गोपनीयता और दस्तावेजों की सुरक्षा पर खतरा: सेवानिवृत्ति के बाद कोई भी व्यक्ति आम नागरिक की श्रेणी में आ जाता है। ऐसे में बिना किसी पद या जिम्मेदारी के किसी बाहरी/सेवानिवृत्त व्यक्ति को शासकीय व गोपनीय दस्तावेजों तक सीधी पहुंच देना किस हद तक सही है?दफ्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे महीने भर से चल रहा यह खेल कई कई सवाल उठाता है, कि क्या उच्च अधिकारियों को इसकी भनक नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी मौन स्वीकृति दी गई है?
बता दे कि,सेवानिवृत्त होने के बावजूद मानचित्रकार सी.पी. पटेल रोजाना कार्यालय के मानचित्र शाखा में बैठकर बेझिझक शासकीय कार्यों का संपादन करते देखे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अपने पूरे सेवाकाल के दौरान उनका कभी स्थानांतरण नहीं हुआ और वे पूरी सर्विस एक ही जगह डटे रहे। अब रिटायरमेंट के बाद भी कोरिया वन मंडल से उनका 'मोह' खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
क्या गहरा राज छिपा है फाइलों में?
स्थानीय गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर ऐसा कौन सा 'विशेष मोह' या राज़ है जिसके चलते रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें दफ्तर से दूर नहीं किया जा रहा है।एक ही स्थान पर लंबे समय तक सेवा देने के बाद रिटायरमेंट उपरांत बिना किसी आधिकारिक पद या वैधानिक आदेश के दफ्तर की फाइलें संभाले रखना विभागीय निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। देखना यह होगा कि मामले में उच्चाधिकारी इस पर कोई कड़ा संज्ञान लेते हैं या 'मोह' का यह सिलसिला ऐसे ही जारी रहता है ।
"इस पूरे मामले में कोरिया वनमंडलाधिकारी (DFO) चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका।























