारिश के दौरान गड्ढा खुदाई कराए जाने की टाइमिंग अब सवालों के घेरे में है। आखिर जब मानसून के पहले ही प्लांटेशन की तैयारियां पूरी की जा सकती थीं, तो बारिश के बीच यह काम कराने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह कार्य स्वीकृत CA कार्ययोजना और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार हो रहा है? इन तमाम सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।


समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा- योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत अपार आईडी बनाने का अभियान चलाएं, बच्चों के आधार व जन्म प्रमाण पत्र भी जल्द बनाएं ’एग्रीस्टेक और डिजिटल क्रॉप सर्वे में तेजी लाने के निर्देश, राजस्व प्रकरणों को शीघ्र निपटारे के निर्देश’




कोरिया / कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में विभागीय योजनाओं, विकास कार्यों और लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने समयबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कहा।

’हर विद्यार्थी की बने अपार आईडी’

कलेक्टर ने विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने की प्रगति की समीक्षा करते हुए शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संकुल समन्वयकों को अभियान चलाकर कार्य पूर्ण कराने तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने कहा।उन्होंने बच्चों के आधार कार्ड एवं एमबीयू की स्थिति की भी समीक्षा की। जिन बच्चों का आधार पंजीयन अथवा अपडेट लंबित है, उनका चिन्हांकन कर शिक्षा विभाग के समन्वय से शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए।


’जन्म प्रमाण पत्र के लिए शिविर लगाएं’

कलेक्टर ने स्कूल एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा तहसीलदारों को निर्देशित किया कि जिन बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बने हैं, उनके लिए आवश्यकतानुसार विशेष शिविर आयोजित कर प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस कार्य में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

’एग्रीस्टेक पंजीयन में लाएं तेजी’

किसानों से संबंधित एग्रीस्टेक पंजीयन की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने संस्थागत पंजीयन को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों से संपर्क कर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहयोग करने कहा, ताकि पंजीयन प्रक्रिया में किसी भी संस्था अथवा किसान को अनावश्यक परेशानी न हो।



डिजिटल क्रॉप सर्वे की नियमित मॉनिटरिंग

कलेक्टर ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रत्येक ग्राम में सर्वे की स्थिति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां सर्वे का कार्य शेष है, वहां विशेष टीम लगाकर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। सर्वे के दौरान संबंधित प्लॉट एवं आवश्यक अभिलेखों की जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने तथा पटवारियों को सर्वे किए गए प्लॉट का अप्रूवल शीघ्र करने के निर्देश दिए।

बारिश से क्षतिग्रस्त एवं मरम्मत योग्य सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल आवश्यक मरम्मत कार्य कराने कहा। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुविधा और सड़क सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। चिन्हांकित सड़कों का नियमित निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।

’ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार दिलाने पर जोर’

बैठक में वीबीजी-रामजी ग्रामीण रोजगार से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों में स्वीकृत कार्यों की प्रगति, कार्य प्रारंभ होने की स्थिति और लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धियों की जानकारी ली। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को समय पर प्रारंभ कर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने तथा ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

’सड़कों पर आवारा मवेशी दिखे तो होगी कार्रवाई’

आवारा मवेशियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने नगरीय निकायों, पंचायतों एवं पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ पशु मालिकों को जागरूक किया जाए। समझाइश के बाद भी जानबूझकर मवेशियों को खुला छोड़ने वाले पशु मालिकों पर नियमानुसार कार्रवाई एवं अर्थदंड सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़कों पर दुर्घटनाओं की स्थिति निर्मित न हो।

’हेल्पलाइन और जनशिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान जरूरी’

कलेक्टर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए इसकी जानकारी आम नागरिकों तक व्यापक रूप से पहुंचाने और प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करने कहा। इसके अलावा न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने, सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन, पीजी पोर्टल, लोक सेवा गारंटी अधिनियम एवं अन्य जनशिकायतों की भी समीक्षा की गई।

कलेक्टर श्रीमती यादव ने अधिकारियों से कहा कि समय-सीमा की बैठकों में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन करें और प्रत्येक कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा करें। जनहित के कार्यों में संवेदनशीलता, समयबद्धता और जवाबदेही ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

रक्षाबंधन उपरांत पर स्वच्छता दीदीयो ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल को बांधी राखी

 


कोरिया/नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल की लोकप्रियता और जन सेवा के प्रति उनकी निष्ठा का उदाहरण एक बार फिर रक्षाबंधन के उपरांत देखने को मिला l इस अवसर पर नगर पालिका में कार्यरत 80 स्वच्छता दीदीयो ने आज अशोक जायसवाल को राखी बांधकर अपना स्नेह और सामान व्यक्त किया l 

कार्यक्रम में उपस्थित स्वच्छता दीदीयो ने बताया कि अशोक जायसवाल हमेशा से नगर के सफाई कर्मियों के हित में कार्य करते रहे हैं l चाहे स्वच्छता के साधनों की व्यवस्था हो या समय पर इनकी समस्याओं का समाधान,उन्होंने सदैव इन कर्मियों को परिवार का हिस्सा मानकर उनका सहयोग किया है l यही कारण है कि रक्षाबंधन की उपरांत जैसे पवित्र अवसर पर स्वच्छता दीदीयो  ने उन्हें भाई मान कर राखी बांधने का निर्णय लिया l 

राखी बांधने के बाद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने सभी स्वच्छता दीदीयो को मिठाई खिलाकर और उपहार देकर उन्हें शुभकामनाएं दी l उन्होंने कहा कि स्वच्छता दिदिया हमारे नगर की रीड़ हैं,जो दिन रात मेहनत कर नगर को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखती है l उनके प्रति सम्मान प्रकट करना और उन्हें परिवार की तरह मानना हम सभी का कर्तव्य है l पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी कोषाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने इस अवसर पर यह भी कहा कि रक्षा बंधन के उपरांत रक्षाबंधन केवल भाई बहन के रिश्ते का त्यौहार नहीं बल्कि एक दूसरे के प्रति विश्वास,सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है lस्वच्छता दीदीयो की स्नेह को वह जीवन भर याद रखेंगे और आगे भी उनके हित में हर संभव प्रयास करते रहेंगे l 

जिन्होंने इस अनोखे भाई-बहन के रिश्तों को देखा और सराहा लोगों ने कहा कि अशोक जायसवाल का यह स्नेह और अपनापन ही उनकी लोकप्रियता का कारण है l

बंजारी डांड में राशन संकट: चावल, शक्कर और चना वितरण ठप, हितग्राहियों में आक्रोश

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बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजारी डांड की शासकीय उचित मूल्य की दुकान में राशन वितरण को लेकर हितग्राहियों की परेशानी बढ़ गई है। महीने का आखिरी सप्ताह आ जाने के बावजूद हितग्राहियों को चावल का वितरण नहीं हुआ है। वहीं शक्कर और चना भी नहीं मिलने की बात सामने आ रही है।

राशन लेने दुकान पहुंच रहे ग्रामीणों, खासकर महिलाओं में इस व्यवस्था को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। हितग्राहियों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान्न पर कई परिवार निर्भर हैं, ऐसे में समय पर राशन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।

मामले में जिला खाद्य अधिकारी नटवर सिंह राठौर से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि राशन वितरण नहीं होना गलत है। जांच  कराकर कार्यवाही की बात कही है।

अब सवाल यह है कि जब महीने का अंतिम सप्ताह आ गया है और चावल, शक्कर तथा चना का वितरण नहीं हो पाया है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ग्रामीणों ने खाद्य विभाग से मामले की जांच कर तत्काल राशन वितरण शुरू कराने की मांग की है।


कमलेश शर्मा को मिले मौका तो बैकुण्ठपुर के विकास को मिल सकती है नई रफ्तार, पार्टी को करना चाहिए गंभीरता से विचार

 


बैकुण्ठपुर। नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित होने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित दावेदारों के नामों के बीच कमलेश शर्मा का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह मांग उठने लगी है कि पार्टी को उनके नाम पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पत्रकारिता, सामाजिक गतिविधियों और संगठनात्मक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे कमलेश शर्मा की स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और शहर की समस्याओं से परिचित होने को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है। यदि पार्टी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाती है और जनता का आशीर्वाद मिलता है, तो बैकुण्ठपुर के विकास को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

शहर की समस्याओं की जमीनी समझ

बैकुण्ठपुर में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, यातायात और बेहतर नागरिक सुविधाएं आज भी प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में शहर की समस्याओं को करीब से समझने वाला और लगातार जनहित के मुद्दों को उठाने वाला नेतृत्व नगर पालिका के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कमलेश शर्मा लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने स्थानीय समस्याओं और जनसरोकार के विषयों को प्रमुखता से उठाया है। यही अनुभव यदि उन्हें नगर पालिका के नेतृत्व का अवसर देता है तो योजनाओं को जमीन पर उतारने में उपयोगी साबित हो सकता है।

विकास के साथ जवाबदेही की उम्मीद

नगर पालिका अध्यक्ष का पद केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर के विकास की बड़ी जिम्मेदारी है। जनता को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो विकास योजनाओं के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी नजर रखे।

कमलेश शर्मा को टिकट मिलने की स्थिति में उनके समर्थकों को उम्मीद है कि वे शहर के विकास के लिए नई सोच और सक्रिय कार्यशैली के साथ आगे बढ़ेंगे। खासकर मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता और व्यवस्थित शहर के निर्माण को प्राथमिकता मिल सकती है।

पार्टी के लिए भी हो सकता है मजबूत विकल्प

अनारक्षित सीट होने के बाद पार्टी के सामने कई संभावित नाम हो सकते हैं। ऐसे में उम्मीदवार का चयन केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी जनस्वीकार्यता, सक्रियता, संगठन से जुड़ाव और शहर के विकास के विजन को ध्यान में रखकर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

इन्हीं कसौटियों पर कमलेश शर्मा का नाम पार्टी के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और जनसरोकारों से जुड़े रहने का अनुभव उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान दे सकता है।

बैकुण्ठपुर की जनता अब ऐसे नेतृत्व की उम्मीद कर रही है जो शहर को योजनाओं से आगे बढ़ाकर धरातल पर विकास की नई तस्वीर दे सके। यदि पार्टी कमलेश शर्मा के नाम पर गंभीरता से विचार करती है और उन्हें चुनावी मैदान में उतारती है, तो यह फैसला बैकुण्ठपुर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

छठियार की खुशियां मातम में बदलीं, आर्केस्ट्रा देख रहे लोगों को तेज रफ्तार बस ने कुचला

 


पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में छठियार समारोह की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब सड़क किनारे आयोजित आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में तेज रफ्तार बस घुस गई। हादसे में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घटना लौरिया थाना क्षेत्र के बनकटवा की बताई जा रही है। एक परिवार में नवजात बच्चे के छठियार का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। समारोह में आर्केस्ट्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क किनारे जुटे थे। इसी दौरान गोरखपुर से बेतिया जा रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर भीड़ में जा घुसी।

बताया जा रहा है कि सामने से आ रहे गैस सिलेंडर लदे ट्रक से बचने के प्रयास में बस चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया। बस लोगों को कुचलते हुए आगे निकल गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और समारोह स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायलों को बेतिया के जीएमसीएच अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है। हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिला।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। घटना ने एक खुशहाल परिवार के समारोह को देखते ही देखते दर्दनाक हादसे में बदल दिया।

शिक्षा विभाग में करोड़ों के भुगतान की जांच में बड़ा खुलासा, 4.51 करोड़ के अनियमित भुगतान का उल्लेख

 


बलरामपुर-रामानुजगंज।
जिला शिक्षा विभाग में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न मदों में किए गए सरकारी खर्च को लेकर सामने आई शिकायत की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने दस्तावेजों, कैशबुक, स्टॉक पंजी और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के कार्यकाल में आकस्मिक व्यय, साइकिल, फर्नीचर, पाठ्य पुस्तक, स्वच्छता सामग्री, व्यायाम उपकरण, खेल सामग्री, स्टेशनरी तथा अन्य मदों में खरीदी और भुगतान की प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

4.51 करोड़ रुपये के भुगतान को नियम विरुद्ध बताया

जांच दल के निष्कर्ष में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध सरकारी बजट में से लगभग 4 करोड़ 51 लाख 65 हजार 159 रुपये के देयक तैयार कर नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर और व्यापक वित्तीय एवं सेवा संबंधी अनियमितता के रूप में दर्ज किया गया है।

साइकिल से लेकर फर्नीचर तक खरीदी पर सवाल

सरस्वती साइकिल योजना में बड़ी राशि खर्च किए जाने के बावजूद जांच में भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता प्रमाणिकरण, डिलीवरी चालान और स्टॉक एंट्री से संबंधित गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं।

गैर कार्यालयीन फर्नीचर की खरीदी में भी जिला स्तरीय क्रय समिति के गठन और अनिवार्य भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कई सामग्रियों की जिला, विकासखंड अथवा विद्यालय स्तर पर स्टॉक एंट्री का प्रमाण उपलब्ध नहीं था।

पाठ्य पुस्तकों की खरीदी में भी नियमों की अनदेखी

पाठ्य पुस्तक मद में करीब 64,285 रुपये के भुगतान की जांच में क्रय समिति का गठन नहीं होने, क्रय आदेश उपलब्ध नहीं होने, डिलीवरी चालान नहीं मिलने तथा भौतिक सत्यापन नहीं कराए जाने जैसी कमियां सामने आईं।

जांच दल ने यह भी दर्ज किया कि संबंधित संस्थाओं से पुस्तकों की मांग प्राप्त करने के बजाय जिला शिक्षा कार्यालय स्तर से ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

राजपुर के फर्नीचर में बजट से अधिक भुगतान

कन्या शिक्षा परिसर राजपुर के फर्नीचर की खरीदी में भी अनियमितता पाई गई। जांच के अनुसार स्थानीय फर्म से बिना निर्धारित प्रक्रिया के सामग्री खरीदी गई। उपलब्ध बजट की तुलना में देयक अधिक होने के बावजूद भुगतान किया गया, जबकि खरीदी गई सामग्री की स्टॉक एंट्री और संस्था को वास्तविक प्राप्ति का प्रमाण जांच दल को नहीं मिला।

स्वच्छता सामग्री में सबसे गंभीर सवाल

विद्यालयों के लिए स्वच्छता सामग्री की खरीदी में भी जांच दल ने कई गंभीर बिंदु दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बजट को विकासखंडों में पुनः आवंटित करने के बजाय जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी की गई।

जांच में क्रय समिति के गठन, तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी, स्टॉक एंट्री, डिलीवरी चालान और संस्थावार वितरण सूची को लेकर गंभीर कमियां पाई गईं।

रिपोर्ट में लगभग 25.23 लाख रुपये की खरीदी का उल्लेख है। जांच दल ने यह भी पाया कि निर्धारित फर्मों के अलावा अन्य फर्म से भी खरीदी की गई और कुछ मामलों में निविदा अथवा कोटेशन प्रक्रिया पर सवाल उठे।

व्यायाम उपकरण की 6 लाख की खरीदी भी घेरे में

प्राथमिक विद्यालयों के लिए करीब 6 लाख रुपये के व्यायाम उपकरण की खरीदी की जांच में भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।

जांच दल के अनुसार इतनी राशि की खरीदी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सीमित कोटेशन के माध्यम से खरीदी किए जाने, क्रय समिति की संरचना में नियमों का पालन नहीं होने तथा सामग्री की स्टॉक एंट्री और वितरण के प्रमाण उपलब्ध नहीं होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निर्धारित वित्तीय सीमा से बचने का प्रयास किया गया।

खेल सामग्री की करीब 15 लाख रुपये की खरीदी

जिले में खेल सामग्री की आपूर्ति के लिए लगभग 14.99 लाख रुपये के खर्च का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है। जांच में क्रय समिति गठन, निविदा प्रक्रिया, डिलीवरी चालान, स्टॉक एंट्री और संस्थावार वितरण से संबंधित दस्तावेजों की कमी सामने आई।

जांच दल ने तकनीकी विशेषज्ञों के बिना गुणवत्ता प्रमाणिकरण किए जाने को भी नियम विरुद्ध बताया।

स्टेशनरी और अन्य खरीदी में भी अनियमितताएं

जांच के दौरान स्टेशनरी एवं अन्य सामग्री की खरीदी से संबंधित बिलों और भुगतान की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कई बिलों में क्रय आदेश, स्वीकृति, सत्यापन और संबंधित अभिलेखों के अभाव का उल्लेख है।

कुछ मामलों में एक ही खरीदी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई, जिसे जांच दल ने निविदा प्रक्रिया से बचने का अनुचित प्रयास माना।

कैशबुक के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल

जांच दल ने जिला शिक्षा कार्यालय की कैशबुक का परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार कैशबुक में कई स्थानों पर अत्यधिक कटिंग, ओवरराइटिंग और संशोधन पाए गए।

कई भुगतान प्रविष्टियों के साथ संबंधित बिल, स्वीकृति आदेश और अन्य वित्तीय दस्तावेज संलग्न नहीं पाए गए। भुगतान किस योजना अथवा मद से, किस बिल के आधार पर और किस माध्यम से किया गया, इसका स्पष्ट विवरण कई प्रविष्टियों में नहीं होने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।

कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका रखने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने शासकीय निवास में कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं एवं अन्य कार्यालयीन दस्तावेज रखे जाते हैं। जांच में इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों का परीक्षण किया गया।

हालांकि शिकायत के एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप—रिश्तेदारों के बैंक खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर करने—के संबंध में जांच दल ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त तथ्यात्मक जानकारी अथवा प्रारंभिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। इसलिए इस बिंदु पर निष्कर्ष नहीं दिया गया।

इसी तरह अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप पर भी जांच दल ने तत्काल कोई निष्कर्ष नहीं दिया और संपत्ति की अलग से नियमानुसार जांच कराए जाने को उचित बताया।

विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान ने बढ़ाए सवाल

जांच के दौरान जिले के छह विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान लिए गए। उन्होंने स्वच्छता सामग्री प्राप्त होने की बात कही, लेकिन सामग्री किस स्थान से, किस तारीख को और किस अधिकारी के हस्ताक्षर से प्राप्त हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके।

फर्नीचर, साइकिल, स्टेशनरी, व्यायाम सामग्री और खेल सामग्री के संबंध में भी विकासखंड स्तर से खरीदी और वितरण की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

जांच दल ने माना—आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित

जांच के अंतिम निष्कर्ष में जांच दल ने कहा है कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के परीक्षण से शिकायत के प्रमुख वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

रिपोर्ट में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन एवं दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके बैंक खाते में उपलब्ध राशि के आहरण पर तत्काल रोक लगाने की अनुशंसा भी की गई है।

अब आगे की कार्रवाई पर नजर

11 अगस्त 2026 को तैयार जांच प्रतिवेदन में कैशबुक की मूल प्रतियां, स्टॉक पंजी और कर्मचारियों के बयान सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। अब इस जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।