कोरिया वनमंडल की खुली पोल: न पानी, न फेंसिंग... CA प्लांटेशन के नाम पर सिर्फ गड्ढा खोदने की औपचारिकता! स्थल सफाई और सुरक्षा घेरे के बिना पौधरोपण की तैयारी; क्या सिर्फ बजट खपाने में जुटा है वन विभाग?

कोरिया/बैकुंठपुर: कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र में स्थित बहुचर्चित क्षतिपूरक वनीकरण (CA) प्लांटेशन 'पोड़ी बचरा'एक बार फिर सुर्खियों में है। पैच मुगूम बारी में वन विभाग की जल्दबाजी और अधूरी तैयारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि धरातल पर पुख्ता इंतजाम किए बिना ही विभाग पौधरोपण के काम को आनन-फानन में निपटाने की तैयारी में जुटा हुआ है। 

 मजदूरी दर पर असंतोष और काम 

 

बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पोड़ी बचरा के '

मुगूम बारी' पैच में क्षतिपूरक वनीकरण (CA) का काम विवादों के 

घेरे में आ गया है। बारिश के इस मौसम में वन विभाग द्वारा आनन-

फानन में कराई जा रही गड्ढा खुदाई को लेकर मजदूरों ने मोर्चा खोल

दिया है। मजदूरों का कहना है कि मुरम और पत्थरीली जमीन पर 

2×2 फीट का गड्ढा खोदने के लिए उन्हें महज ₹20 प्रति गढ्ढे देने कहा

गया है। इतनी कठिन जमीन पर दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद भी 

एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पाता है, जिससे मेहनत

के अनुपात में मजदूरी दर बेहद कम है, जिसके विरोध में मजदूरों ने 

फिलहाल काम बंद कर दिया है। 

 

समय से पहले गड्ढा खुदाई समझ से परे।  


तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो पौधरोपण के लिए 

गड्ढा खुदाई का सही समय अक्टूबर के बाद (ठंड के मौसम में) माना 

जाता है, ताकि बारिश के दौरान जमी हुई मिट्टी को सुखाया और 

उपचारित किया जा सके। लेकिन कोरिया वन मंडल के 

जिम्मेदार  अधिकारियों ने नियमों और वैज्ञानिक तरीकों को 

दरकिनार 

कर इस बारिश के मौसम में ही गड्ढा खुदाई का काम कराने पर 

उतारू 

है। 


सफाई और धरातलीय तैयारी नदारद 


बता दे कि,जिस स्थान पर  पौधरोपण किया जाना है, वहां 

धरातलीय स्तर पर कोई बुनियादी तैयारी नहीं दिख रही है। 

पौधरोपण 

से पहले पूरे क्षेत्र की समुचित सफाई और खरपतवार हटाना अनिवार्य

होता है, लेकिन मौके पर घास और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। 

सफाई के अभाव में लगने वाले नए पौधों का पनपना बेहद मुश्किल 

नजर आ रहा है।

 


 सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव 


सिंचाई की व्यवस्था को लेकर भी विभाग की घोर अनदेखी उजागर 

हुई है। यदि इस समय जैसे-तैसे पौधे लगा भी दिए जाते हैं, तो आने 

वाले शुष्क दिनों में उन्हें जीवित रखने के लिए वन विभाग के पास 

पानी का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। बिना सिंचाई व्यवस्था के 

लगाए गए पौधों का सूखना तय माना जा सकता है। 

 

सुरक्षा फेंसिंग के नाम पर घोर लापरवाही 


सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले फेंसिंग कार्य को 

भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। वर्तमान में मुगम बारी 

पैच में मवेशियों और बाहरी खतरों से पौधों को बचाने के लिए फेंसिंग 

(सुरक्षा घेरा) का काम तक नहीं कराया गया है। यह लापरवाही 

दर्शाती है कि विभाग को पौधों के संरक्षण से ज्यादा काम को 

निपटाने की जल्दी है। 


भारी-भरकम बजट के बाद भी तैयारी अधूरी  


गौरतलब है कि यह इंटीग्रेटेड CA प्लांटेशन "पोड़ी  बचरा' परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में कराया जा रहा है, जिसके लिए वन विभाग को भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या इतने बड़े बजट के बाद भी वन विभाग इसी तरह बिना फेंसिंग, बिना पानी और घटिया तैयारियों के साथ प्लांटेशन का काम पूरा करेगा? ऐसे में निष्पक्ष जांच होने पर ही कागजी दावों और जमीनी हकीकत का सच सामने आ सकेगा।

भारतीय पनिका समाज जिला कोरिया की जिला स्तरीय बैठक संपन्न हुआ


कोरिया/भारतीय पनिका समाज जिला कोरिया छत्तीसगढ़ की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन सामाजिक भवन खोड़री,बैकुंठपुर में दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राजाराम जांता ने की। बैठक में जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी,विकासखंड के पदाधिकारी एवं विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्तरीय बैठक अमरकंटक एवं बिलासपुर की रिपोर्टिंग,शहीद दयाल पनिका का शहादत दिवस मनाए जाने,सामाजिक नियमावली बनाए जाने,बैठक में अनुपस्थित पदाधिकारियों की समीक्षा तथा रिक्त पदों की पूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शहीद दयाल पनिका का शहादत दिवस 20 सितंबर 2026 को बिशुनपुर चर्चा ब्लॉक के शिवपुर चर्चा इकाई में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर आवश्यक तैयारियों एवं जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की गई।

इसी क्रम में समाज के लिए सामाजिक नियमावली तैयार किए जाने हेतु 11 सदस्यों के दल का गठन किया गया। गठित दल द्वारा जन्म संस्कार नियमावली,विवाह संस्कार नियमावली, मृत्यु संस्कार नियमावली एवं अन्य सामाजिक नियमावली के संबंध में आवश्यक विचार-विमर्श कर नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बैठक में संगठन को मजबूत करने,समाज में आपसी एकता एवं समन्वय बढ़ाने तथा सामाजिक गतिविधियों को व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया। पदाधिकारियों ने समाजहित में सक्रिय सहभागिता एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया।

अंत में जिला अध्यक्ष राजाराम जांताने उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए समाज की एकता,संगठनात्मक मजबूती एवं सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया,और सभा का समाप्ति कि घोषणा किए!

राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान से सम्मानित हुए रनई के डॉ. आलोक तिवारी मानद पीएचडी के बाद एक और बड़ी उपलब्धि, कोरिया जिले का बढ़ाया गौरव

 


बैकुंठपुर/रनई। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले और ग्राम रनई के लिए एक बार फिर गौरव का क्षण आया है। ग्राम रनई निवासी ज्योतिषाचार्य डॉ. आलोक तिवारी (मनीष) को ज्योतिष की प्राचीन एवं वैदिक विद्या के क्षेत्र में उनके ज्ञान, ज्योतिषीय विद्वता, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, मानव सेवा और समाज में उल्लेखनीय योगदान के लिए “राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया है।

बताया गया कि 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सेवाप्रीत फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा डॉ. आलोक तिवारी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के बाद उनके गृह ग्राम रनई सहित पूरे कोरिया जिले में हर्ष का माहौल है।

मानद पीएचडी के बाद मिली दूसरी बड़ी उपलब्धि

डॉ. आलोक तिवारी को इससे पहले 29 जून 2026 को ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में उनके अनुभव और शोध के आधार पर Honorary Doctorate (मानद पीएचडी) की उपाधि प्राप्त हुई थी। इसके बाद वे “डॉ. आलोक तिवारी” के नाम से जाने जाने लगे। अब राष्ट्रीय ज्योतिष रत्न सम्मान मिलने के साथ ही उनके खाते में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।

डॉ. तिवारी ने अपनी दोनों उपलब्धियों का श्रेय अपने गुरुदेव श्री अन्तरिक्ष शुक्ला (अयोध्या) को दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के बिना इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था। उनके लिए गुरुदेव का मार्गदर्शन सदैव महत्वपूर्ण रहा है।


छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर, विदेशों तक पहचान

डॉ. आलोक तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम रनई के शासकीय विद्यालय से हुई। एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अपने परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और ज्योतिष के प्रति समर्पण के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। बताया जाता है कि ज्योतिष के क्षेत्र में उनके कार्य और अनुभव को देश के बाहर भी पहचान मिली है।उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और उचित मार्गदर्शन के साथ व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

यूट्यूब के माध्यम से निःशुल्क दे रहे ज्योतिष की शिक्षा

डॉ. आलोक तिवारी “Alok Tiwari ASTROLOGER” नामक यूट्यूब चैनल के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र की निःशुल्क शिक्षा भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि ज्योतिष जैसी प्राचीन वैदिक विद्या का अधिक से अधिक विस्तार होना चाहिए और इसी उद्देश्य से वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।

गुरु ने कहा—“यह मेरे लिए भी गौरव का क्षण”

डॉ. आलोक तिवारी के गुरुदेव श्री अन्तरिक्ष शुक्ला से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि किसी गुरु के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती कि उसका शिष्य कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करे। उन्होंने कहा कि डॉ. आलोक तिवारी की उपलब्धि उनके लिए भी गौरव का विषय है।गुरुदेव ने डॉ. तिवारी को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे इसी तरह आगे बढ़ते रहें और अपने ज्ञान के माध्यम से मानव कल्याण के लिए कार्य करते रहें।

बचपन के मित्रों में भी खुशी की लहर

डॉ. आलोक तिवारी के बचपन के मित्र शशि प्रकाश जायसवाल ने उनकी उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जिस मित्र के साथ बचपन में गांव की गलियों और धूल में खेलते थे, आज वही अपनी मेहनत और ज्योतिषीय ज्ञान के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बना रहा है।

उन्होंने कहा कि डॉ. तिवारी की उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि ग्राम रनई के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उनकी इस सफलता से ग्रामवासियों में खुशी की लहर है। उन्होंने अपने बचपन के मित्र को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुगूम बारी CA प्लांटेशन में मजदूरों का दर्द: ₹20 में 2×2 फीट का गड्ढा, मजदूर बोले—इतनी दर में तो मेहनत भी नहीं निकल रही!

बारिश के बीच काम बंद, पथरीली-मुरम जमीन ने बढ़ाई मुश्किलें; मजदूरी दर को लेकर वन विभाग घेरे में



बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत मुगम बारी में CA प्लांटेशन के तहत चल रहा गड्ढा खुदाई का कार्य फिलहाल बंद है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान मौके पर मौजूद कुछ मजदूरों ने काम बंद होने की वजह और अपनी परेशानियां साझा कीं। मजदूरों के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि 2×2 फीट का एक गड्ढा खोदने के लिए  ₹20 की दर से भुगतान किया जाएगा। मजदूरों का कहना है कि जमीन मुरम और पथरीली होने के कारण इतनी कम दर में काम करना उनके लिए नुकसान का सौदा बन रहा है।

एक मजदूर मुश्किल से 10 गड्ढे भी नहीं खोद पा रहा

मजदूरों ने बताया कि गड्ढे का आकार 2×2 फीट रखा गया है, लेकिन मौके की जमीन सामान्य मिट्टी वाली नहीं है। कई जगह मुरम और पत्थर निकलने के कारण एक गड्ढा तैयार करने में काफी मेहनत लग रही है। मजदूरों का कहना है कि एक मजदूर दिनभर मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से 10 गड्ढे तक भी नहीं खोद पा रहा है। ऐसे में ₹20 प्रति गड्ढे की दर से मिलने वाली मजदूरी उनके लिए पर्याप्त नहीं बैठ रही है।मजदूरों की मांग है कि उन्हें विभाग द्वारा निर्धारित वास्तविक मजदूरी दर के अनुसार भुगतान किया जाए, ताकि मेहनत के मुताबिक मजदूरी मिल सके।


मजदूरों का सवाल—मेहनत इतनी, मजदूरी इतनी कम क्यों?

मजदूरों की परेशानी सिर्फ काम की कठिनाई तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि गड्ढा खोदने में अपेक्षा से कहीं ज्यादा मेहनत लग रही है और जमीन भी पथरीली है, तो ऐसी स्थिति में तय दर पर काम करना उनके लिए घाटे का सौदा है। इसी वजह से मजदूरों ने फिलहाल काम बंद कर दिया है।

यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या गड्ढा खुदाई की दर जमीन की वास्तविक स्थिति और निर्धारित मजदूरी मानकों को ध्यान में रखकर तय की गई है? अगर मजदूरों को निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान की बात कर कार्य कराया जा रहा है तो इसकी जांच जरूरी है, और यदि ₹20 की दर ही स्वीकृत है तो इसकी गणना और आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए।



मौके पर तैयारी अधूरी, फिर बारिश में गड्ढे क्यों?

गौरतलब है कि CA प्लांटेशन का उद्देश्य पौधरोपण के माध्यम से वन क्षेत्र की भरपाई करना है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान प्लांटेशन स्थल पर कई कमियां नजर आई। बताया गया कि कई स्थानों पर जमीन की ढंग से सफाई नहीं हुई है, सिंचाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है,इसके अलावा फेंसिंग की व्यवस्था भी नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में जब प्लांटेशन की जमीन की पूरी तैयारी और पौधों के संरक्षण की व्यवस्था पर ही सवाल हैं, तब बारिश के बीच गड्ढा खुदाई कराने का फैसला चर्चा में आना स्वाभाविक है।

CA के नाम पर काम, लेकिन मजदूरों के हक का क्या?

मजदूरों का कहना है कि वे काम करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि जिस दर से मजदूरी निर्धारित की गई है, उसी के अनुसार उन्हें भुगतान मिले और कठिन जमीन में काम करने की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।अगर मजदूरों की बात सही है और एक मजदूर पूरे दिन में मुश्किल से 10 गड्ढे खोद पा रहा है, तो ₹20 प्रति गड्ढे के हिसाब से उसकी दैनिक कमाई बेहद कम रह जाती है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मजदूरी की दर किस आधार पर तय की गई और क्या यह निर्धारित मजदूरी मानकों के अनुरूप है?



वन विभाग के रिकॉर्ड से खुल सकता है पूरा मामला

मुगम बारी CA प्लांटेशन में मजदूरों को दिए जाने वाली दर की वास्तविक तस्वीर कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका मस्टर रोल से सामने आ सकती है। यदि रिकॉर्ड में एक दर है और मजदूरों को दूसरी दर बताई जा रही है, तो यह गंभीर विषय होगा।वहीं, यदि वन विभाग के अनुसार  ₹20 प्रति गड्ढा ही स्वीकृत दर है, तो विभाग को यह भी बताना चाहिए कि 2×2 फीट के गड्ढे के लिए यह दर किस स्वीकृत लागत/मापदंड के आधार पर तय की गई है और मजदूरों की वास्तविक मजदूरी कैसे सुनिश्चित की जा रही है।

डाका किस पर—सरकारी योजना पर या मजदूर की मेहनत पर?

CA प्लांटेशन के नाम पर सरकारी राशि खर्च होती है, लेकिन उस काम की सबसे पहली कड़ी मजदूर होता है। यदि वही मजदूर अपनी मेहनत के उचित भुगतान के लिए काम बंद करने को मजबूर हो जाए, तो यह सिर्फ मजदूरी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि मुगम बारी में एक तरफ बारिश के बीच गड्ढा खुदाई, दूसरी तरफ पथरीली-मुरम जमीन, अधूरी सफाई, सिंचाई और फेंसिंग की कमी तथा ऊपर से मजदूरों की कम दर को लेकर नाराजगी—इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए पूरे CA प्लांटेशन की स्वीकृति से लेकर गड्ढा खुदाई, मजदूरी भुगतान दर, पौधरोपण के बाद पौधों के संरक्षण तक की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। 


फिलहाल मुंगुम बारी में CA प्लांटेशन कार्य बंद है, मजदूरों को 25रूपये प्रति गड्ढा देने कहा गया है, वास्तविक दर पूछना पड़ेगा,गड्ढा खुदाई का कार्य हाजरी में है या ठेका में इसकी स्पष्ट जानकारी मुझे नहीं मालूम।

संतोष तिवारी,वन परिक्षेत्र अधिकारी बैकुंठपुर 

जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में कायाकल्प राज्य स्तरीय टीम द्वारा निरीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न


कोरिया,बैकुंठपुर/जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में आज कायाकल्प अभियान अंतर्गत राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम द्वारा अस्पताल का विस्तृत मूल्यांकन एवं निरीक्षण किया गया। राज्य स्तरीय टीम के जिला अस्पताल आगमन पर अस्पताल प्रबंधन एवं समस्त स्टाफ द्वारा टीम का स्वागत किया गया।

कायाकल्प मूल्यांकन हेतु राज्य स्तरीय टीम में डॉ. टी. के. टोंडर, उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं; डॉ. नेतराम बेक, उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं; श्री आनंद साहू, कार्यक्रम प्रबंधक, एनएचएम; श्री महेश सिंह, राज्य सलाहकार, एनएचएम; श्री आसिम एक्का, संभागीय सलाहकार, एनएचएम तथा डॉ. उरया नाग, HSO-WHO रायपुर शामिल रहे।


निरीक्षण कार्यक्रम की शुरुआत अस्पताल की कार्यप्रणाली एवं कायाकल्प अभियान के अंतर्गत की गई तैयारियों से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण (Presentation) से हुई, जिसे हॉस्पिटल कंसल्टेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतीकरण में अस्पताल में स्वच्छता एवं हाइजीन, संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, शौचालय व्यवस्था, अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल वातावरण, अग्नि सुरक्षा, रिकॉर्ड एवं दस्तावेज संधारण तथा गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।


इसके पश्चात राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम द्वारा अस्पताल के विभिन्न विभागों, वार्डों एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्वच्छता एवं सैनिटेशन, इंफेक्शन प्रिवेंशन एवं कंट्रोल, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाएं, दवा एवं उपकरणों का रखरखाव, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, जल एवं विद्युत व्यवस्था, अस्पताल परिसर का सौंदर्यीकरण, हरित क्षेत्र, रिकॉर्ड संधारण तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुपालन का बारीकी से अवलोकन किया गया।


इस अवसर पर CMHO डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल, RMO डॉ. कार्तिकेय सिंह, BMO डॉ. अनित बक्सला (पोड़ी बचरा) सहित समस्त वार्ड प्रभारी, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा राज्य स्तरीय मूल्यांकन टीम के निरीक्षण में आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया।

कायाकल्प मूल्यांकन के दौरान जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वच्छ, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को टीम के समक्ष प्रदर्शित किया गया। अस्पताल परिसर में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, अग्नि सुरक्षा, मरीज सुविधाओं एवं गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए गए विभिन्न कार्यों का भी अवलोकन किया गया।

अस्पताल प्रबंधन एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों के समन्वित प्रयास, सक्रिय सहभागिता एवं टीम भावना से कायाकल्प राज्य स्तरीय मूल्यांकन कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।



जंगल में अचानक दिखे 5 ‘ओरंगुटान’, आखिर कहां से आए?

भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते, एक साथ पांच जानवर मिलने से वन्यजीव तस्करी का एंगल भी जांच में


बालासोर। ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मंगलवार को पांच ऐसे जानवर दिखाई दिए, जो देखने में ओरंगुटान जैसे नजर आ रहे हैं। एक साथ पांच जानवरों के मिलने की खबर सामने आते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। वन विभाग की टीम ने सभी पांचों को रेस्क्यू कर लिया है और अब उनकी पहचान तथा उनके यहां तक पहुंचने की पूरी कहानी की जांच की जा रही है।

बोर्नियो-सुमात्रा के जानवर ओडिशा कैसे पहुंचे?

ओरंगुटान प्राकृतिक रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों में पाए जाते हैं। भारत में उनका प्राकृतिक आवास नहीं है। ऐसे में बालासोर के जंगल में एक साथ पांच संदिग्ध ओरंगुटान का मिलना अपने आप में बड़ा रहस्य बन गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ये वास्तव में ओरंगुटान हैं, तो इन्हें ओडिशा तक कौन और कैसे लेकर आया?


अंतरराष्ट्रीय तस्करी का शक भी जांच के दायरे में

वन्यजीवों के लिए काम करने वाली स्थानीय संस्था के प्रवक्ता के मुताबिक मामले में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की संभावना को भी जांचा जा रहा है। रेस्क्यू किए गए पांचों जानवरों को जांच के लिए भेजा गया है और उन्हें क्वारंटीन में रखा जाएगा।

अब विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि ये पांचों जानवर वास्तव में ओरंगुटान हैं या कोई दूसरी प्रजाति, साथ ही इनके मूल स्थान और ओडिशा तक पहुंचने के रास्ते का भी पता चल सकेगा।

एक साथ पांच संदिग्ध ओरंगुटान का मिलना महज संयोग है या इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क? जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

CA प्लांटेशन में उलटी चाल? बारिश में शुरू हुई गड्ढों की खुदाई, मुगम बारी में मानसून में गड्ढा से खुदाई से भ्रष्टाचार की आशंका, गड्ढों की संख्या से लेकर मजदूरी भुगतान तक जांच की जरूरत

 


बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत मुगम बारी में CA (Compensatory Afforestation) प्लांटेशन फिर सुर्खियों में है,कारण पौधरोपण से ज्यादा उसकी तैयारी को लेकर है। मानसून सक्रिय होने के बावजूद CA प्लांटेशन के लिए गड्ढा खुदाई का काम कराया जा रहा है।मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस भूमि पर प्लांटेशन की तैयारी की जा रही है, उसे लेकर पहले स्थानीय ग्रामीणों का विरोध सामने आ चुका है। ग्रामीणों का कहना था कि संबंधित भूमि पर लंबे समय से ग्रामीण काबिज थे। इसके बावजूद बाद में यही भूमि वन विभाग को प्लांटेशन के लिए उपलब्ध हो गई।

काबिज ग्रामीणों की जमीन से CA प्लांटेशन तक

मुगम बारी सहित CA प्लांटेशन के लिए चिन्हित भूमि को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से ही विवाद की स्थिति रही है। ग्रामीणों के काबिज होने के बावजूद भूमि का उपयोग CA प्लांटेशन के लिए किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया था।अब उसी क्षेत्र में प्लांटेशन की तैयारी के तहत गड्ढे खोदे जाने से पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं। ग्रामीणों का पक्ष क्या था, उनकी आपत्तियों का निराकरण किस स्तर पर हुआ इन सभी बिंदुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

बता दें कि,वर्तमान में मुगम बारी में CA प्लांटेशन के लिए गड्ढा खुदाई का कार्य वन विभाग के द्वारा कराया जा रहा है। बारिस के दौरान पौधरोपण किया जाना संभव है, लेकिन गड्ढा खुदाई का समय संबंधित स्वीकृत CA योजना और तकनीकी कार्ययोजना से तय होता है। इसलिए मुगम बारी में इस समय हो रही खुदाई पर सवाल यह नहीं है कि बारिश में काम किया ही नहीं जा सकता, बल्कि सवाल यह है कि वर्तमान गड्ढा खुदाई स्वीकृत समय-सारणी और तकनीकी मापदंडों के मुताबिक हो रहा है या नहीं?

गौरतलब है कि CA प्लांटेशन का उद्देश्य वन क्षेत्र की भरपाई के लिए पौधरोपण करना है, लेकिन बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के मुगम बारी में सक्रिय बारिश के दौरान गड्ढा खुदाई कराए जाने की टाइमिंग अब सवालों के घेरे में है। आखिर जब मानसून के पहले ही प्लांटेशन की तैयारियां पूरी की जा सकती थीं, तो बारिश के बीच यह काम कराने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह कार्य स्वीकृत CA कार्ययोजना और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार हो रहा है? इन तमाम सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।