कोरिया/बैकुंठपुर: कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र में स्थित बहुचर्चित क्षतिपूरक वनीकरण (CA) प्लांटेशन 'पोड़ी बचरा'एक बार फिर सुर्खियों में है। पैच मुगूम बारी में वन विभाग की जल्दबाजी और अधूरी तैयारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि धरातल पर पुख्ता इंतजाम किए बिना ही विभाग पौधरोपण के काम को आनन-फानन में निपटाने की तैयारी में जुटा हुआ है।
मजदूरी दर पर असंतोष और काम
बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पोड़ी बचरा के '
मुगूम बारी' पैच में क्षतिपूरक वनीकरण (CA) का काम विवादों के
घेरे में आ गया है। बारिश के इस मौसम में वन विभाग द्वारा आनन-
फानन में कराई जा रही गड्ढा खुदाई को लेकर मजदूरों ने मोर्चा खोल
दिया है। मजदूरों का कहना है कि मुरम और पत्थरीली जमीन पर
2×2 फीट का गड्ढा खोदने के लिए उन्हें महज ₹20 प्रति गढ्ढे देने कहा
गया है। इतनी कठिन जमीन पर दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद भी
एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पाता है, जिससे मेहनत
के अनुपात में मजदूरी दर बेहद कम है, जिसके विरोध में मजदूरों ने
फिलहाल काम बंद कर दिया है।
समय से पहले गड्ढा खुदाई समझ से परे।
तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो पौधरोपण के लिए
गड्ढा खुदाई का सही समय अक्टूबर के बाद (ठंड के मौसम में) माना
जाता है, ताकि बारिश के दौरान जमी हुई मिट्टी को सुखाया और
उपचारित किया जा सके। लेकिन कोरिया वन मंडल के
जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों और वैज्ञानिक तरीकों को
दरकिनार
कर इस बारिश के मौसम में ही गड्ढा खुदाई का काम कराने पर
उतारू
है।
सफाई और धरातलीय तैयारी नदारद
बता दे कि,जिस स्थान पर पौधरोपण किया जाना है, वहां
धरातलीय स्तर पर कोई बुनियादी तैयारी नहीं दिख रही है।
पौधरोपण
से पहले पूरे क्षेत्र की समुचित सफाई और खरपतवार हटाना अनिवार्य
होता है, लेकिन मौके पर घास और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है।
सफाई के अभाव में लगने वाले नए पौधों का पनपना बेहद मुश्किल
नजर आ रहा है।
सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव
सिंचाई की व्यवस्था को लेकर भी विभाग की घोर अनदेखी उजागर
हुई है। यदि इस समय जैसे-तैसे पौधे लगा भी दिए जाते हैं, तो आने
वाले शुष्क दिनों में उन्हें जीवित रखने के लिए वन विभाग के पास
पानी का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। बिना सिंचाई व्यवस्था के
लगाए गए पौधों का सूखना तय माना जा सकता है।
सुरक्षा फेंसिंग के नाम पर घोर लापरवाही
सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले फेंसिंग कार्य को
भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। वर्तमान में मुगम बारी
पैच में मवेशियों और बाहरी खतरों से पौधों को बचाने के लिए फेंसिंग
(सुरक्षा घेरा) का काम तक नहीं कराया गया है। यह लापरवाही
दर्शाती है कि विभाग को पौधों के संरक्षण से ज्यादा काम को
निपटाने की जल्दी है।
भारी-भरकम बजट के बाद भी तैयारी अधूरी





















